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सोमवार, जनवरी 30, 2017

हमारे जीवन का दर्शन ( दिसम्बर-2015 )

1 दिसम्बर 2015 : मोहजीत अपनी देह से भी नष्टो मोहा होते हैं.

2 दिसम्बर 2015 : कथनी और करनी में समरूपता रखना ही महान आत्मा का लक्षण है.

3 दिसम्बर 2015 : सच्ची सेवा वह है जिसमें सर्व की दुआओं के साथ ख़ुशी की अनुभूति हो.

4 दिसम्बर 2015 : ईश्वर से बुध्दि की लगन लगाना ही ईश्वर का सहारा लेना है. 

5 दिसम्बर 2015 : अपनी सूक्ष्म कमजोरियों का चिन्तन करके उन्हें मिटा देना ही स्व-चिंतन है.

6 दिसम्बर 2015 : ध्यान रहे ऐसा कोई कर्म न हो जो कुल का दीपक बुझ जाये.

7 दिसम्बर 2015 : सुनने-सुनाने में भावना और भाव को बदल देना भी वायुमंडल खराब करना है.

8 दिसम्बर 2015 : आपस में एक दो की विशेषताओं का वर्णन करो, कमियों का नहीं.

9 दिसम्बर 2015 : देश और समाज की सभी समस्याओं का हल है पवित्रता.

10 दिसम्बर 2015 : सम्पूर्ण अहिंसा अर्थात् संकल्प द्वारा भी किसी को दुःख न देना. 

11 दिसम्बर 2015 : सम्पूर्ण ब्रह्मचर्य ही सम्पूर्ण अहिंसा है.

12 दिसम्बर 2015 : किसी पर कुदृष्टि रखना भी पाप है, इसलिए आँखों को शीतल बनाओ.

13 दिसम्बर 2015 : काम महाशत्रु है, इस पर जीत पाने से जगतजीत बनेंगे.

14 दिसम्बर 2015 : ब्रह्मचर्य ही परमात्मा के समीप जाने का साधन है.

15 दिसम्बर 2015 : अपनी गलती दूसरे पर लगाना यह भी पर-चिन्तन है.  

16 दिसम्बर 2015 : मुशिकलों को प्रभु अर्पण कर दो तो हर मुश्किल सहज हो जायेगी.

17 दिसम्बर 2015 : विपत्तियों को सहने का बल केवल ईश्वर की याद से ही मिलता है.

18 दिसम्बर 2015 : जीवन का सच्चा विश्राम आत्म अनुभूति में है.

19 दिसम्बर 2015 : दूसरों के अवगुण न देखना ही सबसे बड़ा त्याग है.

20 दिसम्बर 2015 : कल्याण भावना रखने से दृष्टि और वृत्ति दोनों बदल जाती है.

2दिसम्बर 2015 : आत्मा का परमात्मा से मिलन ही सर्वश्रेष्ट मिलन है. 

22 दिसम्बर 2015 : ईश्वर की स्मृति से ही हम सद्गति प्राप्त कर सकते हैं. 

23 दिसम्बर 2015 : अब भगवान से फरियाद करने के बजाय उसे याद करो. 

24 दिसम्बर 2015 : चिंता छोड़ प्रभु चिन्तन करो.

25 दिसम्बर 2015 : संसार में भंयकर तूफान-आंधी के समय एक भगवान ही श्रेष्ट रक्षक है. 

26 दिसम्बर 2015 : दूसरों के दोष न देखो, अपने अंदर के दोष देखो तो निर्दोष बन जायेंगे. 

27 दिसम्बर 2015 : स्वभाव को सरल बनाओ तो समय व्यर्थ नहीं जायेगा. 

28 दिसम्बर 2015 : दूसरों को गुणों के आधार पर आगे रखना भी अपने को आगे बढ़ाना है.

29 दिसम्बर 2015 : जो सदा संतुष्ट है, वही सदा हर्षित एवं आकर्षणमूर्त है.

30 दिसम्बर 2015 : व्यर्थ कार्य जीवन को थका देता है, रचनात्मक कार्य सुख और तेजस्विता बढ़ा देता है.

31 दिसम्बर 2015 : जो सदा प्रसन्न रहता है उसके अंदर आलस्य नहीं हो सकता है, आलस्य सबसे बड़ा दुर्गुण है. 

सोमवार, नवंबर 09, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( नवम्बर-2015 )

1 नवम्बर  2015 : हर स्थिति में सबको सम्मान देते चलें. घृणित भावनाओं से अपनी रक्षा करने के लिए दूसरों को सम्मान दीजिये. 

2 नवम्बर  2015 : कभी-कभी सम्मान देना ही सबसे बड़ा योगदान सिद्ध होता है. 

3 नवम्बर  2015 : यदि कोई आप पर हंसता है तो खिन्न न हो, क्योंकि कम-से-कम आप उसे ख़ुशी तो दे रहे हैं. 

4 नवम्बर  2015 : यदि आप गपोड़ शंख लोगों के साथ सहमत हो जाते हैं तब उनकी निंदा के अगले पात्र आप ही होंगे.

5 नवम्बर  2015 : यदि आप प्रसन्नचित्त रहना चाहते हैं तब अपनी विशेषताओं के लिए स्वयं को तथा दूसरों को विशेषताओं के लिए उन्हें धन्यवाद दें. 
6 नवम्बर  2015 : स्वयं को वचाव करने के लिए कभी दूसरों पर दोषारोपण मत करें, क्योंकि समय के पास सत्य को प्रकट करने का अपना तरीका है.  

7 नवम्बर  2015 :  आपकी विशेषताओ का दूसरों पर प्रभाव पड़ता है, अत : इनका प्रयोग जिस सर्वोत्तम विधि से आप कर सकते हों, तब दूसरों की भलाई के लिए जरुर कीजिये.  

8 नवम्बर  2015 : ख़ुशी से बढ़कर पौष्टिक खुराक और कोई नहीं है. दूसरों को ख़ुशी देना सबसे बड़ा पूण्य का काम है. 

9 नवम्बर  2015 : जिस बात में अपना विवेक खाता है, वह कभी नहीं करना है. 

10 नवम्बर  2015 : अब समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप बनो और बनाओ. 

11 नवम्बर  2015 :गम्भीरता का गुण धारण कर लो तब व्यर्थ टकराव से बच जायेंगे. 

12 नवम्बर  2015 : विशेषताएं व गुण दाता की देन हैं, दाता को देखो, व्यक्ति को नहीं.  

13 नवम्बर  2015 : अपनी उन्नति का प्रयत्न करते रहिये. स्वयं को पतन की ओर मत ले जाईये, क्योंकि व्यक्ति स्वयं ही अपना मित्र भी है और स्वयं ही अपना शत्रु भी. 

14 नवम्बर  2015 : धन का दान करना अच्छा है परन्तु पवित्र, दानशील आत्मा बनना और भी अधिक अच्छा है. अपनी शक्तियों व गुणों का प्रयोग दूसरों की उन्नति हेतु कीजिए. 

15 नवम्बर  2015 : दुखों से भरी इस दुनियां में वास्तविक सम्पत्ति धन नहीं, संतुष्टता है. 
16 नवम्बर  2015 : एकाग्रता से ही सम्पूर्ण आनन्द प्राप्त हो सकता है. 

17 नवम्बर  2015 : जो सदा संतुष्ट है, वही सदा हर्षित एवं आकर्षण मूर्त है. 

18 नवम्बर  2015 : दिव्य गुण ही मानव का सच्चा श्रृंगार है. 

19 नवम्बर  2015 : कर्म इन्द्रियों पर राज्य करने वाला ही सच्चा राजा है. 

20 नवम्बर  2015 : स्वभाव को सरल बनाओ तब समय व्यर्थ नहीं जायेगा. 
21 नवम्बर  2015 : यह संसार हार-जीत का खेल है, इसे नाटक समझ कर खेलो. 

22 नवम्बर  2015 : "सत्य कर्म" युद्ध -क्षेत्र में जीतने का पहला साधन है. 

23 नवम्बर  2015 : स्वयं को ट्रस्टी समझकर चलो तब हल्केपन का अनुभव होगा. 

24 नवम्बर  2015 : जीते जी मरना सीख लो तब मृत्य के भी से छुट जायेंगे. 

25 नवम्बर  2015 : गुण चोर बनो तब सब अवगुण रूपी चोर भाग जायेंगे. 

26 नवम्बर  2015 : आशीर्वाद प्राप्त करना हो तब पुण्यात्मा बनो. 

27 नवम्बर  2015 : जैसा लक्ष्य रखेंगे वैसे लक्षण स्वत: आयेंगे. 

28 नवम्बर  2015 : इच्छाएं रखने वाला कभी अच्छा कर्म नहीं कर सकता है. 

29 नवम्बर  2015 : सत्य को सांसारिक आतंक डरा नहीं सकता है. 

30 नवम्बर  2015 : सत्य के सूर्य को कभी असत्य के बादल ढक नहीं सकते हैं. 
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रविवार, अक्तूबर 11, 2015

हमारे जीवन का दर्शन (अक्टूबर -2015 )

1 अक्टूबर 2015 : यदि आप दूसरों की कमजोरियों अपने मन में रखते हैं तब शीघ्र ही वे आपका अंग बन जाएँगी.

2 अक्टूबर 2015 : मन के संकल्पों को बीच-बीच में रोकने का अभ्यास कर लें तब थकावट नहीं होगी.  

3 अक्टूबर 2015 : परमात्मा को अपना साथी बना लें तब चिंता की रेखाएं चेहरे पर नहीं आएँगी. 

4 अक्टूबर 2015 : जब दुसरे गलतियाँ करते हैं तब उनको गिनते न रहिए. उनका विश्वास जीतिए ताकि आप उनकी कमजोरियों को मिटाने में सहयोग दें सकें. 
5 अक्टूबर 2015 : गलतफहमी प्रेमपूर्ण व शुद्ध विचारों से तथा समुचित समय पर सही ज्ञान देकर दूर की जा सकती है. 

6 अक्टूबर 2015 : यदि हमारा पैर फिसल जाये तब हम संभल सकते हैं, परन्तु जुबान फिसल जाये तब यह गहरा घाव कर देती है, इसलिए सावधान रहिये. 

7 अक्टूबर 2015 : सुन्दरता व गुणों  की ओर हर व्यक्ति आकर्षित होता है किन्तु कुरूप व अयोग्य की सहायता करना एक दुर्लभ गुण है. 

8 अक्टूबर 2015 : महान कार्य करने के लिए उमंग-उत्साह को अपना साथी बनाइए.  

9 अक्टूबर 2015 : इस संसार में दूसरों की लोभ-वृति के कारण बहुत से लोग भूखे मरते हैं. यदि हम बाँटना सीख लेते तब यह समस्या हल हो गई होती. 

10 अक्टूबर 2015 : यह ऑंखें प्रभु का विशेष उपहार हैं, इनके द्वारा दूसरों को प्रेम, शांति व ख़ुशी का दान करो. 

11 अक्टूबर 2015 : किसी से प्रतियोगिता करने के बजाए उसकी सहायता करना बेहतर है. 

12 अक्टूबर 2015 : स्वयं एक समस्या बनने के बजाय क्यों न हम दूसरों की समस्याएं हल करने में सहायक बन जाएँ ? 

13 सितम्बर 2015 : दूसरों को बदलने का प्रयत्न करने के बजाए स्वयं को बदल लेना कहीं अधिक अच्छा है. 

14 अक्टूबर 2015 : हर एक के विचार और स्वभाव में अंतर होता है लेकिन स्नेह में अंतर नहीं होना चाहिए. 

15 अक्टूबर 2015 : जो बात आपकी ख़ुशी को नष्ट करने वाली हो, उसे कभी नहीं सुनो. 

16 अक्टूबर 2015 : यदि आप अस्वस्थ हैं तब धैर्य रखिये तथा मन को स्वस्थ बनाये रखिये. 

17 अक्टूबर 2015 : यदि हम भविष्य के बारे में भयभीत हो जायेंगे तब वर्तमान में प्राप्त अवसरों को खो देंगे. 

18 अक्टूबर 2015 : सेवा में ईमानदारी का गुण सफलता मूर्त बना देता है.

19 अक्टूबर 2015 : अच्छा संग आगे बढ़ने का बल और हिम्मत देता है. 

20 अक्टूबर 2015 : आप अपने जीवन का महत्व समझकर चलो तब दूसरों भी महत्व देंगे. 

21 अक्टूबर 2015 : किसी दुसरे व्यक्ति को विपत्ति में देखकर हँसना आपकी अज्ञानता दर्शाता है.

22 अक्टूबर 2015 : कभी-कभी ईर्ष्यावश हम दूसरों को गिराना चाहते हैं, परन्तु ऐसा करके हम स्वयं ही गिर जाते हैं. 

23 अक्टूबर 2015 : आदर व सम्मान मांगने से नहीं, धारण करने से मिलता है. 

24 अक्टूबर 2015 : यदि आप केवल अपना ही ध्यान रखेंगे तब दूसरे आपका ध्यान रखना कम कर देंगे. 

25 अक्टूबर 2015 : अपनी दृष्टि को गुण ग्राहक बनाओ, अवगुणों को देखते हुए भी नहीं देखो. 

26 अक्टूबर 2015 : सबसे बड़ी सेवा है जीवन की खुशियों को दूसरों के साथ बाँटना. 

27 अक्टूबर 2015 : दूसरों की गलती सहन करना एक बात है, परन्तु उन्हें माफ़ कर देना और भी महान बात हैं. 

28 अक्टूबर 2015 : न किसी के धोखे में आओ, न किसी को धोखे में डालो. 

29 अक्टूबर 2015 : ईश्वर का स्मरण करने से हमारी शांति व ख़ुशी का खाता बढ़ जाता है. उन्हें भूल जाने से यह खाता घट जाता है. 

30 अक्टूबर 2015 : सहयोगी होने का अर्थ गुलाम बनना नहीं है. निराशाजनक परिस्थितियों में भी कभी आशा मत छोड़ें.  


31 अक्टूबर 2015 : जो कार्य हाथ में लो, वह निश्चय से करो तब सफलता अवश्य होगी. 


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शनिवार, अगस्त 29, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( सितम्बर -2015 )

1 सितम्बर 2015 :मान-शान की इच्छा से दिये गए लाख रूपये की तुलना में प्रेम व ईमानदारी से दान किये गए मुट्ठी भर चावल का अधिक महत्व है.

2 सितम्बर 2015 : यदि आप हिम्मत का पहला कदम आगे बढायेगे तब परमात्मा की सम्पूर्ण मदद मिल जायेगी.

3 सितम्बर 2015 : मुस्कराना, संतुष्टता की निशानी है. इसलिए सदा मुस्कराते रहो.

4 सितम्बर 2015 : क्या मेरे विचारों का स्तर ऐसा है कि मैं परमात्मा का बच्चा कहलाने का अधिकारी हूँ.
5 सितम्बर 2015 : स्वयं में दैवी गुणों का आह्वान करो तो अवगुण भाग जायेंगे.

6 सितम्बर 2015 : एक अच्छा, स्वच्छ मन वाला व्यक्ति दूसरों की विशेषताओं को देखता है. दूषित मन वाला व्यक्ति दूसरों में बुराई ही तलाशता है.

7 सितम्बर 2015 : जो संकल्प करो उसे बीच-बीच में दृढ़ता का ठप्पा लगाओ तब विजयी बन जायेंगे.

8 सितम्बर 2015 : जितना आप दूसरों में अवगुण देखेंगे, उतना ही आप पर अवगुणों का असर पड़ेगा, इसलिए गुणग्राही बनो.

9 सितम्बर 2015 : सहनशील बनो, सहनशीलता कायरता नहीं, वीरता है.

10 सितम्बर 2015 : स्वयं को सिद्ध करने का प्रयास क्यों किया जाये? आपकी निर्दोषिता से दूसरे लोग स्वत: ही समझ जायेंगे.

11 सितम्बर 2015 : दूसरों को सहयोग देना ही उन्हेया अपना सहयोगी बनाना है.

12 सितम्बर 2015 : धैर्यता, विश्वास और सहनशीलता ही सफलता की कुँजी है.

13 सितम्बर 2015 : नम्र बनो तो लोग नमन करते हुए सहयोग देंगे. 

14 सितम्बर 2015 : यह सत्य है कि "सत्य का अस्तित्व" है, सत्यता की महानता आपको महान बना देंगी.

15 सितम्बर 2015 : सदा प्रसन्न रहने के लिए प्रशंसा की इच्छा का त्याग करना आवश्यक है. 

16 सितम्बर 2015 :पवित्र प्रेम शाश्वत सम्बन्धों का आधार है. शिष्ट व्यवहार शालीनता से भरा होता है, जबकि दूषित व्यवहार अकीर्तिकार होता है. 

17 सितम्बर 2015 : अपने संकल्प, बोल और कर्म द्वारा सुख देने से सुख के देवता बन जायेंगे. 
18 सितम्बर 2015 : स्वयं की खोज के लिए स्वयं के प्रति सच्चा बनना होगा. 

19 सितम्बर 2015 : हमें सरल होना चाहिए, परन्तु मूर्ख नहीं. अपना सद-विवेक आपका अच्छा मित्र है, इसकी बात प्राय: सुनिये. 

20 सितम्बर 2015 : भगवान की इच्छाओं को पूर्ण करने से हमारी इच्छाएं स्वत: ही पूरी हो जाती है. 

21 सितम्बर 2015 : भगवान का बच्चा होने का अर्थ है कि उनकी विशेषताओं को स्वयं में प्रत्यक्ष करना.  
22 सितम्बर 2015 : यदि आप गलती करके स्वयं को सही सिद्ध करने का प्रयास करते हैं तब समय आपकी मूर्खता पर हंसा करेगा. 

23 सितम्बर 2015 : यदि आप अपने मन के संशयों को दूर नहीं करते तब मानों आप कैंसर की बीमारी को बढ़ने डे रहे हैं. 
24 सितम्बर 2015 :बीती बातों को भूलकर, बीती बातों से शिक्षा लेकर आगे के लिए सावधान रहिये.  
25 सितम्बर 2015 : अपने सहज स्वाभाविक स्वरूप में रहिए, यह कुछ और होने का स्वांग करने से कहीं अधिक अच्छा है. 

26 सितम्बर 2015 : यदि आपके संकल्प शुद्ध हैं तब जो आप सोचते हैं, वह कहना तथा जो आप कहते हैं वह करना सरल हो जाता है. 

27 सितम्बर 2015 : यदि आप हमेशा ऊँची दृष्टि रखते हैं तब आपका मस्तक स्वत: ऊँचा रहेगा. 

28 सितम्बर 2015 : सरलता में महान सौन्दर्य होता है. जो सरल है, वह सत्य के समीप है.
29 सितम्बर 2015 : चाहे कोई आपकी निंदा या अपमान करता है फिर भी उस पर मुस्कान व शुभकामनाओं के पुष्पों की वर्षा करें. 

30 सितम्बर 2015 : यदि कोई आपसे नाराज है और आपको बुरा-भला कह रहा है तब उस समय उत्तेजित होने के बजाय धैर्यता से काम लें. 



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गुरुवार, अगस्त 06, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( अगस्त -2015 )

1 अगस्त 2015 : जब तक आप प्रयत्न करना बंद न कर दें, अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता है. 

2 अगस्त 2015 : क्या आपको जीवन रूपी वृक्ष का ज्ञान है या आप केवल इसकी टहनियों के नीचे ही खड़े हैं?

3 अगस्त 2015 : धन कमाना बुरा नहीं है, धन का दुरूपयोग करना बुरा है.

4 अगस्त 2015 : कभी भी गलतफहमी के शिकार होकर अच्छे सम्बधों को बिगड़ने न दें. 

5 अगस्त 2015 : दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है.

6 अगस्त 2015 : लाठी व पत्थर से हड्डियाँ टूटती है परन्तु शब्दों से प्राय: सम्बन्ध टूट जाते हैं.

7 अगस्त 2015 : आलसी व्यक्ति को आसान-से-आसान काम भी कठिन लगता है. आलस्य ही मानव जीवन की प्रगति में बाधक है.

8 अगस्त 2015 : सज्जनता की परीक्षा आपके व्यवहार से होती है.

9 अगस्त 2015 : याद रखिये कि माँ-बाप के आचरण से बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं.

10 अगस्त 2015 : यदि आपने एक अवसर गँवा दिया तो आंसुओं के बादलों से अपनी दृष्टि धुंधली मत कीजिये. अपनी दृष्टि स्वच्छ रखिये.

11 अगस्त 2015 : जवाबदारियां सम्भालते हुए मन को सदा स्वतंत्र रखना-यह भी एक कला है.

12 अगस्त 2015 : विचार ही सभी कर्मों के बीज है इसलिए मुझे सिर्फ अच्छे, शुध्द बीज ही बोने चाहिए, जिनसे श्रेष्ठ फल प्राप्त होंगे.

13 अगस्त 2015 : असत्यता पर आधारित सम्बन्ध रेत की नींव पर बने भवन के समान हैं. 

14 अगस्त 2015 : अगर हम सत्य से छिपते हैं तब इसका अर्थ है कि हम अवश्य ही असत्य के संग रह रहे हैं. 

15 अगस्त 2015 : अगर आपको देखना ही है तब हर एक की विशेषताएं देखिये. अगर आपको कुछ छोड़ना ही है तब अपनी कमजोरियां छोडियें.     

16 अगस्त 2015 : अगर आँखें आत्मा की खिड़कियाँ है तब क्या आप अपनी आँखें स्वच्छ रखते हैं ? गंदी खिडकियों का अर्थ है कि आपके पास छिपाने के लिए कुछ है.

17 अगस्त 2015 : यदि में अपने सारे लेन-देन ईमानदारी से करता हूँ तब मुझे कभी भी भय का अनुभव नहीं होगा.

18 अगस्त 2015 : बुराई का चिन्तन करने या बुराई से डरने से बुराई मन में घर कर जाती है.

19 अगस्त 2015 : जहाँ प्रेम नहीं, वहां शांति नहीं हो सकती. जहाँ पवित्रता नहीं, वहां प्रेम नहीं हो सकता है.

20 अगस्त 2015 : नैतिकता तथा गुण हीरे-रत्नों से भी अधिक मूल्यवान हैं. यह मनुष्य को सन्तुष्टि प्रदान करते हैं तथा उसे प्रभु-प्रिय व लोक-प्रिय बना देते हैं. 

21 अगस्त 2015 : जिस व्यक्ति ने प्रशंसा करना तो सीखा है परन्तु ईर्ष्या करना नहीं, वह अत्यंत भाग्यशाली है.

22 अगस्त 2015 : जैसे अहं भाव से घमंड पैदा होता है वैसे ही विभ्रम (शक, संदेह) मोह का परिणाम है. 

23 अगस्त 2015 : दिव्य गुण मानव को ईश्वर के समीप ले आते हैं जबकि विकार उसे ईश्वर से दूर ले जाते हैं. 

24 अगस्त 2015 : धैर्य व नम्रता नामक दो गुणों से व्यक्ति की ईश्वर से समीपता बनी रहती है.

25 अगस्त 2015 : अहं भाव से मानव में वे सारे लक्षण आ जाते हैं, जिनसे वह अप्रिय बन जाता है.

26 अगस्त 2015 : अपशब्द प्रयोग का करने का अर्थ यह है कि मुझ में इतनी भी अक्ल नहीं है कि मैं अन्य शब्दों का चयन कर सकूं. 

27 अगस्त 2015 : ईश्वर से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने का अर्थ है कि आप सभी इच्छाओं से पार जा चुके हैं. 

28 अगस्त 2015 : यदि सत्यता व ईमानदारी मुझे सहज लगती हैं तब परमात्मा से प्रेम भी सहज प्राप्त हो सकता है. 

29 अगस्त 2015 : यदि व्यक्ति अपने नैतिक मूल्य खो देता है तब मानो अपना सब कुछ खो देता हैं. 

30 अगस्त 2015 : अच्छी व स्वच्छ प्रतियोगिता स्वस्थ बनाती है परन्तु ईर्ष्या एक घातक रोग है.

31 अगस्त 2015 : परमात्मा गुणों के सागर हैं. यदि आप किसी विकार की अग्नि में जल रहे हैं तब उस सागर में डुबकी लगाइये. 


ओवरसीज़ व हेल्थ मेडिक्लेम और गाड़ियों (1st पार्टी व 3rd पार्टी) के इंश्योरेस और भारत के सभी समाचार पत्रों / पत्रिकाओ में विज्ञापन बुकिंग हेतु : निष्पक्ष, निडर, आज़ाद विचार, अपराध विरोधी, स्वतंत्र पत्रकार, कवि और लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक (प्रधान संपादक-जीवन का लक्ष्य, शकुन्तला टाइम्स, उत्तम बाज़ार) पूर्व प्रत्याशी-उत्तमनगर विधानसभा 2008 व 2013 और दिल्ली नगर निगम 2007 व 2012 (वार्ड नं. 127 व 128) चुनाव चिन्ह-कैमरा # सम्पर्क सूत्र : 9910350461, 9868262751, 011-28563826  ईमेल: sirfiraa@gmail.com सोशल आई डी : www.facebook.com/sirfiraa, www.twitter.com/Nirbhik20 मेरे ब्लॉग :-www.rksirfiraa.blogspot.in, www.shakuntalapress.blogspot.in ऑफिस का पता : A-34-A, शीशराम पार्क, सामने-शिव मन्दिर, उत्तम नगर, नई दिल्ली-110059.

सोमवार, जुलाई 06, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( जुलाई-2015 )

1 जुलाई-2015 : अगर आप सदा स्वयं की दूसरों के साथ तुलना करते रहते हैं तो आप अवश्य ही अहंकार अथवा ईर्ष्या के शिकार हो जायेंगे. 

2 जुलाई-2015 : अच्छी पुस्तकें अच्छे साथी की तरह हैं. अश्लील साहित्य हमारे मन को दूषित करता है तथा हमें गलत रास्ते की ओर अग्रसर करता है.

3 जुलाई-2015 : समस्याएं चाहे कैसी भी हों परन्तु इनसे घबराइए मत, बल्कि इन्हें परीक्षा समझकर पास कीजिये.

4 जुलाई-2015 : जीवन को आबाद करना है तो मैं कौन हूँ ? इस पहेली को हल कीजिये. मैं और मेरे-मन के भान से मुक्त हो जाइये.

5 जुलाई-2015 : ज्ञान सबसे धन है. स्वयं से पूछें -"मैं कितना धनवान हूँ?"

6 जुलाई-2015 : यदि आपके मुख से गंदे बोल निकलते हैं तो आपका मन कैसा होगा?

7 जुलाई-2015 : हमारे वचन चाहे कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हों परन्तु दुनियां हमें हमारे कर्मों के द्वारा पहचानती है.

जुलाई-2015 : यदि आप मृत्यु से भयभीत होते हैं तो इसका अर्थ यह है कि आप जीवन का महत्त्व ही नहीं समझते हैं.

जुलाई-2015 : आप अपने अधिकारों के प्रति ही जागरूक न रहें अपितु इस बात का भी ध्यान रखें कि आप सही मार्ग पर हैं या नहीं.

10 जुलाई-2015 :अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से आप में अहंकार आ सकता है परन्तु आध्यामिक ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते है उतनी नम्रता आती है.

11 जुलाई-2015 : आप किसी समस्या के बारे में कितनी भी चिंता करें परन्तु क्या आपका चिंतित मन उस समस्या का समाधान कर सकता है ?

12 जुलाई-2015 : समय ही जीवन है. समय को बर्बाद करना अपने जीवन को बर्बाद करने के समान है.

13 जुलाई-2015 : किसी दूसरे व्यक्ति की आलोचना करने से पहले हमें अपने अन्दर झाँक कर देख लेना चाहिए.

14 जुलाई-2015 :लोभ को अभी जीतने का प्रयास करें, क्योंकि "मानव जब बूढ़ा भयो, तृष्णा भई जवान"

15 जुलाई-2015 :जब कोई व्यक्ति परमात्मा को आत्म-समर्पण करता है तो वह अपना मन ईश्वर की ओर लगाकर उसी की श्रीमत को सुनता है तथा उसी के अनुरूप कर्म करता है.

16 जुलाई-2015 : हम सितारों की दूरी तथा समुद्र की गहराई का माप करते हैं परन्तु हम कौन हैं तथा इस संसार में क्यों आये हैं, इस विषय में कितना जानते हैं?

17 जुलाई-2015 :कभी-कभी हम दूसरों को बदलने के लिए बाध्य कर देते हैं, क्योंकि हम चाहते हाँ कि वे वैसे ही बनें, जैसा हम चाहते हैं.

18 जुलाई-2015 : किसी चीज़ को समझने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है किन्तु उसे महसूस करने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है.

19 जुलाई-2015 : एक बार आपको कुछ न करने की आदत पड़ जाये तो आप पायेंगे कि व्यस्त होने के लिए समय ही नहीं बचता है.

20 जुलाई-2015 : दर्पण में आप अपना चेहरा देख सकते हैं, चरित्र नहीं.
21 जुलाई-2015 : हमारे विचारों का स्तर ही हमारी निजी प्रसन्नता का स्तर निर्धारित करता है. 

22 जुलाई-2015 : अगर आप अतीत (बीती) को ही याद करते रहेंगे तो वर्तमान में जीना कठिन लगेगा व भविष्य असम्भव प्रतीत होगा.

23 जुलाई-2015 : यदि घर में हिंसा शुरू हो जाएँ तो यह समाज में खून-खराबे जैसा उग्र रूप धारण कर सकती है.

24 जुलाई-2015 :  यदि आन्तरिक स्थिति अशांति की होगी तो सभी बाहरी चीजों मिएँ गडबडी मालूम पड़ती हैं.

25 जुलाई-2015 : आपके मुख से उच्चारित सभी शब्दों में से कितने शब्द परमात्मा के प्रति होते हैं?

26 जुलाई-2015 : वर्तमान समय जो कुछ आपके हाथ में है, यदि आप उसको महत्त्व नहीं देते हैं तब जो भविष्य में आपको मिलने वाला है , उसका सम्मान कैसे कर सकेंगे? 

27 जुलाई-2015 :कौन-सी चीज़ अधिक महत्त्वपूर्ण है-आपका जीवन स्तर या उचित आदर्शों वाला जीवन?

28 जुलाई-2015 : यदि कोई व्यक्ति नेत्रहीन है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह अंधकार में है.

29 जुलाई-2015 :चरित्र ऐसी वस्तु है जो स्थूल दर्पण में नहीं देखी जा सकती है.

30 जुलाई-2015 :सावधान रहिए-आपकी प्रत्येक अभिव्यक्ति क्रिया की प्रतिक्रिया होती है.

31 जुलाई-2015 : श्रेष्ठ स्मृतियों का स्विच आपके हाथ में हो तो जीवन आनन्दमय बन जायेगा.


ओवरसीज़ व हेल्थ मेडिक्लेम और गाड़ियों (1st पार्टी व 3rd पार्टी) के इंश्योरेस और भारत के सभी समाचार पत्रों / पत्रिकाओ में विज्ञापन बुकिंग हेतु : निष्पक्ष, निडर, आज़ाद विचार, अपराध विरोधी, स्वतंत्र पत्रकार, कवि और लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक (प्रधान संपादक-जीवन का लक्ष्य, शकुन्तला टाइम्स, उत्तम बाज़ार) पूर्व प्रत्याशी-उत्तमनगर विधानसभा 2008 व 2013 और दिल्ली नगर निगम 2007 व 2012 (वार्ड नं. 127 व 128) चुनाव चिन्ह-कैमरा # सम्पर्क सूत्र : 9910350461, 9868262751, 011-28563826  ईमेल: sirfiraa@gmail.com सोशल आई डी : www.facebook.com/sirfiraa, www.twitter.com/Nirbhik20 मेरे ब्लॉग :-www.rksirfiraa.blogspot.in, www.shakuntalapress.blogspot.in ऑफिस का पता : A-34-A, शीशराम पार्क, सामने-शिव मन्दिर, उत्तम नगर, नई दिल्ली-110059.

बुधवार, जून 25, 2014

कुछ यात्राएँ निराशाजनक भी साबित होती है

दोस्तों, मैंने कल अपनी भतीजी चारू जैन के साथ एक छोटी सी रोहतक, हरियाणा की यात्रा की. जो उम्मीदों के अनुरूप बहुत ही निराशाजनक रही. दरअसल मेरी भतीजी एम.बी.बी.एस का कोर्स करना चाहती है. पिछले साल ही बारहवीं पास कर ली थी और दाखिले से पहले होने वाली परीक्षा में भी पास हो गई थी. लेकिन उसकी आयु कम होने के कारण दाखिला नहीं मिल पाया था.


इस बार उसने काफी कोचिंग भी ली और परीक्षा में पास भी हो गई. मगर इस बार थोड़े कम नम्बर छह सौ में से चार सौ एक आये. दिल्ली के कालेज में दाखिला नहीं मिल सकता था. फिर थोड़े बहुत चांस थें तो हमारे भारत की चरमराई हुई डाक व्यवस्था (दिल्ली की दिल्ली में दो दिन में भी स्पीड पोस्ट से भरा हुआ फॉर्म अपने स्थान पर नहीं पहुंचा था) के कारण वो भी चले गए. 

हरियाणा के लिए प्रयास शुरू कियें. फिर किसी तरह से जानकारी एकत्रित करके गुडगांव दो बार फॉर्म लेने भी गई. मगर वहां नहीं मिलने के स्थिति में रोहतक से फॉर्म लेकर आई और फिर एक दिन अपने पापा के साथ जाकर जमा करवाकर भी आई. 

जानकारी के अभाव में भतीजी और साइबर कैफे की गलती से दाखिले से पहले होने वाली परीक्षा के फॉर्म में नजदीकी राज्य न भरने के कारण कल रोहतक के कालेज (दिल्ली हो या अन्य राज्य के कालेज हो. कोई सही जानकारी नहीं देता है. जब मेरी भतीजी की अंक तालिका पर नजदीकी राज्य का नाम नहीं था तो यदि कालेज जानकारी देता तब मेरी भतीजी तीन हजार का फॉर्म ही नहीं खरीदती और जमा करवाती.बस कालेज वालों को तो अपने फॉर्म बेचने से मतलब है) की कौन्सिलिंग में मेरी भतीजी का नाम तक लिस्ट में नहीं आया था और यात्रा आदि काफी पैसे भी खर्च हुए. मगर कोई लाभ नहीं मिला. 

इससे मेरी भतीजी को बहुत निराशा हुई और आँखें भी भर आई थी. फिर मैंने समझाया कि बेटा हर दिन एक जैसा नहीं होता है. वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को नहीं मिलता है. हमारा काम केवल प्रयास करना है और हमने प्रयास भी किये और मेहनत भी. जब लोग सत्रह युद्ध हारकर भी अठारहवा युद्ध जीत सकते हैं. तब हम क्यों एक दो प्रयास में अपना हौंसला छोड़ दें. आज नहीं तो कल हमें मंजिल जरुर मिलेगी अपना प्रयास हमें नहीं छोड़ना है. यह मन में दृढ निश्चय कर लो.  

अब देखो एक अब ऑनलाइन कौन्सिलिंग होनी है. क्या पता उसमें उसका नम्बर आ जाये? आप सभी दोस्त अपनी प्यारी और अच्छी-अच्छी प्रेरणादायक टिप्पणियों या चित्रों से मेरी भतीजी का कुछ हौंसला बढाओ. मुझे पूरी उम्मीद है कि आप ऐसा जरुर करेंगे.

दोस्तों, सच बताऊ अपनी भतीजी को तो समझाया दिया मगर मुझे उसके कारण खुद भी बहुत निराशा हो रही थी. मैंने कोई दो-तीन घंटे पहले उपरोक्त(नीचे)लिंक वाले वीडियो देखे/सुने. तब जाकर कल की यात्रा के अनुभव आप तक पहुँचाने की हिम्मत कर पाया हूँ.मैं जब भी थोडा सा निराश होता हूँ किसी के व्यवहार या बात को लेकर तब मैं अक्सर इन लिंकों जरुर सुन लेता हूँ. मुझे तो काफी ऊर्जा मिलती है इसको देखकर/सुनकर. बाकी हर व्यक्ति पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है. मेरा ऐसा मानना है.

खुशनुमा जीवन जीने की कला के लिंक 

कौन्सिलिंग होने के इंतजार में बैठे छात्र व उनके अभिभावक और रोहतक बस अड्डे के दो चित्र.
 
















मंगलवार, जनवरी 14, 2014

स्व. श्री जगदीश राय जैन की पुण्य स्मृति में रक्तदान शिविर

नई दिल्ली : स्वर्गीय श्री जगदीश राय जैन (ककरोई वाले) की 11 वीं पुण्य स्मृति (19.05.1929-07.01.2003) में डॉ. एन.के. भाटिया द्वारा संचालित "मिशन जन जाग्रति ब्लड बैंक" के सहयोग से "दृष्टि सोसायटी फोर सोशल वैलफेयर" एवं "लांयस क्लब पीतमपुरा कोहाट" के माध्यम से संयोजक श्रीमती अंगूरी देवी जैन एवं समस्त परिवार द्वारा विगत दिन बारह जनवरी 2014 वार-रविवार को सुबह दस बजे से मैट्रो पिलर नं. 380 के नजदीक व सरोज होस्पिटल के सामने, सैक्टर-आठ, रोहिणी, दिल्ली-85 में रक्तदान शिविर लगाया गया. 
रक्तदान शिविर में श्रीमती अंगूरी देवी जैन के समस्त बेटे-बहु श्री तिलक राय जैन-संतोष जैन, लाजपत राय जैन-अनीता जैन, विनोद जैन-वीणा जैन, सतीश जैन-मंजू जैन, अजय जैन-पूनम जैन उन की बेटियां और दामाद श्रीमती शीला जैन-सुभाष चन्द्र जैन, शशि जैन-नरेश जैन सहित उनके पोते-पोतियों गगन जैन, अंशुल जैन, विशाल व अंकुर जैन, शिरीष जैन, सक्षम जैन व मीनू जैन, शैफाली व निधि जैन, स्वाति व रशिम जैन, श्रुति जैन और सौम्या जैन के अलावा उनके दोता-दोती गौतम जैन-दिव्या जैन आदि का बहुत ही बहुमूल्य सहयोग रहा. इस अवसर पर उनके जैन परिवार से जुड़े अन्य रिश्तेदारों की उपस्थिति भी बहुत ही उल्लेखनीय रही.
 
 जहाँ एक ओर सभी रक्तदान करने वालों को "लांयस क्लब पीतमपुरा कोहाट" की ओर से एक प्रमाण पत्र दिया व  "दृष्टि सोसायटी फोर सोशल वैलफेयर" की ओर से जूस, कॉफी, बिस्कुट, फल और भोजन आदि की व्यवस्था थीं और "मिशन जन जाग्रति ब्लड बैंक" द्वारा सभी रक्तदाताओं को एक-एक डोनोर्स कार्ड दिया गया था. वहीँ दूसरी ओर संयोजक श्रीमती अंगूरी देवी जैन एवं समस्त परिवार द्वारा सभी रक्तदाताओं को एक-एक दस ग्राम का चांदी का सिक्का "उपहार" स्वरूप दिया.
इस अवसर पर शैफाली जैन पुत्री श्री लाजपत राय जैन को ग्यारह अपने दोस्तों का रक्तदान करने  के लिए प्रेरित करने के संदर्भ में  "लांयस क्लब पीतमपुरा कोहाट", "दृष्टि सोसायटी फोर सोशल वैलफेयर" और "मिशन जन जाग्रति ब्लड बैंक" के डॉ. एन.के. भाटिया द्वारा एक सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया. इस मौके पर शैफाली जैन ने संवाददाता को बताया कि-मैं इस बार हिमोग्लोबिन कम होने के कारण अपना रक्त नहीं दे पाई मगर मुझे इस बात की खुशी है कि मैं कम से कम अपने ग्यारह दोस्तों का रक्तदान करवाने में सहयोगी बन सकी. इसी प्रकार काफी अनेक व्यक्ति उनका हिमोग्लोबिन कम होने के कारण अपना रक्त दान नहीं कर पायें. जिसमें उपरोक्त संवाददाता रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक भी शामिल है. 
रक्तदान शिविर में एक रोचक बात यह हुई कि उपरोक्त शिविर शाम चार बजे तक ही चलाया जाने वाला था मगर रक्तदानकर्त्ताओं के अति उत्साह के कारण शाम सात बजे तक रक्तदान करने वालों का आना-जाना लगा रहा ओर अपना टेंट आदि का सामान समेटने आये तीन मजदूरों ने भी अपना रक्त दान किया. जब उपरोक्त संवाददाता के सामने ही मजूदरों ने "दृष्टि सोसायटी फोर सोशल वैलफेयर" के अध्यक्ष विनोद जैन से पूछा कि -क्या गरीबों का खून भी लिया जाता है ? तब श्री विनोद जैन ने उनको समझाया यहाँ पर अमीर और गरीब का भेदभाव नहीं होता है और रक्तदान करना तो एक पुण्य का काम है. हो सकता है आपके इस पुण्य कर्म से अगले जन्म आप गरीब न हो. इस उपरोक्त घटना को देखकर कहा जा सकता है कि आज हमें रक्तदान करवाने के लिए सही से लोगों का मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है. जो आज सरकारी योजनाओं में बहुत ज्यादा अभाव देखने को मिलता है. 
रक्तदान शिविर में कुल 135 यूनिट ब्लड बैंक को रक्त मिला. जिसमें ए पोजिटिव की-20, बी पोजिटिव-54, ओ पोजिटिव-46, ए बी पोजिटिव-10 और ए नेगटिव-1, बी नेगटिव-3, ओ नेगटिव-1 यूनिट रक्त शामिल था. यहाँ एक बात गौरतलब है कि मात्र एक सप्ताह पहले ही इस शिविर के स्थान से मात्र सौ मीटर दूरी पर लगाए रक्तदान शिविर में मात्र 44 यूनिट ही रक्त आया था. 

सोमवार, दिसंबर 09, 2013

चुनाव चिन्ह "झाड़ू" और जलती हुई "बैटरी टॉर्च" से वोटर हुए कन्फ्यूज


नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा के कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव चिन्ह "झाड़ू" और जलती हुई "बैटरी टॉर्च" के कारण मतदाताओं में संशय की स्थिति बनी रही। कुछ वोटरों ने इसे चुनाव चिह्न "झाड़ू" समझकर गलती करने की बात भी कही है। उत्तम नगर, जनकपुरी, त्रिनगर, मुंडका, विश्वास नगर विधानसभा सहित कुल उनतीस सीटों पर वोटर्स को यह चुनाव चिह्न नजर आया। कई मतदाताओं ने माना झाड़ू और जलती टार्च के निशान में अंतर नहीं कर पाए. मतदाताओं को इस बात को लेकर काफी परेशानी हो रही थी कि कौन-सा किसका चुनाव निशान है। वैसे तो आम आदमी पार्टी के मतदाता काफी जागरूक थे, लेकिन कम पढ़े-लिखे और झुग्गी के मतदाताओं को काफी परेशानी हुई। हालांकि ज्यादातर जगहों पर झाड़ू और जलती हुई टॉर्च में चार-पांच तो कहीं-कहीं पर दो-तीन चुनाव निशानों का ऊपर-नीचे का अंतर था।


इस कारण से अनेक निर्दलियों को बिना प्रचार करें ही काफी फायदा मिला और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के उम्मीदवार को पीछे छोड़ते हुए अपनी-अपनी विधानसभा में चौथे, पांचवे, छठे, सातवें और नौवें स्थान प्राप्त किये. जहाँ एक ओर "आम आदमी पार्टी" के वोट प्रतिशत में फर्क आया. वहीँ दूसरी ओर जनकपुरी विधानसभा की सीट उसके हाथ आते-आते बच गई, क्योंकि वहाँ भाजपा के उम्मीदवार प्रो. जगदीश मुखी (42886) ने "आप" के उम्मीदवार राजेश ऋषि (40242) को केवल 2644 वोटों से ही हारा है. जबकि उनके कवरिंग उम्मीदवार संजय पुरी ने बिना किसी प्रकार का प्रचार किये ही 4332 वोट प्राप्त किये हैं. जिनका चुनाव चिन्ह जलती हुई "बैटरी टॉर्च" था. इसमें सबसे ज्यादा फायदा उत्तम नगर विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार श्याम बाबू गुप्ता को हुआ, उन्हें 5272 वोट प्राप्त हुए थें और उनके द्वारा किये प्रचार ने भी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. इस पर आम आदमी पार्टी के लोगों का कहना था कि यह चुनावी टोटके न तो भाजपा के काम आएंगे, न ही कांग्रेस के। उत्तम नगर विधानसभा में वोट डालने गए एक मतदाता ने बताया कि मिलते जुलते चुनाव चिह्न से खासतौर पर उन बुजुर्ग मतदाताओं के सामने थोड़ी परेशानी पेश आती है, जिन्हें न तो पढ़ना आता है और आंखें कमजोर होने के कारण चित्र पहचानने में परेशानी होती है। मिलते-जुलते चुनाव चिह्न के कारण आप के कुछ मतदाताओं से गलती होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता। आप सभी नीचे दी सूची देख सकते हैं.



विधानसभा नं. व नाम-उम्मीदवार का नाम- प्राप्त वोट =विधानसभा में स्थान 
  8.  मुंडका -                          राजकुमार परिहार               2912                                        5
14 शालीमार बाग-           जी.एल.खन्ना                3751                               4

16 त्रिनगर -                  धर्मेन्द्र कुमार राय            2313                               5

17 वजीरपुर-                 सुभाष चन्द्र सैनी             1008                                6
19 सदर बाज़ार-              जय प्रकाश                    2785                                5
20 चांदनी चौंक-             मौ. शाहजमा                  1461                                5
21 मटिया महल-           उमर फारुक                    1668                                5
25 मोती नगर-              संजीव गुप्ता                     2681                               4
27 राजौरी गार्डन-           राजेन्द्र                          2468                               5
28 हरिनगर-                 सतपाल सिंह                  4649                               4
30 जनकपुरी-                संजय पुरी                     4332                                4
32 उत्तम नगर-              श्याम बाबू गुप्ता               5272                                4
33 द्वारका-                    रजनीश कुमार झा           4398                                4
34 मटियाला-                सत्येन्द्र सिंह                  2718                                4
37 पालम-                     नीरज कुमार शर्मा          3631                                 5
43 मालवीय नगर-          किशोर                         2389                                 4
49 संगम विहार-            दशरथ चौहान                1500                                  6
51 कालकाजी-               धर्मेन्द्र कुमार                 3092                                 4
52 तुगलकाबाद-             शीशपाल                      1269                                   5
53 बदरपुर-                    ओमप्रकाश गुप्ता            1275                                   5
54 ओखला-                    संतोष कुमार                  737                                   9
55 त्रिलोकपुरी -              जगदीश प्रसाद               4175                                  5
58 लक्ष्मी नगर-              मोहम्मद नईम              3410                                  4
59 विश्वास नगर -            उषा सुरयान                 3221                                   4
60 कृष्णा नगर-               सहरुर                         2876                                   4
62 शाहदरा-                     अचल शर्मा                  2725                                   4
66 घोंडा-                         किरण पाल सिंह           1857                                   6
67 बाबरपुर-                    शागुफ्ता रानी               2744                                  7
69 मुस्तफाबाद-               ब्रिजेश चन्द्र शुक्ला         1740                                  6
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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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