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रविवार, अक्तूबर 11, 2015

हमारे जीवन का दर्शन (अक्टूबर -2015 )

1 अक्टूबर 2015 : यदि आप दूसरों की कमजोरियों अपने मन में रखते हैं तब शीघ्र ही वे आपका अंग बन जाएँगी.

2 अक्टूबर 2015 : मन के संकल्पों को बीच-बीच में रोकने का अभ्यास कर लें तब थकावट नहीं होगी.  

3 अक्टूबर 2015 : परमात्मा को अपना साथी बना लें तब चिंता की रेखाएं चेहरे पर नहीं आएँगी. 

4 अक्टूबर 2015 : जब दुसरे गलतियाँ करते हैं तब उनको गिनते न रहिए. उनका विश्वास जीतिए ताकि आप उनकी कमजोरियों को मिटाने में सहयोग दें सकें. 
5 अक्टूबर 2015 : गलतफहमी प्रेमपूर्ण व शुद्ध विचारों से तथा समुचित समय पर सही ज्ञान देकर दूर की जा सकती है. 

6 अक्टूबर 2015 : यदि हमारा पैर फिसल जाये तब हम संभल सकते हैं, परन्तु जुबान फिसल जाये तब यह गहरा घाव कर देती है, इसलिए सावधान रहिये. 

7 अक्टूबर 2015 : सुन्दरता व गुणों  की ओर हर व्यक्ति आकर्षित होता है किन्तु कुरूप व अयोग्य की सहायता करना एक दुर्लभ गुण है. 

8 अक्टूबर 2015 : महान कार्य करने के लिए उमंग-उत्साह को अपना साथी बनाइए.  

9 अक्टूबर 2015 : इस संसार में दूसरों की लोभ-वृति के कारण बहुत से लोग भूखे मरते हैं. यदि हम बाँटना सीख लेते तब यह समस्या हल हो गई होती. 

10 अक्टूबर 2015 : यह ऑंखें प्रभु का विशेष उपहार हैं, इनके द्वारा दूसरों को प्रेम, शांति व ख़ुशी का दान करो. 

11 अक्टूबर 2015 : किसी से प्रतियोगिता करने के बजाए उसकी सहायता करना बेहतर है. 

12 अक्टूबर 2015 : स्वयं एक समस्या बनने के बजाय क्यों न हम दूसरों की समस्याएं हल करने में सहायक बन जाएँ ? 

13 सितम्बर 2015 : दूसरों को बदलने का प्रयत्न करने के बजाए स्वयं को बदल लेना कहीं अधिक अच्छा है. 

14 अक्टूबर 2015 : हर एक के विचार और स्वभाव में अंतर होता है लेकिन स्नेह में अंतर नहीं होना चाहिए. 

15 अक्टूबर 2015 : जो बात आपकी ख़ुशी को नष्ट करने वाली हो, उसे कभी नहीं सुनो. 

16 अक्टूबर 2015 : यदि आप अस्वस्थ हैं तब धैर्य रखिये तथा मन को स्वस्थ बनाये रखिये. 

17 अक्टूबर 2015 : यदि हम भविष्य के बारे में भयभीत हो जायेंगे तब वर्तमान में प्राप्त अवसरों को खो देंगे. 

18 अक्टूबर 2015 : सेवा में ईमानदारी का गुण सफलता मूर्त बना देता है.

19 अक्टूबर 2015 : अच्छा संग आगे बढ़ने का बल और हिम्मत देता है. 

20 अक्टूबर 2015 : आप अपने जीवन का महत्व समझकर चलो तब दूसरों भी महत्व देंगे. 

21 अक्टूबर 2015 : किसी दुसरे व्यक्ति को विपत्ति में देखकर हँसना आपकी अज्ञानता दर्शाता है.

22 अक्टूबर 2015 : कभी-कभी ईर्ष्यावश हम दूसरों को गिराना चाहते हैं, परन्तु ऐसा करके हम स्वयं ही गिर जाते हैं. 

23 अक्टूबर 2015 : आदर व सम्मान मांगने से नहीं, धारण करने से मिलता है. 

24 अक्टूबर 2015 : यदि आप केवल अपना ही ध्यान रखेंगे तब दूसरे आपका ध्यान रखना कम कर देंगे. 

25 अक्टूबर 2015 : अपनी दृष्टि को गुण ग्राहक बनाओ, अवगुणों को देखते हुए भी नहीं देखो. 

26 अक्टूबर 2015 : सबसे बड़ी सेवा है जीवन की खुशियों को दूसरों के साथ बाँटना. 

27 अक्टूबर 2015 : दूसरों की गलती सहन करना एक बात है, परन्तु उन्हें माफ़ कर देना और भी महान बात हैं. 

28 अक्टूबर 2015 : न किसी के धोखे में आओ, न किसी को धोखे में डालो. 

29 अक्टूबर 2015 : ईश्वर का स्मरण करने से हमारी शांति व ख़ुशी का खाता बढ़ जाता है. उन्हें भूल जाने से यह खाता घट जाता है. 

30 अक्टूबर 2015 : सहयोगी होने का अर्थ गुलाम बनना नहीं है. निराशाजनक परिस्थितियों में भी कभी आशा मत छोड़ें.  


31 अक्टूबर 2015 : जो कार्य हाथ में लो, वह निश्चय से करो तब सफलता अवश्य होगी. 


नोट : तस्‍वीरों का इस्‍तेमाल सिर्फ प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है। फोटो-गूगल+फेसबुक साभार.
ओवरसीज़ व हेल्थ मेडिक्लेम और गाड़ियों (1st पार्टी व 3rd पार्टी) के इंश्योरेस और भारत के सभी समाचार पत्रों / पत्रिकाओ में विज्ञापन बुकिंग हेतु : निष्पक्ष, निडर, आज़ाद विचार, अपराध विरोधी, स्वतंत्र पत्रकार, कवि और लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक (प्रधान संपादक-जीवन का लक्ष्य, शकुन्तला टाइम्स, उत्तम बाज़ार) पूर्व प्रत्याशी-उत्तमनगर विधानसभा 2008 व 2013 और दिल्ली नगर निगम 2007 व 2012 (वार्ड नं. 127 व 128) चुनाव चिन्ह-कैमरा 
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5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जीवनोपयोगी बातें पढ़वाने के लिए आभार!

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    1. कविता रावत जी, अपना कीमती समय देकर ब्लॉग पर आकर पोस्ट को पढने के लिए और टिप्पणी करने हेतु आपका आभार. जीवनोपयोगी की श्रंखला मैंने जुलाई 2015 से शुरू की हुई है. यदि आपको समय मिले तो उन पोस्टों को पढ़ें.

      हटाएं
  2. आपको जन्मदिन के साथ ही नवमी व विजयादशमी की बहुत-बहुत हार्दिक मंगलकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुभकामनाएं प्रेषित करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार है जी.

      हटाएं

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
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