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रविवार, सितंबर 12, 2010

बेबाक टिप्पणियाँ (7)

क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (7)

प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें. उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें. उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव के आधार पर अपनी बेबाक टिप्पणियाँ कर दी. लेखों पर की कुछ टिप्पणियाँ निम्नलिखित है.किस लेख पर कौन सी की गई है यह जाने के लिए आपको http://teesarakhamba.blogspot.com/,  http://adaalat.blogspot.com/  और http://rajasthanlawyer.blogspot.com/  पर जाना होगा.इन पर प्रकाशित लेख व समाचारों को पढना होगा.

(1) मात्र अपनी संतान के प्रति मोह और प्रेम के कारण पत्नी की क्रूरता सहन करनी आवश्क तो नहीं है। फिर भी आपने काफी अच्छी जानकारी दी है.
(2) ऐसे मामलों में कुछ समाचार पत्रों के भ्रष्ट पत्रकार भी मात्र कुछ विज्ञापन के लिए मोबाईल कम्पनियों का साथ देते हैं. मेरे पास ऐसे अनेकों मामलों के पुख्ता सबूत है.फिर भी मैं श्री रतन सिंह शेखावत, बी.एस.पाबला, राहुल प्रताप सिंह राठौड़, महेंद्र मिश्र, नरेश सिंह राठौड़ और ताऊ रामपुरिया के भी विचारों से सहमत हूँ.

(3) आपने मुझे बहुत अच्छी जानकारी दी थी. उसी के आधार पर एक अन्य वकील के माध्यम से तीसरी बार अपनी जमानत याचिका लगवाई थी. मगर अफ़सोस- ढ़ाक के वहीँ तीन पात! चाहे पुरुष या महिला जज हो सब पक्षपात करते हैं और जो आरोप वुमंस सेल और धारा 125 के केस में थें/है ही नहीं उनको आधार बनाकर जमानत देने से इंकार कर रहे हैं और उन आरोपों के सन्दर्भ में कोई सबूत ही नही है.जिसका(छोटी मानसिकता का परिचय वाली बात कहकर) जिक्र मैंने आपको एक ईमेल में किया था.

हमारे देश के जजों, पुलिस और महिला आयोग की मानसिकता यह बनी हुई है कि आदमी ही औरत पर अत्याचार करता है, बल्कि आज महिला (पत्नी) और उसके परिवार वाले ज्यादा अत्याचार करते है. मगर यह सब जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी पैसो के लालच में खामोश रहता है और पति पर जुल्म करता है. मात्र कुछ कागज के टुकडों के लिए अपना ईमान और ज़मीर को भी बेच देता है या हम यह कहे सारे आवाम में नंगे है.
कम से कम जजों को अपनी (समय को देखते हुए) मानसिकता बदलने की जरूरत है.जहाँ पर देश के नेताओं पर कोई उम्मीद न हो. अब आप बताये कहाँ संघर्ष करूँ और कैसे. 20 अक्तूबर का जन्मदिन मनाकर और दीपावली के बाद आत्महत्या करने के सिवाय मेरे पास चारा ही क्या बचा है? पूरी तरह से भ्रष्ट न्याय व्यवस्था में कहाँ बगैर पैसों के न्याय की गुहार लगाऊ समझ नहीं आ रहा है. मेरा लगातार वजन भी गिरता जा रहा और हलक से रोटी भी नहीं उतरती है.
पहले वाले वकील ने पहली व दूसरी बार किन कारणों से जमानत नहीं हुई की कोई रिपोट नहीं दी थीं. उसने मेरे पैसे भी खा लिये और अदालत में सारे तथ्य भी सही से नहीं रखें. यह जानकारी आग्रमी जमानत ख़ारिज करने के आदेश की कापी निकलवाने पर पता चला है.उसी से जानकारी प्राप्त हुई कि- आग्रमी जमानत ख़ारिज करने की, स्वीकार करने की (जिससे आरोपी को गिरफ्तार न करे) और आवेदन करने की सूचना जांच अधिकारी को भेजी जाती है. तब जांच अधिकारी ने मेरी पत्नी को मेरे आवेदन की सूचना की जानकारी दी है. फिर वो उस दिन जज के पास हाजिर हुई है. मैं अपनी डिप्रेशन की बीमारी के चलते ही दुसरे प्रश्न में "आग्रमी" लिखना भूल गया था और कुछ उपरोक्त प्रश्न का जबाब (आपके अपने पेशे में बिजी होने के कारण ) बहुत देरी से प्राप्त हुआ और एक वकील को मात्र दूसरी बार के एक आदेश की प्रति के लिये एक हजार रूपये (अपनी विधवा माँ की पेंशन के लेकर) देने पड़े.

(4) आपके उपरोक्त लेख से संपूर्ण रूप से सहमत हूँ. कानून के शिकंजे में हमेशा छोटी मछलियाँ ही फंसती है.बड़े लोगों के पास वकीलों के लिये पैसा और सफेदपोश(जिनके लिये पैसा ही सब कुछ है) नेताओं का सहारा होता है.
(5) संयोग से जांच और पूछताछ के दौरान बॉलीवुड अभिनेता शाइनी आहूजा ने स्वीकार किया था कि उन्होंने नौकरानी की सहमति से उसके साथ यौन संबंध बनाए थे। उन्होंने कथित तौर पर नौकरानी से दुष्कर्म की बात भी स्वीकार की थी। शाइनी और प्रताड़ित महिला की चिकित्सा जांच और डीएनए जांच से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। शाइनी पर 14 जून, 2009 को उनके घर में उनकी घरेलू नौकरानी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और बंबई उच्च न्यायालय से 50,000 रुपये की जमानत राशि पर जमानत मिलने से पहले उन्हें पुलिस व न्यायिक हिरासत में विभिन्न जेलों में 110 दिन बिताने पड़े थे। इस घटना पर देशभर में व्यापक हंगामा होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग और मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने इसमें हस्तक्षेप कर प्रताड़ित महिला को जल्द न्याय दिलवाने के लिए मामले को त्वरित अदालत में ले जाने का निर्देश दिया था।                                                                              
मेरी राय: नौकरानी का यह कहना कि-उसके साथ इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। क्या पहले की गई जांचें झूठी थी? या अब मामला ले-देकर निपटा दिया है. अब राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशैली पर एक प्रश्न चिन्ह है? क्या राष्ट्रीय महिला आयोग जेल में बिताये 110 दिनों का कोई हिसाब देगा? इसका राष्ट्रीय महिला आयोग और सरकार मुआवजा देंगी? या यह कहे कि-कोई भी महिला किसी व्यक्ति को झूठे आरोप लगाकर जेल करवा दें उसका कोई माई का लाल जज कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. अब मेरी कानून व्यवस्था को यह चुनौती हैकि-अब क्यों नहीं कोई अदालत इस घटना पर संज्ञान लेती हैं? (क्रमश:)

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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