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आईये! हम अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी में टिप्पणी लिखकर भारत माता की शान बढ़ाये.अगर आपको हिंदी में विचार/टिप्पणी/लेख लिखने में परेशानी हो रही हो. तब नीचे दिए बॉक्स में रोमन लिपि में लिखकर स्पेस दें. फिर आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा. उदाहरण के तौर पर-tirthnkar mahavir लिखें और स्पेस दें आपका यह शब्द "तीर्थंकर महावीर" में बदल जायेगा. कृपया "निर्भीक-आजाद पंछी" ब्लॉग पर विचार/टिप्पणी/लेख हिंदी में ही लिखें.

शनिवार, अक्टूबर 29, 2011

नाम के लिए कुर्सी का कोई फायदा नहीं

रमेश कुमार जैन ने "सिर-फिरा" दिया नाम से गूगल के ब्लॉग "ब्लॉग की खबरें" पर प्रकाशित एक विवादित पोस्ट को पूरा पढ़ने और समझने के लिए यहाँ पर और पोस्ट के नाम पर क्लिक करें. यह विवाद 03 जुलाई 2011 से लेकर 23 जुलाई 2011 लेकर चला था. जिसमें सिध्दांतों और कार्यशैली को लेकर लेखन व विचारों के माध्यम से युध्द हुआ.फिर मैंने "सच लिखने का ब्लॉग जगत में सबसे बड़ा ढोंग-सबसे बड़ी और सबसे खतनाक पोस्ट" नामक पोस्ट लिखने की श्रखंला शुरू की. जिससे यहाँ पर किल्क करके पढ़ा जा सकता हैं.
मेरे बड़े भाई हरीश सिंह जी, आपने इस नाचीज़ "सिरफिरा" को "प्रसार व्यवस्थापक" के पद के योग्य पाया है. उसके लिए आपका दिल की गहराइयों से शुक्रगुजार हूँ. जब आपने मुझे "सहयोगी" के रूप में शामिल किया था.तब मैंने लिखा था कि-आपने मुझे इसमें शामिल करके जो मान-सम्मान दिया है. उसका शुक्रगुजार हूँ. मगर फ़िलहाल कुछ निजी समस्याओं के कारण मैं ज्यादा योगदान देने में असमर्थ रहूँगा.
      मुझे आपसे एक शिकायत है कि आपने एक बार मुझे फोन करके या ईमेल भेजकर नहीं पूछा. मेरा विचार आपको "प्रसार व्यवस्थापक" बनाने का है. आप क्यों एक तरफा फैसले लेते हैं? मुझे ऐसी कुर्सी नहीं चाहिए. जिसके लिए मैं मानसिक रूप से तैयार न होऊं.मुझे "नाम" नहीं "काम" चाहिए. जब मैं काम करने में असमर्थ हूँ. तब नाम के लिए कुर्सी का कोई फायदा नहीं है. हमारे देश में कुर्सी के लिए स्वार्थी लोगों/नेताओं क्या कोई कमी है? आप मेरे संदर्भ में कोई भी फैसला लेने से पहले मुझसे बातचीत जरुर करें. उपरोक्त "प्रसार व्यवस्थापक" पद के नियमों-शर्तों और जिम्मेदारियों से अवगत करवाए बिना मुझे पद नहीं देना चाहिए था. अगर आप चाहते हैं कि-पद पर बना रहूँ तब आप मुझे नियमों-शर्तों और जिम्मेदारियों से अवगत करवाए. अगर ऐसा करने में असमर्थ हैं.तब आप मेरा इस्तीफा स्वीकार करें. मुझे उपरोक्त पद के बारें में जानकारी प्रदान करें कैसे "प्रचार" की व्यवस्था बनाकर रखनी होगी? कितने व्यक्ति है जो मेरे अंतर्गत कार्य करेंगे और कितने लोग ने इस पद के लिए मेरे नाम का समर्थन किया था? क्या यहाँ(ब्लॉग जगत) में कोई भी कुर्सी कोई भी ले सकता है. मैं पद की "गरिमा" का सम्मान करते हुए कह रहा हूँ. कल को मेरे कार्य के संतोषजनक न होने पर आप हटा दें, उससे पहले मैं स्वयं एक तरफा लिए फैसले के कारण पद से त्याग पत्र देता हूँ. मेरे पास एक प्रकाशन परिवार के साथ पहले ही अनेक जिम्मेदारियां है. इसलिए बिना नियमों-शर्तों और जिम्मेदारियों से अवगत हुए पद ग्रहण नहीं कर सकता हूँ और अवगत कराने पर पद स्वीकार करने को तैयार भी हूँ. लेकिन मेरी निजी समस्याओं को देखते हुए मेरे कार्य की समीक्षा करने को पूरा ब्लॉग जगत और प्रबंध मंडल निर्णय लेने में काबिल हो तो और मेरे निजी कारणों में कुछ सहायता करने की हामी भरें. वैसे ब्लोग्स जगत में एक "दिखावा" की दुनियां कायम हो रही हैं. जिसको मैं पसंद नहीं करता हूँ.
        मैंने अपना एक नया  शकुन्तला प्रेस का पुस्तकालय ब्लॉग बनाया है.जिसमें मुझे बहुत से शोध कार्य करने हैं. मैंने भी अपने गुरुवर श्री दिनेश राय द्विवेदी जी को उसमें शामिल करने का मेरा मन है.मगर मैंने पहले उनकी अनुमति प्राप्त करना उचित समझा. इसका उदाहरण आप यहाँ देख सकते हैं.
नोट: यह पोस्ट पहले "भारतीय ब्लॉग समाचार" ब्लॉग पर प्रकाशित हो चुकी है.
         अगर आप मेरे अन्य ब्लॉग को पढ़ने के इच्छुक है. तब आप सभी पाठकों और दोस्तों से हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे "सिरफिरा-आजाद पंछी", "रमेश कुमार सिरफिरा", सच्चा दोस्त, आपकी शायरी, मुबारकबाद, आपको मुबारक हो, शकुन्तला प्रेस ऑफ इंडिया प्रकाशन, सच का सामना(आत्मकथा), तीर्थंकर महावीर स्वामी जी, शकुन्तला प्रेस का पुस्तकालय और शकुन्तला महिला कल्याण कोष, मानव सेवा एकता मंच एवं  चुनाव चिन्ह पर आधरित कैमरा-तीसरी आँख (जिनपर कार्य चल रहा है) ब्लोगों का भी अवलोकन करें और अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं.

हत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा, यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें. हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है. आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें  क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे?  नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें

शुक्रवार, अक्टूबर 14, 2011

दोस्ती को बदनाम करती लड़कियों से सावधान रहे.

यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे...
प्रिय पाठकों, आज दोस्ती के मायने बदल चुके हैं. आप दोस्ती जैसे पवित्र नाम को बदनाम करती लड़कियों से सावधान रहे. आज मेरी फेसबुक पर एक लड़की से हुए वार्तालाप में मेरा अनुभव नीचे देखें और सच्ची दोस्ती की परिभाषा को व्यक्त करता मेरा ब्लॉग देखें (दोस्ती की बड़ी नाजुक होती है डोर http://sachchadost.blogspot.com/2010/11/blog-post.html)
लड़की :-namaskar sirfire j (नमस्कार सिरफिरे जी )
सिरफिरा:-आपको भी नमस्कार जी,
लड़की :-aap kin kin baton ka jawab dene me samarth hain­ ­ (आप किन-किन बातों का जवाब देने में समर्थ हैं)
सिरफिरा:- जैसे-जैसे मौत की घड़ियाँ नजदीक आती गई ! वैसे-वैसे अर्थी उठाने वालों की संख्या बढती गई !!
लड़की :- bekaar hai­ ­ ye wala­ ­(बेकार है ये वाला)
सिरफिरा:-इसको कहते है हिम्मत वाली लड़की, सच बोलने वाली
लड़की :-ji han­ ­,mujhe jo pasand nh aata saaf bol deti hun­ ­(जी हाँ, मुझे जो पसंद नहीं आता साफ़ बोल देती हूँ)
सिरफिरा:-इसी का नाम ईमानदारी और स्पष्टवादिता कहते हैं.
लड़की :-acha btao ab ki kin kin baton ka jawab de te ho aap­ ­(अच्छा बताओ अब कि किन-किन बातों का जवाब देते हो आप)
सिरफिरा:-जिसका जवाब मालूम नहीं होता उसका ईमानदारी और स्पष्टवादिता से मना कर देंगे.
लड़की :- thk hai­ ­ (ठीक है)
सिरफिरा:-किसी को बीच में नहीं लटकाते है.
लड़की :- mera cell recharge kra do ge plz­ ­ (मेरा सेल रिचार्ज करा दोगे प्लीज़)
सिरफिरा:-बिल्कुल नहीं ? यह कार्य कोई हुश्न के दीवाने करते हैं.
 लगभग आधे घंटे के बाद तक जवाब नहीं आने पर 
सिरफिरा:-आप एक सिरफिरे और पत्रकार को मूर्ख बनाने चली थीं. दोस्ती को पैसों के लिये बदनाम करना उचित नहीं.अगर तुम्हारी दोस्ती में पवित्रता होती तो जवाब मिलने के बाद भी वार्तालाप जारी रखती.Chat Conversation End

शनिवार, सितंबर 24, 2011

आमंत्रण पत्र-अनपढ़ और गंवारों के समूह में शामिल होने का

दोस्तों, क्या आप सोच सकते हैं कि "अनपढ़ और गँवार" लोगों का भी कोई ग्रुप इन्टरनेट की दुनिया पर भी हो सकता है? मैं आपका परिचय एक ऐसे ही ग्रुप से करवा रहा हूँ. जो हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु हिंदी प्रेमी ने बनाया है. जो अपना "नाम" करने पर विश्वास नहीं करता हैं बल्कि अच्छे "कर्म" करने के साथ ही देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर अपने आपको "अनपढ़ और गँवार" की संज्ञा से शोभित कर रहा है.अगर आपको विश्वास नहीं हो रहा, तब आप इस लिंक पर "हम है अनपढ़ और गँवार जी" जाकर देख लो. वैसे अब तक इस समूह में कई बुध्दिजिवों के साथ कई डॉक्टर और वकील शामिल होकर अपने आपको फक्र से अनपढ़ कहलवाने में गर्व महसूस कर रहे हैं. क्या आप भी उसमें शामिल होना चाहेंगे?  फ़िलहाल इसके सदस्य बहुत कम है, मगर बहुत जल्द ही इसमें लोग शामिल होंगे. कृपया शामिल होने से पहले नियम और शर्तों को अवश्य पढ़ लेना आपके लिए हितकारी होगा.एक बार जरुर देखें.
"हम है अनपढ़ और गँवार जी" समूह का उद्देश्य-

प सभी को नमस्कार जी, यहाँ पर बिना किसी धर्म, जाति और भेदभाव के ही देश प्रेम की भावना को सबसे बड़ा धर्म मानते हुए हिंदी और भारत देश की क्षेत्रीय भाषा के हित में कार्य करने हेतु समूह का निर्माण किया है.यह मेरा नहीं आपका समूह है.इसको आगे लेकर जाना भी हम सब का काम है.ना यहाँ कोई मालिक और ना कोई नौकर है. बस "इंसानियत" ही एक हमारी पहचान है. 
इस ग्रुप में लगाईं फोटो मेरे पिता स्व.श्री राम स्वरूप जैन और मेरी माताश्री फूलवती जैन जी की है. जो अनपढ़ है. मगर उन्होंने अपने तीनों बेटों को कठिन परिश्रम करने के संस्कार दिए.जिससे इनके तीनों बेटे अपने थोड़ी-सी पढाई के बाबजूद कठिन परिश्रम के बल पर समाज में एक अच्छा स्थान रखते हैं. 
    इनके अनपढ़ और भोले-भाले होने के कारण इन्होने दिल्ली में आने के चार साल बाद ही अपनी बड़ी बेटी स्व. शकुन्तला जैन को दहेज लोभी सुसराल वालों के हाथों जनवरी,सन-1985 में गँवा दिया था और तब मेरे अनपढ़ माता-पिताश्री से दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों ने कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाकर मन मर्जी का केस बना दिया. जिससे सुसराल वालों को कानूनरूपी कोई सजा नहीं मिल पाई. गरीबों के प्रति फैली अव्यवस्था और सरकारी नीतियों के कारण ही पता नहीं कब इनके सबसे छोटे बेटे रमेश कुमार जैन उर्फ सिरफिरा के सिर पर लेखन का क्या भुत सवार हुआ. फिर लेखन के द्वारा देश में फैली अव्यवस्था का विरोध करने लगा.    
       मेरे माता-पिताश्री के आर्थिक रूप से ज्यादा संपन्न ना होने के कारण मेरी पढाई ज्यादा नहीं हो पाई. इसलिए मुझे अंग्रेजी नहीं आती हैं. अत: आपसे विनम्र अनुरोध है आप इस ग्रुप में अपने पढ़े-लिखें होने का मुझे अहसास करवाते हुए "अंग्रेजी" में टिप्पणी ना करें. आज मैं थोड़ा बहुत जो भी "पत्रकार" हूँ, अपनी कठिन परिश्रम करने की लगन और बहुत सारे अच्छे दोस्तों व विद्वानों का लेखन को पढकर उनका अपने जीवन में अमल करने पर ही इस योग्य बन पाया हूँ.    
       यह ऐसे लोगों का समूह है, जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती....इस तरह के जीव आजकल "अनपढ़ और गँवार" कहे जाते हैं....कारण है न इसका, यह समय के साथ नहीं न चल पाए......अब बताओ भला, यह भी कोई बात है ? क्या कहा अंग्रेजी नहीं आती ? लानत है तुम पर, "अनपढ़ और गँवार" कहीं का ! कुछ ऐसी ही टिप्पणियाँ अक्सर इन जीवों को सुनने को मिलती है.कई बार ऐसे व्यक्ति हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं. अब इनको दुबारा स्कूल में भेजना संभव नहीं है. लेकिन देखो जी ! अब क्या करें हम, जो हैं सो हैं. अनपढ़ और गँवार ही सही.तब यह सोचा कि कहीं हम अकेले ही तो अनपढ़ और गँवार तो नहीं ? अपनी तरह के क्यों नहीं कुछ और जीवों की खोज की जाए. ऐसे जीवों को यहाँ इकठ्ठा करना ही इस समूह का उद्देश्य है.
     मेरा उन सभी से निवेदन है कि जो संसारिक जीवन की किताबें पढ़ चुके है ओर जीवन की असली किताब "इंसानियत" को पढ़ने से वंचित रह गए थें. वो सभी "अनपढ़" ग्रुप में अपने आप को शामिल करें ओर अपने दोस्तों को शामिल करके देश और मानवता को आगे लेकर जानने में हमारा सहयोग करें. आप सभी महानुभवों से अनुरोध है कि-यहाँ पर केवल हिंदी में ही टिप्पणी और संदेश लिखें. जिनको हिंदी के फॉण्ट की परेशानी हो वो थोड़ा सा ज्यादा कष्ट करें और अपना सहयोग दें. देखो भाई लोगों...जो भी भाषा बोल सको बोलो...कोई बंदिश नहीं...जिसको समझना होगा समझेगा, ना समझ पाए तब वो जाने. लेकिन यहाँ अनपढों को पूर्ण आश्रय मिलेगा.
    इसलिए आप यहाँ अनपढों का ध्यान रखते हुए. अपनी टिप्पणी या संदेश हिंदी में ही लिखें. इसका पालन ना करने वाले संदेश या टिप्पणी को यहाँ से हटा दिया जाएगा.मुझे अंग्रेजी के छोटे और सरल शब्दों को हिंदी में लिखे जाने पर कोई एतराज नहीं है. जैसे OFFICE को हिंदी में "ऑफिस" लिखने पर कोई एतराज नहीं है. वैसे हिंदी में ऑफिस का अर्थ "दफ्तर" होता है और अपने किसी भी दोस्त को इस समूह में बिना उसकी अनुमति के शामिल ना करें. बल्कि उसको इसमें शामिल होने के लिए इस ग्रुप का लिंक भेजकर शामिल होने का निवेदन करें. बाकी उसकी मर्जी पर छोड़ दीजिए और उस पर किसी प्रकार का दवाब ना बनाये. बस यही शर्त है यहाँ शामिल होने की. धन्यवाद !
     वैसे हम मानते हैं कि हिंदी की टाइपिंग थोड़ी मुश्किल तो है, मगर इतनी मुश्किल भी नहीं है कि-हिंदी की टाइपिंग सीखी/करी न जा सकें.फिर हिंदी की टाइपिंग कौन-सी असंभव चीज है, जो करी न जा सकें. कहा जाता है कि-आसान कार्य तो सभी करते हैं, मगर मुश्किल कार्य कोई-कोई करता है. इसी सन्दर्भ में एक कहावत भी है कि-गिरते हैं मैदाने जंग में शेरे सवार,वो क्या खाक गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं.बस अपने मन में ठानकर निरंतर प्रयास करना शुरू कर दीजिये. तब देखना कैसे हिंदी पर आपकी उंगुलियां अपने आप कैसे और किस गति से चलती है.
       अगर आपको हिंदी लिखने में परेशानी होती हो तब आप यहाँ (http://www.google.co.in/transliterate) पर जाकर हिंदी में संदेश लिखें .फिर उसको वहाँ से कॉपी करें और यहाँ पर पेस्ट कर दें. दोस्त, ऊपर दिए लिंक पर आप जाकर रोमन में इंग्लिश लिखो और स्पेस दो.आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा.जैसे-dhanywad = धन्यवाद
       आनलाइन हिंदी लिखने का यह नया टूल गेट2होम बड़ा ही क्रांतिकारी अविष्कार है। दुनिया की तमाम भाषाओं में इसमें न सिर्फ लिखना आसान होता है बल्कि वहीं से सीधे आप इसे ट्विटर, फेसबुक पर पोस्ट कर सकते हैं। इसे आप सीधे मेल भी कर सकते हैं। शेयर कर सकते हैं और जीप्लस पर भी पोस्ट कर सकते हैं। खुद ही आजमाकर देखिए। इसका लिंक है- http://gate2home.com/Hindi-Keyboard इसमें जाकर दाहिनी तरफ ऊपर अपनी मनचाही भाषा बदल सकते हैं।
   इन्टरनेट या अन्य सोफ्टवेयर में हिंदी की टाइपिंग कैसे करें और हिंदी में ईमेल कैसे भेजें जाने हेतु ब्लॉग देखें. 
     आखिर हम कब तक सारे हिन्दुस्तानी एक दिन का "हिंदी दिवस" मानते रहेंगे? क्या हिंदी लिखने/बोलने/समझने वाले अनपढ़ होते हैं? क्या हिंदी लिखने से हमारी इज्जत कम होती हैं? अगर ऐसा है तब तो मैं अंगूठा छाप हूँ और मेरी पिछले 35 सालों में इतनी इज्जत कम हो चुकी है, क्योंकि इतने सालों तक मैंने सिर्फ हिंदी लिखने/बोलने/समझने के सिवाय कुछ किया ही नहीं है. अंग्रेजी में लिखी/कही बात मेरे लिए काला अक्षर भैंस के बराबर है. आइये दोस्तों, हम सब संकल्प लें कि-आगे से हम बात हिंदी में लिखेंगे/बोलेंगे/समझायेंगे और सभी को बताएँगे कि हम अपनी भाषा को एक दिन की भाषा नहीं मानते हैं. अब देखते हैं यहाँ कितने व्यक्ति अपनी हिंदी में टिप्पणियाँ करते हैं? 
     दोस्तों और सदस्यों को एक निवेदन-इस समूह में हिंदी से जुडी तकनीकी जानकारी और टूल, लिंक आदि अगर आपकी जानकारी में हो उसको प्रयोग करने का तरीका सरल भाषा में लिखकर यहाँ पर टिप्पणी/संदेश के रूप में पोस्ट/प्रकाशित करें. जिससे कुछ अन्य व्यक्ति भी आपकी जानकारी से लाभानित होंगे और आपको दुआएं देंगे.
     दुश्मनों को दोस्त बनाने में ही बहादुरी है. इसलिए दुश्मनों को भी दोस्त बनाना सीखो, दोस्तों को दुश्मन बनाना तो बहुत आसान काम है. किसी दोस्त से मतभेद होना कोई बड़ी बात नहीं, किसी दोस्त के प्रति मनभेद होना बहुत बड़ी बात है.   
     आप विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं-
 उपरोक्त वार्तालाप को यहाँ डालने का उद्देश्य है. सभी यहाँ नियमों का पालन करें. यहाँ पर किसी अपमान करना मेरा उद्देश्य नहीं है. नियमों की अनदेखी पर मैं बहुत सख्त हूँ. आप यहाँ पर अपना किसी भी प्रकार की विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं.यह समूह व्यक्ति विशेष का नहीं है.बल्कि हम सभी है. जिसमें महिलाएं और पुरुष शामिल है. इसलिए यहाँ पर विचारों में शालीनता होनी चाहिए. मुझे उम्मीद है. आप सभी "अनपढ़ और गंवारों" का सहयोग प्राप्त होगा.
     अंग्रेजी को छोड़कर आप भारतीय किसी भाषा और लिपि का प्रयोग कर सकते हैं. लेकिन एक से ज्यादा भाषा में संदेश को डालते समय उसमें एक हिंदी लिपि का होना आवश्क है. अगर आपको एक से अधिक भाषों का ज्ञान है. तब आप अपनी प्रतिभा दिखाए. हर प्रतिभाशाली का उत्साह में खुद बढ़ाऊंगा.
रमेश कुमार सिरफिरा= क्या आपने समूह के नियम नहीं पढ़ें, यहाँ पर फ़िलहाल नाम और लिंक को छोड़कर एक शब्द अंग्रेजी में नहीं होना चाहिए.अपने संदेश में सुधार करें. नहीं तो हटा दिया जाएगा.यहाँ हिंदी को लेकर सख्त नियम बनाये है. कृपया ऐसे व्यवहार के लिए क्षमा करें.
Vaibhav Ajmera= एक बार और देख ले बंधू ..........कही कुछ गलत नहो जाय ,,,,,,,,क्योंकि किसी के नियमो की अवहेलना करना मेरा उद्देश्य नहीं है............वरण आध्यात्मिक विचारो का प्रसार करना .....न की स्वयं का प्रचार................आपकी आध्यात्मिक विनम्रता के लिए साधुवाद !!!!
रमेश कुमार सिरफिरा=आपको भी. बिल्कुल सही है, उच्चारण में पढ़े के स्थान पर आपने पड़े लिख दिया है. मगर उच्चारण की बात समझते हैं लोग.
हिंदी मैं नाम लिखने की भीख मांगता एक पत्रकार- 
मुझ "अनपढ़ और गँवार" नाचीज़(तुच्छ) इंसान को ग्रुप/समूह के कितने सदस्य अपनी प्रोफाइल में अपना नाम पहले देवनागरी हिंदी में लिखने के बाद ही अंग्रेजी लिखकर हिंदी रूपी भीख मेरी कटोरे में डालना चाहते है.किसी भी सदस्य को अपनी प्रोफाइल में नाम हिंदी में करने में परेशानी हो रही हो तब मैं उसकी मदद करने के लिए तैयार हूँ. लेकिन मुझे प्रोफाइल में देवनागरी "हिंदी" में नाम लिखकर "हिंदी" रूपी एक भीख जरुर दें. आप एक नाम दोंगे खुदा दस हजार नाम देगा. आपके हर सन्देश पर मेरा "पंसद" का बटन क्लिक होगा. दे दो मुझे दाता के नाम पे, मुझे हिंदी में अपना नाम दो, दे दो अह्ल्ला के नाम पे, अपने बच्चों के नाम पे, अपने माता-पिता के नाम पे. दे दो, दे दो मुझे हिंदी में अपना नाम दो.
प्रश्न:-मुझे देवनागरी में नाम लिखने से सर्च करने में परेशानी होती है....इसलिए मैंने रोमन में लिखा हुआ है.....जो भी नाम देवनागरी में लिखे हैं, वो सर्च करने पर नहीं मिलते हैं.
उत्तर:-अपनी प्रोफाइल में हिंदी में नाम कैसे लिखें:-आप सबसे पहले "खाता सेट्टिंग " में जाए. फिर आप "नेम एडिट" को क्लिक करें. वहाँ पर प्रथम,मिडिल व लास्ट नाम हिंदी में भरें और डिस्प्ले नाम के स्थान पर अपना पूरा नाम हिंदी में भरें. उसके बाद नीचे दिए विकल्प वाले स्थान में आप अपना नाम अंग्रेजी में भरने के बाद ओके कर दें. अब आपको कोई भी सर्च के माध्यम से तलाश भी कर सकता है और आपका नाम हर संदेश और टिप्पणी पर देवनागरी हिंदी में भी दिखाई देगा. अब बाकी आपकी मर्जी. हिंदी से प्यार करो या बहाना बनाओ.
          उपरोक्त समूह के माननीय/आदरणीय सदस्यगणों से विनम्र अनुरोध हैं कि अपनी कोई भी टिप्पणी/संदेश अंग्रेजी में यहाँ ना डाले. किसी भी सदस्य को समूह का नियम याद नहीं करवाया जाएगा. मेरी नज़र पड़ते ही तुरंत हटा दिया जाएगा. कृपया ख्याल रखे यह "अनपढों और गंवारों" का समूह है और भविष्य में सभी ध्यान रखेंगे. बार-बार निवेदन करने से मुझे शर्म आ रही हैं. मगर "हम नहीं सुधरेंगे" प्रवृत्ति के व्यक्ति नहीं समझ रहें हैं.

गुरुवार, अगस्त 25, 2011

माफ़ी मांग लेने के बाद क्या मामला खत्म समझ लेना चाहिए?

 श्री मनीष तिवारी के माफ़ी मांग लेने के बाद क्या यह मामला खत्म समझ लेना चाहिए? एक शर्त पर उसे रामलीला मैदान में जाकर श्री अन्ना हजारे जी के पांव पकडकर माफ़ी मागनी चाहिए, वर्ना यह माफ़ी के काबिल नहीं, क्योंकि जिस ढंग से बोला था, उसमें अहंकार दिखता था कुर्सी का, जब मनीष तिवारी श्री अन्ना हजारे जी जैसे महान आदमी के विरुध्द् ऎसा बोलता है. तब हम‍‍ तुम जैसे के संग कैसे बोलता होगा? इसलिए इन‌का अंहकार जरुर तोडना चाहियॆ, जाये और‌ अन्ना के पांव पकड कर माफ़ी मांगे, फ़िर श्री अन्ना जी की मर्जी माफ़ करें या नहीं.
 
श्री मनीष तिवारी जी, मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ कि आपने कौन से स्कूल में पढाई की है और किस मास्टर ने आपको पढाया है कि अपने से 28 साल बड़े व्यक्ति को "तुम" कहना चाहिए? बल्कि आयु में इतने बड़े व्यक्ति को "पिता" तुल्य समझा जाता है.मै मानता हूँ कि राजनीति में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगया जाता हूँ. क्या आपके माता‍‍ पिता ने आपको इतने भी संस्कार नहीं दिए? बल्कि आप स्वयं ब्राहमण कुल परिवार से हो फिर पता नहीं आपने इतनी बड़ी गलती कैसे कर बैठे और फिर माफ़ी मांगने में भी ग्यारह दिन लगा दिए.

रविवार, अगस्त 07, 2011

दोस्तों, क्या आपको "रसगुल्ले" खाने हैं

दोस्तों, हमारी गुस्ताखी माफ करना! वैसे गूगल के विद्वानों के अनुसार हमारी गलती माफ करने के काबिल नहीं हैं. फिर भी इस नाचीज़ का "सिर-फिरा" हुआ है. यह समझकर माफ़ कर देना. हमारे पास एक अगस्त को नवभारत टाइम्स के ब्लॉग संपादक की एक ईमेल आई. हम ठहरे अनाड़ी, अनपढ़, गंवार और सिरफिरे. उनके ब्लॉग पर हमें जो परेशानी आ रही थी. गूगल की सुविधा कहूँ या तारीफ करते हुए वो सब लिखकर पूरी भड़ास(दोनों ईमेल नीचे देखें) निकाल दी. अब गूगल की थाली में घी ज्यादा देखकर नवभारत टाइम्स ब्लॉग के संपादक कई लेख एक के एक बाद पाठकों को जानकारी देने वाले प्रकाशित करने शुरू कर दिए है. जोकि इनके शीर्षक "अन्य" में "आप और हम" ब्लॉग में हर रोज एक या दो छप रहे हैं. अब हमें जो भी समस्या आ रही है, उसकी उनके लेखों पर टिप्पणी के रूप में खूब आलोचना कर रहे हैं. हमारी आलोचनाओं का जवाब में श्रीमान जी "मेरी खबर" और "राजनीति" नामक डिब्बे में  "रसगुल्ले" हमें दे रहें. अब कहेंगे कि रसगुल्ले मिल रहे हैं तो बहुत अच्छी बात है. अरे! भाई अगर हमें शुगर की बीमारी हो गई. तब दवाई के पैसे कौन देगा? हम यह सोचकर ज्यादा चिंतित हो रहे हैं.  इन दिनों अपनी हालत कुछ ज्यादा ही पतली जो चल रही हैं.
ब आप खुद देखें. इस लिंक में "अपनी पोस्ट का स्टेटस कैसे जानें? http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/aapaurhum/entry/%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8-%E0%A4%AA-%E0%A4%B8-%E0%A4%9F-%E0%A4%95-%E0%A4%B8-%E0%A4%9F-%E0%A4%9F%E0%A4%B8-%E0%A4%95-%E0%A4%B8-%E0%A4%9C-%E0%A4%A8      
कह रहे हैं कि किसी भी ब्लोग्गर की पोस्ट तीन दिन से पहले प्रकाशित नहीं होगी. फिर हमने यहाँ यह "आदरणीय संपादक जी, ब्लॉगर की जानकारी के लिए आप अच्छे लेख प्रकाशित कर रहे है. मेरे पास आपके इस लेख के हिसाब से बहुत "रसगुल्ले" है. मगर आपका तीन दिन का नियम के कारण नही डालता हूँ. मैं आपके उपरोक्त लेख से सहमत हू. मुझे अब अगले कई दिन तक समय नही मिलेगा/मिलता है. इसलिए अपने अनेक लेख मैने अपने ब्लॉग पर डाल दिए. जिससे मेरा एक लेख हर तीन दिन बाद आ सके"  टिप्पणी भी कर दी और इसलिए हमने अगले पंदह दिन के हिसाब से अपना कोटा भेज दिया. अब आप यह दोनों लिंक (नीचे) देखकर पता लगा लो. एक ही दिन में दो-दो पोस्ट को छाप रहे हैं.
प्रचार सामग्री:-दोस्तों/पाठकों, यह मेरा नवभारत टाइम्स पर ब्लॉग. इस को खूब पढ़ो और टिप्पणियों में आलोचना करने के साथ ही अपनी वोट जरुर दो.जिससे मुझे पता लगता रहे कि आपकी पसंद क्या है और किन विषयों पर पढ़ने के इच्छुक है. नवभारत टाइम्स पर आप भी अपना ब्लॉग बनाये.मैंने भी बनाया है. एक बार जरुर पढ़ें.
संपादक, नवभारत टाइम्स ब्लॉग की आई ईमेल
 मस्ते, नवभारत टाइम्स के ‘अपना ब्लॉग’ का आपने जिस तरह से स्वागत किया है, उससे हमें अत्यंत प्रसन्नता हुई है। हमें लग रहा है कि हमारी मेहनत सफल रही। एक महीने से कम समय में ही करीब 400 ब्लॉगर इससे जुड़ चुके हैं और अपना ब्लॉग एक परिवार-सा बन गया है।
             लेखक के परिचय के मार्फत इस परिवार के सदस्य एक-दूसरे को जानने भी लगे हैं। कुछ सदस्यों ने अपना परिचय विस्तृत रूप में नहीं दिया है। अगर वे चाहें तो अपने परिचय या तस्वीर में सुधार कर सकते हैं। यदि आप चाहें तो अपने ब्लॉग का नाम भी बदल सकते हैं। यह सब करने के लिए बस आपको एक मेल भेजनी है। पता वही – nbtonline@indiatimes.co.in
             सके साथ ही हम आपसे एक छोटी-सी जानकारी पाना चाहते हैं। हमने अपने प्रोफाइल पेज पर आपके शहर या गांव के नाम के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी थी जिस कारण हमें यह नहीं मालूम है कि आप कहां रहते हैं। यह जानकारी जरूरी है ताकि यदि आप अपने इलाके की कोई खबर दें तो वह खबर इस ब्लॉग के अलावा नवभारत टाइम्स की मेन साइट में शहरों की खबरों के साथ भी दिखे। इसके लिए आपको एक छोटा-सा काम करना है। आप इस मेल के जवाब में अपने शहर या गांव का नाम अंग्रेजी में लिखकर हमें भेज दें। यह मेल पढ़ने के तुरंत बाद ही यह काम कर दें क्योंकि कहते हैं न शुभस्य शीघ्रम। अच्छे काम में देरी नहीं करनी चाहिए।
                   ‘पना ब्लॉग’ के संबंध में कभी भी कोई समस्या हो, आप nbtonline@indiatimes.co.in पर तुरंत मेल करें और साथ में अपना मोबाइल नंबर भी दें। हम आपसे जल्द से जल्द संपर्क करेंगे और आपकी समस्या सुलझाएंगे।                                       -संपादक, नवभारत टाइम्स ब्लॉग

नवभारत टाइम्स ब्लॉग के संपादक को भेजी ईमेल
श्रीमान जी, मैंने आपकी वेबसाइट पर लगभग एक सप्ताह पहले अपना ब्लॉग बनाया है. यहाँ पर अगर छोटी-छोटी समस्याओं में सुधार कर दिया जाए. तब यहाँ पर "गूगल" की तरह से ब्लोग्गर बहुत ब्लॉग बनायेंगे. आपने इस पर तकनिकी जानकारी और ब्लॉग के कुछ नियमों और शर्तों को हिंदी में  नहीं दे रखा है. इस मामले में "गूगल" बहुत आगे है. आगे जाने के लिए सुधारों की जरूरत होती है. यहाँ पर फोटो भी जल्दी से लोड नहीं होती है. जहाँ पर पोस्ट डाली जा रही है, वो भी हिंदी में नहीं है. पोस्ट को प्रकाशित करने का आपके पास अधिकार होने के कारण पोस्ट देरी से प्रकाशित होती है. इसमें सुधार होना चाहिए. पाठक किसी भी ब्लॉग जाकर उलझ सा जाता है. एक ब्लोग्गर अपने ब्लॉग का लिंक आसानी से नहीं बता सकता है, क्योंकि उसका लिंक बहुत बड़ा है. गूगल पर इसी समस्या नहीं है. वहां पर कितनी भी फोटो डाल सकते हैं, मगर आपके यहाँ नहीं. आपके यहाँ पर कई बॉक्स अंग्रेजी में आते हैं, जिनके बारें में कम पढ़ें-लिखे कहूँ या तकनिकी जानकारी न होने के कारण व्यक्ति को परेशानी आती है.
                 बकि गूगल में एक बार "हिंदी" सलेक्ट करने के बाद उसको बार-बार किसी जानकारी के अभाव में किसी समस्या से नहीं जूझना नहीं पड़ता है. जहाँ पर आप ब्लोगों का नाम दिखाते हैं. अगर वहां पर हर ब्लोगर की अंतिम पोस्ट का शीर्षक दिखाए. नाम से नहीं पाता चल पाता है कि-लेखक ने क्या लिखा है. बल्कि शीर्षक से काफी कुछ जाना जा सकता है. एक ऐसा कॉलम होना चाहिए कि-किसी भी ब्लोग्गर को उसके नाम या उसके ब्लॉग के नाम से ढूढा जा सके. जैसे-मान लो मेरा नाम रमेश कुमार जैन है. उस बॉक्स में मेरा नाम डालते ही मेरे ब्लॉग का नाम आना चाहिए और अगर कोई ओर भी रमेश कुमार जैन हो तो उसके भी ब्लॉग का नाम आ जाना चाहिए, क्योंकि मैं अकेला रमेश कुमार जैन नहीं हूँ. ब्लॉग का नाम बदलने और तस्वीर में सुधार करने का अधिकार ब्लोगर के पास ही होने चाहिए. गूगल में यह सुविधा है. विषय-बहुत कम है, यह भी असीमित होने चाहिए. जैसे- मेरी खबर, राजनीती आदि. अपराध, महिला, परिवार, कानून, जागरूकता आदि भी होने चाहिए. वैसे इसको भी ब्लोग्गर के ऊपर रहने दे तब ज्यादा अच्छा है. जहाँ न्यू  एंट्री पर लिखा  वहां पर बॉक्स अंग्रेजी में है और जितने भी टूल है. उनको प्रयोग करने में परेशानी होती है और कई के बारें में जानकारी नहीं है. जैसे-गूगल में व्यवस्था है कि-उपरोक्त ब्लॉग पर कितने व्यक्ति या पाठक आ चुके हैं. यह संख्या बताई जाती हैं, आपके यहाँ पर इसी व्यवस्था होनी चाहिए कि-उपरोक्त पोस्ट को अब तक इतनी बार देखा जा चूका है. इससे ब्लोग्गर का हौंसला बढ़ता है. फ़िलहाल तो इतनी समस्याओं से परिचय हुआ है.इसमें कई चीजों को शामिल करने की आवश्कता है. जो ब्लोग्गर को पहचान दिलाने के साथ ही मददगार हो सकती हैं. बाकी फिर.....
नोट:-आपकी ईमेल के निर्देशानुसार मेरा नाम, शहर का नाम और फ़ोन नं.निम्नलिखित है.
Ramesh Kumar jain > uttam nagar, New dehli फ़ोन:09910350461,09868262751,011-28563826

प्रचार सामग्री:-दोस्तों/पाठकों, यह मेरा नवभारत टाइम्स पर ब्लॉग. इस को खूब पढ़ो और टिप्पणियों में आलोचना करने के साथ ही अपनी वोट जरुर दो.जिससे मुझे पता लगता रहे कि आपकी पसंद क्या है और किन विषयों पर पढ़ने के इच्छुक है. नवभारत टाइम्स पर आप भी अपना ब्लॉग बनाये.मैंने भी बनाया है. एक बार जरुर पढ़ें.

सोमवार, अगस्त 01, 2011

अभी ! मैं दूध पीता बच्चा हूँ और अपना जन्मदिन कब मनाऊं ?



दोस्तों, आज मेरे दो  "सिरफिरा-आजाद पंछी" और "रमेश कुमार सिरफिरा" ब्लोगों का जन्मदिन (ब्लॉग जगत के नियमानुसार) हैं. जिससे आप परिचित भी है. उसकी प्रथम अभी तो अजन्मा बच्चा हूँ मेरे दोस्तों!  पोस्ट को मैं जानकारी के अभाव में 31 जुलाई को डाल पाया था. जिससे किन्ही कारणों के चलते 2 अगस्त को देखा गया था, क्योंकि मैंने उससे 31 जुलाई को केवल "सेव" कर लिया था. फिर एक अगस्त को काफी प्रयास करके उसको प्रकाशित किया था. मुझे इन्टरनेट कहूँ या ब्लॉग जगत की ए.बी.सी भी नहीं आती थी और फिर बहुत कम शिक्षा होने के कारण अंग्रेजी न आने की वजह से आज भी अंग्रेजी में आने वाली ईमेल को डिलेट कर देता हूँ. मुझे टिप्पणी आदि और किसी को लिंक कैसे भेजना  होता है की जानकारी नहीं थी. 
         शुरू के दिनों में लगातार 20-22 घंटे कंप्यूटर पर बैठकर लगातार अध्ययन और सिर्फ अध्ययन करने के साथ प्रयास करता रहा. पहले एक पोस्ट फिर दूसरी पोस्ट भी डाल दी. मगर कोई जानकारी नहीं हो रही थीं कि कोई पढ़ भी रहा है या नहीं, क्योंकि समाचार पत्र में तो संपादक के नाम प्रशसकों और आलोचकों के पत्र आते रहते थें. संत कबीरदास के एक दोहे की प्रेरणा से आलोचकों अपने समाचार पत्र में सर्वक्ष्रेष्ट पत्र को थोडा इनाम तक देता था. इसके पीछे मेरी अपनी एक कमजोरी थीं, उसके द्वारा बताई गलतियों को दोहराने से मेरी पत्रकारिता में निखार आने लगा था और समाचार पत्र को विज्ञापन ज्यादा मिलने लग गए थें. मगर यहाँ यह व्यवस्था कैसे हो? इसकी कोई जानकारी नहीं थीं. 
 फिर मैंने अपने दो ब्लोगों पर एक ही तीसरी पोस्ट गुड़ खाकर, गुड़ न खाने की शिक्षा नहीं देता हूँ   डाल दी.उसके बाद मुझे एक पहली टिप्पणी मिली थी. वो मेरे गुरुवर जी की थी. उस टिप्पणी के सन्दर्भ में अपनी बात रखी और कई जानकारी प्राप्त की. आप देखें वो टिप्पणी-श्री दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…एक ही काम के लिए दो ब्लाग क्यों? शब्द पुष्टिकरण हटाएँ। आप के काम समाज में सकारात्मक योगदान कर रहे हैं। Friday, August 06, 2010 6:59:00 PM उसके बाद बिमारी की हालत में गलती से बने दो ब्लोगों पर अलग-अलग विषयों से संबंधित समाचार या लेख प्रकाशित करने का विचार किया. आज आप देखते भी होंगे.
      हाँ एक-एक से एक महानुभवों का जमावड़ा हैं. मैं आज भी ब्लॉग जगत की बहुत चीजों के चलते अनाड़ी हूँ और यहाँ पर बड़े-बड़े खिलाडी है. मैं भी चिंतित हूँ कि ब्लॉग जगत मीडिया के विकल्प के रूप में उभरकर आये और इसके  सदस्यों की संख्या 20-50 हजार हो जाए. तकनीकी जानकारी की भाषा इतनी सरल और आम-बोलचाल में हो कि-उसको एक अनाड़ी भी उपयोग में ला सकें. मैं बहुत दिनों तक पोस्ट कैसे दिखेंगी जानकारी के कारण वंचित रहा. जिससे तकनीकी जानकारी ना हो वो वेचारा क्या करेंगा. मैं आज भी ब्लॉग जगत का ए.बी ही सीख पाया हूँ. उससे आगे सिखने के लिए बहुत सारा अध्ययन कर रहा हूँ. मगर जटिल भाषा शैली के कारण बहुत ही थोड़ा-थोड़ा सीख पा रहा हूँ. अपने गुरुवर श्री दिनेशराय द्विवेदी के मार्गदर्शन से आगे बढ़ने के प्रयास भी कर रहा हूँ . मेरे विचार से:-यहाँ पर कुछ ऐसे लेख जो "ब्लॉग कैसे बनाये" की जानकारी देते हो उसका एक कालम हो.इससे नए ब्लोग्गर को बहुत फायदा होगा. हो सकता हैं मेरे विचार सही ना हो, मगर मेरा विश्वास है.अगर ऐसा होता है. तब ब्लॉग जगत मीडिया के विकल्प के रूप में बहुत आगे तक जा सकता हैं. यहाँ पर एक ब्लॉगर डी.ए.वी.पी(भारत सरकार की सरकारी विज्ञापन रिलीज करने वाली संस्था) और मार्किटिंग पर विज्ञापन के लिए निर्भर नहीं है. बातें बहुत सी है मगर फिर कभी.............
ब एक जिज्ञासा कहूँ या जानकारी मुझे अपने ब्लॉग का जन्मदिन कब मनाना चाहिए? क्या 19 जुलाई को या 31 जुलाई को या 2 अगस्त को? वैसे मेरे विचार में मेरा ब्लॉग "दूध पीता बच्चा है" क्योंकि गर्भकाल को न गिने तो मात्र मेरा ब्लॉग आज 3 महीने और 4 दिन का है. नन्हें शिशु को थोड़ा बड़ा होने दीजिए.फिर आप इसका जन्मदिन बना लेना उचित होगा. अभी तो यह केवल दूध पर ही निर्भर है.जरा अन्न-बन्न खाने लग जाने दो. सभी महानुभवों को दूध पीते बच्चे की ओर से प्रणाम. किसी प्रकार की गुस्ताखी के लिए क्षमा करें. क्षमादान से बड़ा कोई दान नहीं है.   
 दोस्तों, आप सब अच्छी तरह से परिचित होंगे कि-मैं कलम का सिपाही हूँ. मगर मेरे कुछ निजी कारणों से मेरी कलम का लेखन काफी समय से बंद था. अपनी निजी समस्यों के चलते मेरा परिचय 11 जुलाई 2010 को ब्लॉग जगत से परिचय हुआ. जानकारी के अभाव में सर्वप्रथम हम उसे एक वेबसाइट समझ बैठे. मगर अचानक 19 जुलाई 10 को एक कमाल हो गया. हम अपना भी ब्लॉग बना बैठे. मगर फिर जानकारी के अभाव में अगले 12 दिनों तक उस पर कुछ नहीं लिख सकें. अब हमें ब्लॉग जगत पर लिखते हुए कोई लगभग एक साल होने को है. अपनी निजी वैवाहिक समस्याओं के चलते वैसे हमने ज्यादा नहीं लिखा. मगर जितना लिखा, उतना सच लिखा. जहाँ एक ओर ब्लॉग जगत में अनेकों मित्र मिले, दूसरी ओर क़ानूनी ज्ञान देने वाले गुरुवर श्री दिनेश राय द्विवेदी जी जैसे गुरु मिले. जिन्होंने कदम-कदम पर निराशा के बादलों को दूर करके आशा में बदलने की कोशिश की, मगर हमारी भ्रष्ट न्याय व्यवस्था में अब तक कोई सफलता नहीं मिली. लेकिन उनके मार्गदर्शन में प्रयासरत हूँ. अनेक मित्रों  ने तकनीकी ज्ञान देकर काफी मदद की और कुछ हमारे सच लिखने के कारण अपने आप हमारे दुश्मन कहूँ या आलोचक बन बैठे. 

 
 म समाचार पत्र-पत्रिकाओं से जुडे होने के कारण ब्लॉग जगत की चालों और रणनीतियों के साथ कलाकारी से बिल्कुल अनजान है. लेकिन जैसे हम अपने समाचार पत्र में भारत सरकार के विभाग आर.एन.आई के नियमों का पालन करते हुए अपना नाम, पता और फोन नं. तक हर समाचार पत्र में लिखते हैं. उसी तरह से मैंने अपने सभी ब्लोगों में अपना पता, नाम, ईमेल और फोन नं आदि सब कुछ लिखा हुआ है. आज मुझे याद भी नहीं. कब किसकी सदस्यता ली. अपने सिखने के दौरान कहीं भी पढ़ने के लिए चला जाता था और उस मंच को नियमित रूप से पढ़ने के लिए बस ईमेल डाल देता था.पता ही नहीं चलता था. कहाँ-कहाँ,  क्या-क्या हो रहा है या हो जाता था. सिखने के चक्कर में इधर-उधर कहीं पर भी पंगा लेता रहता था. माउस को लेकर कहीं भी छेड़खानी(महिला से नहीं) करता रहता था. कभी कहीं से कोई अंग्रेजी में ईमेल आ जाती और पढ़ने में असमर्थ होने के कारण उस पर जगह-जगह पर क्लिक करके देखता था. बस और कुछ नहीं आता था.   
जैसे जैसे मुझे थोड़ी-थोड़ी जानकारी होती गई, मेरी किसी भी चीज़ को जानने की तीव्र जिज्ञासा और सिखने की लगन और कठिन परिश्रम ने काफी कुछ सीखा दिया है. मगर दूसरे ब्लोगों में नई-नई अनेक कलाकारियों को देखते हुए आज भी अपने आपको अभी अधुरा मानता हूँ. मुझे जब महसूस हुआ कि-उपरोक्त व्यक्ति को इस चीज़ का तकनीकी या दूसरा ज्ञान है. तभी मैंने उसके आगे ज्ञान की भीख मांगने के लिए अपनी झोली फैला दी. कुछ ने दुत्कार दिया और कुछ ने ज्ञान रूपी प्रकाश डालकर मेरी झोली को भर दिया. यहाँ  ब्लॉग जगत में सबसे अनाड़ी और कम पढ़ा-लिखा शायद मैं ही हूँ. इसलिए ब्लॉग जगत के विद्वान मेरे लेखन को सार्थक नहीं मानते हैं. मुझे अपनी बात को कहने के लिए कई वाक्यों का इस्तेमाल करना पड़ता है और वो उसी बात एक या दो वाक्यों में अपनी बात कह देते हैं. लेकिन मैंने अपनी पत्रकारिता और समाचार पत्रों में अपनी भाषा को बिलकुल सरल रखा. जिसे बेशक मेरे लेख कहूँ या समाचार पत्र विद्वान न भी पढ़ें, मगर जब उसका एक गरीब कहूँ कम पढ़ा-लिखा रिक्सा वाला, मोची या अन्य कोई पढ़े. तब उसको सारी बात समझ में आ जाए और उसको लगे कि-इसमें मेरे शब्दों में मेरी बात लिखी है और पढ़ते हुए ऐसा महसूस हो कि-मैं उसके सामने ही खड़ा होकर बात कर रहा हूँ. 
मेरे परिवार के आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण मेरी शिक्षा भी ज्यादा नहीं हुई थी. चाहे पत्रकारिता हो या अन्य कुछ भी सब कठिन परिश्रम से सीखा है. बहुत छोटी सी उम्र से बड़े-बड़े विद्वानों और जैन गुरुओं के कथनों को सुनकर समय और हालतों के अनुरूप उनकी शिक्षा का अमल अपने जीवन में करने लगा.अध्ययन और कुछ नया विचार करने के साथ लेखन ने पता नहीं कब पत्रकार के रूप में खड़ा कर दिया पता ही नहीं चला था. मुझे आज मुकाम तक पहुचने में पुस्तकों इतना बड़ा योगदान रहा है. जिसको मैं शब्दों में ब्यान नहीं कर सकता हूँ. (क्रमश:)
प्रचार सामग्री:-दोस्तों/पाठकों, http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/SIRFIRAA-AAJAD-PANCHHI/ यह मेरा नवभारत टाइम्स पर ब्लॉग. इस को खूब पढ़ो और टिप्पणियों में आलोचना करने के साथ ही अपनी वोट जरुर दो. जिससे मुझे पता लगता रहे कि आपकी पसंद क्या है और किन विषयों पर पढ़ने के इच्छुक है. नवभारत टाइम्स पर आप भी अपना ब्लॉग बनाये. मैंने भी बनाया है. एक बार जरुर पढ़ें.

गुरुवार, जुलाई 14, 2011

मेरे अन्य ब्लोगों का परिचय(प्रचार)

  आप भी अपने मित्रों को बधाई भेजें
"आपको मुबारक हो" के माध्यम से आप अपने स्कूलों व व्यापारिक मित्रों को उनके जन्मदिन, शादी की सालगिरह, उनके द्वारा कोई वाहन खरीदने आदि और अन्य किसी भी प्रकार की "बधाई" का संदेश नाममात्र शुल्क में भेज सकते हैं. आपके मित्र हैरान हो जायेंगे ! आप अपना संदेश कम से कम 5 दिन पहले भेज दें. किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए मुझे संपर्क करें. रमेश कुमार जैन @ सिरफिरा : 9910350461, 9868262751, 011-28563826
नोट : आप संदेश के साथ फोटो भी प्रकाशित करवा सकते हैं. आपको पासपोर्ट साइज़ की फोटो व संदेश (हिंदी में ) ईमेल द्वारा भेजना होगा. "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" द्वारा आप और आपके मित्र को एक-एक ईमेल भेजे जाने के साथ ही आपके मित्र को एक SMS भेजकर उपरोक्त ब्लॉग देखने का निवेदन किया जायेगा.
 
आपका स्वागत है शायरों की महफिल में
जी हाँ, आपका भी स्वागत है शायरों की महफिल में http://aap-ki-shayari.blogspot.com उपरोक्त ब्लॉग पर आप कोई भी शेर, तुकबंदी, ग़ज़ल और कविता आदि अपनी या संकलन की हुई रचनाएँ प्रकाशित करवाने के लिए भेज सकते है.बस हर रचना भेजते समय इतना ध्यान रखें कि-प्रत्येक रचना के साथ अपना पूरा नाम, पता, फ़ोन नं., ईमेल आदि के साथ यह जरुर लिखें. उपरोक्त रचना स्वंय की लिखी हुई है या संकलन की हुई है. अगर संभव हो तो अपनी पासपोर्ट साइज़ फोटो भी संग्लन करें. अगर आप अपनी रचना के साथ अपना नाम प्रकाशित नहीं करवाना चाहते हैं. तब रचना के साथ नाम न छापने का अनुरोध करना न भूलें. यहाँ एक बात गौरतलब है कि-किसी भी रचना के लिए किसी प्रकार का मेहनतना नहीं दिया जायेगा. 
नोट : आपकी शायरी ब्लॉग पर अपनी कोई भी रचना भेजने से पहले उपरोक्त ब्लॉग का अवलोकन एक बार जरुर कर लें.


"शकुन्तला प्रेस" का व्यक्तिगत "पुस्तकालय" क्यों?

यह "शकुन्तला प्रेस" का व्यक्तिगत "पुस्तकालय" है. जिसमें नियमित रूप से अध्ययन कर सकूँ. जैसे-हम अपने पुस्तकालय के लिए पुस्तक खरीद कर लाते हैं. उसी प्रकार से इसमें अपनी मर्जी से कुछ ब्लोगों और लिंकों का संकलन है.जैसे-हम अपने घर कोई वस्तु या किताब खरीदकर लाते हैं. उसको लेने और रखने का स्थान के साथ ही उसकी उपयोगिता पर विचार करते हैं, तब उसको घर लाते हैं. इसमें मैंने अपनी आवश्कता को महत्व दिया है. आप किसी प्रकार से नाराज न हो. मैंने केवल अपनी सुविधा के अनुसार ब्लोगों को अलग-अलग क्षेणी-क्षेणी देकर ब्लोगों के माध्यम से अपने ज्ञान में बढौतरी करने की कोशिश की, क्योंकि शुरु में ही सभी चीज़ों को  व्यवस्थित कर लेने से, बाद में एक घंटा बचाया जा सकता है. इस लाइब्रेरी में आप भी लिंकों या ब्लोगों का अध्ययन कर सकते हैं. मैंने बहुत पहले ही अपने ब्लॉग "सिरफिरा-आजाद पंछी" और "रमेश कुमार सिरफिरा" पर अपने दोस्तों के ब्लॉग को पूरा मान-सम्मान देते हुए. अपने ब्लॉग में "सहयोगियों की ब्लॉग सूची" और "मेरे मित्रों के ब्लॉग" कालम  बना दिया था और उसमें उनके ब्लोगों के लिंकों को शामिल कर दिया था. 
मेरा बस यह कहना कि-आप आये हो, एक दिन लौटना भी होगा. फिर क्यों नहीं? तुम ऐसा करों तुम्हारे अच्छे कर्मों के कारण तुम्हें पूरी दुनियां हमेशा याद रखें. धन-दौलत कमाना कोई बड़ी बात नहीं, पुण्य/कर्म कमाना ही बड़ी बात है. हमारे देश के स्वार्थी नेता "राज-करने की नीति से कार्य करते हैं" और मेरी विचारधारा में "राजनीति" सेवा करने का मंच है. 
कबीरदास जी अपने एक दोहे में कहते हैं कि-"ऊँचे कुल में जन्म लेने से ही कोई ऊँचा नहीं हो जाता. इसके लिए हमारे कर्म भी ऊँचे होने चाहिए. यदि हमारा कुल ऊँचा है और हमारे कर्म ऊँचे नहीं है, तब हम सोने के उस घड़े के समान है. जिसमें शराब भरी होती है. श्रेष्ठ धातु के कारण सोने के घड़े की सब सराहना करेंगे.लेकिन यदि उसमें शराब भरी हो तब सभी अच्छे लोग उसकी निंदा करेंगे. इसी तरह से ऊँचे कुल की तो सभी सराहना करेंगे,  लेकिन ऊँचे कुल का व्यक्ति गलत कार्य करेगा. तब उसकी निंदा ही करेंगे. पूरा लेख यहाँ पर पढ़ें.
             अगर आप मेरे अन्य ब्लॉग को पढ़ने के इच्छुक है. तब आप सभी पाठकों और दोस्तों से हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे "सिरफिरा-आजाद पंछी", "रमेश कुमार सिरफिरा", सच्चा दोस्त, आपकी शायरी, मुबारकबाद, आपको मुबारक हो, शकुन्तला प्रेस ऑफ इंडिया प्रकाशन, सच का सामना(आत्मकथा), तीर्थंकर महावीर स्वामी जी, शकुन्तला प्रेस का पुस्तकालय और शकुन्तला महिला कल्याण कोष, मानव सेवा एकता मंच एवं  चुनाव चिन्ह पर आधरित कैमरा-तीसरी आँख (जिनपर कार्य चल रहा है) ब्लोगों का भी अवलोकन करें और अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं.  

शुक्रवार, जून 17, 2011

गुस्ताखी माफ़ करें-2

ब्लॉग राजभाषा हिंदी की पोस्ट "परिकल्पना सम्मान 2010 और एक बैक बेंचर ब्लोगर की रिपोर्ट" पर श्री अविनाश वाचस्पति जी, आपने कहा कि-निकेतन ने अपने प्रकाशन की एक एक प्रति प्रत्‍येक दर्शक को बतौर उपहार दी थी और अपनी पत्रिका शोध दिशा की प्रति भी। किसी भी समारोह में इस प्रकार की पुस्‍तकें फ्री में देने का चलन नहीं है। शोध दिशा का पुराना अंक (अक्तूबर-दिसंबर 2010) था. उसका अवलोकन करने पर पता चला कि-पत्रिका त्रेमासिक है और उसके बाद जनवरी-मार्च 2011 व अप्रैल-जून 2011 भी प्रकाशित हो चुकी हैं. इसके अलावा डॉ. योगेन्द्रनाथ शर्मा "अरुण" की ग़ज़लों वाली किताब "बहती नदी हो जाइए" भी 2006 में प्रकाशित हो चुकी थीं. अब पुराना माल तो कोई भी दे सकता है, कुछ थोड़ा-बहुत नया मिला भी तो "वटवृक्ष" त्रेमासिक पत्रिका है,वो उनकी नहीं है.
        हम ब्लोगिंग जगत के "अजन्मे बच्चे" हैं और ब्लोगिंग जगत की गुटबाजी के जानकार भी नहीं है, लेकिन ब्लोगिंग जगत का अनपढ़, ग्वार यह नाचीज़ इंसान प्यार, प्रेम और इंसानियत की अच्छी भावना के चलते एक ब्लॉगर के बुलाने(आपके अनुसार बिन बुलाये) चला आया था. वैसे मेरे पेशेगत गलत भी नहीं था, क्योंकि जहाँ कहीं चार-पांच व्यक्ति एकत्रित होकर देश व समाजहित में कोई चर्चा करें. तब वहां बगैर बुलाये जाना बुरा नहीं होता है. बाकी हमारा तो गरीबी में आटा गिला हो गया है. इन दिनों कुछ निजी कारणों से हमें भूलने की बीमारी है और उसी के चलते ही हम अपने डिजिटल कैमरे के एक सैट सैल(दो) और उसका चार्जर बिजली के प्लग में लगाये ही भूल आये क्योंकि हमें संपूर्ण कार्यक्रम की रुपरेखा की जानकारी नहीं थीं. हमने सोचा शायद कार्यक्रम अभी और चलने वाला है. तब क्यों नहीं "विक" सैलों को चार्जर कर लिया जाये. घर पहुंचकर याद आया तो आपको मैसेज किया और अगले दिन आपके 9868xxxxxx पर छह बार और 9717xxxxxx पर दो बार फ़ोन किया. मगर हमारी उम्मीदों के मोती बरसात के बुलबलों की तरह तुरंत खत्म हो गए.एक फ़ोन कई घंटों तक व्यस्त रहा और दूसरा रिसीव नहीं हुआ. अगले दिन हमें श्री अन्ना हजारे के इण्डिया गेट की कवरेज करने जाना था. जो उम्मीदों का टूटने का सदमा सहन नहीं कर पाने और सैल का सैट के साथ चार्जर तुरंत न खरीद(इन दिनों आर्थिक स्थिति डावाडोल है) पाने की व्यवस्था के चलते संभव नहीं हो पाया. अब यह तो पता नहीं कि-हमारा कैमरा कब दुबारा चित्र लेना शुरू करेगा, मगर उसकी कुछ "गुस्ताखी माफ़ करें" अनेक ब्लोगों पर उपरोक्त कार्यक्रम की अनेकों फोटोग्राफ्स प्रकाशित हो चुकी है. लेकिन मेरे पास कुछ ऐसी फोटो तैयार हो गई है. जो किसी का अचानक हाथ लगने से या किसी द्वारा अचानक आँखें बंद कर लेने से और कई अजब-गजब फोटो कुछ अन्य कारणों से तैयार हो गई है. आप देखने से पहले श्री अशोक चक्रधर की "कैमरा" पर लिखी एक कविता "कैमरा देव की आरती"भी पढ़ लें.
जय हो कैमरा देव की, शक्ति तुम्हीं हो सत्यमेव की. जय जय हो ....
दुनियां झूठी पर तुम सच्चे, पूजा करते हम सब बच्चे .
तुम्हें देखते ही जाने क्यों पानी मांगें अच्छे-अच्छे.
सन्मुख आया, लेकिन पहले, हीरो ने छ: बार शेव की. जय जय हो ....
तुम्हीं मीडिया के टायर हो, तुम्ही तीसरे अम्पायर हो.
पल में पोल खोलने वाले, ईश्वर हो तुम इन्क्वायर हो.
सत्य दिखाकर न्यायालय में, कितनों की जिन्दगी सेव की.जय जय हो ....
तुम चाहो तो वंडर कर दो, नाली बीच समन्दर कर दो.
सुंदर को बन्दर सा करके, बदसूरत को सुंदर कर दो.
अगर खींचने पर आ जाओ, भद्र्द पीट दो कामदेव की . जय जय हो ....
तुमने सारी दुनियां नपी, तुमने जी की बातें भांपी.
अच्छे-अच्छे पहलवान की, तुम्हारे आगे टाँगें कांपी.\
मुख पर आये पसीना लेकिन, फिलिंग होती कोल्ड वेव की. जय जय हो ....
फूल चढ़ाऊँ खील चढ़ाऊँ, दिया जला कंदील चढ़ाऊँ.
जितना चाहे उतना खींचों, टेप चढ़ाऊँ, रील चढ़ाऊँ.
खुले पिटारा, हो उध्दारा, स्वीकारो अरदास स्लेव की.जय जय हो ....  

भाई मैंने तम्हारा क्या बिगाड़ा  था जो मेरा चहेरा बिगड़ दिया यह कहते हुए श्री अविनास जी 

लो श्रीमान जी एक अच्छी सी फोटो कभी-कभी कैमरा भी धोखा दे जाता है.
अल्लाह बचाए इन कैमरे वालों से फोटो के नाम पर मजाक ज्यादा करते हैं.
अब मुझे फोटो खिंचवाने का शौक नहीं रहा मेरी बेटी की शादी जो हो गई है. 
मैं तो हाथ नहीं मिलना चाहता था,मगर देखो खुद मुख्यमंत्री जी ने हाथ मिलाया है.
कई दिनों से भागदौड़ बहुत हो रही है, भाई जरा थोड़ी देर खड़े-खड़े ही सो लेने दो.
इतने लोगों को इनाम बांटते-बांटते थक गया हूँ, थोडा आराम तो करने देते मेरे भाई. थोडा सो लेने के बाद ही कुछ बोलूँगा.

शाहनवाज सिद्दीकी- श्री दिनेश राय द्विवेदी जी, आज आपको एक कमाल दिखता हूँ-देखो मैं आँखे बंद करके भी मोबाईल के नं. मिला लेता हूँ. श्री दिनेश राय द्विवेदी जी-शाहनवाज सिद्दीकी, अच्छा! मुझसे तो नहीं होता है.

कवि श्री अशोक चक्रधर जी भी श्री अविनास जी को  आँखे बंद करके भी मोबाईल के नं. मिलाने की अपनी कला से अवगत करते हुए और यह बताते हुए कि-हम किसी से कम नहीं है.
    

गुस्ताखी माफ़ करें

गुस्ताखी माफ़ करें-अब कैमरा 
ऐसी फोटो नहीं लें पायेगा
हिंदी साहित्‍य निकेतन,हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में सिरमौर रवीन्‍द्र प्रभात और अविनाश वाचस्‍पति का सामूहिक श्रम. शनिवार दिनांक 30 अप्रैल 2011 को हिंदी भवन दिल्‍ली में हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन परिकल्‍पना सम्‍मान समारोह को संबोधित करते हुए यह कार्यक्रम अध्‍यक्षता हास्‍य व्‍यंग्‍य के सशक्‍त और लोकप्रिय हस्‍ताक्षर अशोक चक्रधर ने की। इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि रहे वरिष्‍ठ साहित्‍यकार डॉ. रामदरश मिश्र और विशिष्‍ट अतिथि रहे प्रभाकर श्रोत्रिय। साथ ही प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता और डायमंड बुक्‍स के संचालक नरेन्‍द्र कुमार वर्मा भी मंचासीन थे।             
          इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता ने कहा कि जीवन के उद्देश्‍य ऐसे होने चाहिए कि जिसमें मानवीय सेवा निहित हो। मैं ब्‍लॉगिंग के बारे में बहुत ज्‍यादा तो नहीं जानता किंतु जहां तक मेरी जानकारी में है और मैंने महसूस किया है, उसके आधार पर यह दावे के साथ कह सकता हूं कि हिंदी ब्‍लॉगिंग में सामाजिक स्‍वर और सरोकार पूरी तरह दिखाई दे रहा है। कई ऐसे ब्‍लॉगर हैं जो सामाजिक जनचेतना को हिंदी ब्‍लॉगिंग से जोड़ने का महत्‍वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। यह दुनिया विचारों की दुनिया है, बस कोशिश यह करें कि हमारे विचार आम आदमी से जुड़कर आगे आएं. 

                 मैं वैसे पत्रकारों के सम्मेलन आदि जाता नहीं हूँ क्योंकि वहां पर वहीँ तीन-चार बातों को बोला जाता जो कोई पत्रकार अपने जीवन में अपनाकर गरीबी या भौतिक वस्तुओं के अभाव में जीना नहीं चाहता है. उपरोक्त कार्यक्रम में भी प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता ने जो कहा उसको एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर निकालकर अपने-अपने रास्ते पर चल दिए और आज किसी को उनकी एकाध बात याद भी नहीं होगी. अगर होगी भी तो उसपर अमल करने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. चलिए कोई बात नहीं. कुछ खाकर व कुछ बिना खाए लौट गए.  

           इसके बाद उपरोक्त कार्यक्रम को लेकर एक से एक पोस्ट आई. किसी पोस्ट में आलोचना और किसी में तारीफ के पुल बाँध गए. कहीं-कहीं पर पोस्ट में हंसी-मजाक के साथ-साथ गंभीर बातें तक की गई. कुछ इन्हीं बातों का समावेश लिये लिंक दे रहा हूँ. जो किसी करणवश नहीं पहुँच पाए हो या किसी पोस्ट की जानकारी न होने के कारण जाने से वंचित रह गए हो.   

शाहनवाज के घर से हिन्दी भवन तक


परिकल्पना सम्मान : लोकसंघर्ष के जनसंघर्ष से साहित्य निकेतन की उत्तर आधुनिकता तक


अग्रवाल जी की भाव विह्वलता और साढू़ भाई का प्रेम


मुख्य अतिथि के असम्मान से उखड़ा मूड खुशदीप का


बुरा नहीं प्रकाशन का व्यवसाय


उद्यमी ठाला नहीं बैठता


क्या कहते हैं? उद्यमी 'सिरफिरा' जी


 परिकल्‍पना डॉट कॉम 

 नुक्‍कड़ डॉट कॉम

सतीश सक्सेना की धमकी - सम्मान समारोह में बड़ा खुलासा

कई मायनों में भव्य था परिकल्पना सम्मान समारोह!

 "हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान समारोह" 

हिंदी ब्लागिंग से आशाएं बढ़ा गया दिल्ली में हुआ ब्लागर्स सम्मलेन 

ब्लॉगिग , ब्लॉगर्स , पुरस्कार आयोजन , राजनीतिज्ञ , मीडियाकर्मी .....और कुछ कही अनकही .

ऐसा दिन जल्दी आये यही कामना हैं जब ब्लोगर मंच पर खडा हो और लोग उसके हाथ से पुरूस्कार ले । लेकिन होगा तब जब लोग अंधी दौड़ मे नहीं भागेगे

ब्लोगिंग का अब हर कदम देश व समाजहित में उठेगा तथा शर्मनाक भ्रष्टाचार मिटेगा...  

अरे भाई आगे से हटो हमें फोटो खींचने के लिए नहीं बुलाया क्या?
वहां पर श्री अविनाश जी से विवादित फोटो को लेकर भी जिक्र किया था. जिसकी पिछले दिनों ब्लॉग पर बहुत चर्चा हुई थीं. जवाब कोई तर्क पूवर्क नहीं था. ईनामों को लेकर भी बंदर -बाँट हुई है और वहां पर मौजूद कई ब्लॉगर विरोध जता रहे थें. कई ब्लॉगर विरोध के कारण ही दावत (खाना) खाए बगैर ही चले गए थें. करते ब्लोगगिरी और नाम गुप्त रखने का हमसे वादा लेते हैं आखिर क्यों करते हैं इतना दोगलापन? यह कोई समाचार पत्र नहीं है कि विज्ञापन नहीं मिले तो पत्र नहीं छपेगा ब्लॉग लिखने में केवल इन्टरनेट का ही खर्चा आता है या विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे थें अगली बार उनको भी ईनाम देकर चुप करा दिया जाए. मुझे उपरोक्त कार्यक्रम की कोई सूचना नहीं थी .बल्कि अपनी समस्याओं के चलते कुछ लोगों से मिलना जरुरी था. किसी से कुछ न कुछ जानकारी लेनी थीं .किसी से ब्लॉग के बारे में तकनीकी और किसी से अपने केसों को लेकर क़ानूनी दांव -पेजों की छोटी -छोटी जानकारी. छोटी -छोटी गलतियों को छोड़कर कार्यक्रम अच्छा था. थियेटर के कलाकारों ने बहुत अच्छा एक उपन्यास की कहानी पर आधरित एक नाटक का बहुत सुन्दर मंचन किया था मैं अनेकों ब्लोगरों के नाम नहीं जानता और कई को चेहरों पर मुखोटे थें और कई का नाम मेरा फर्ज गवाही नहीं दे रहा है .
जल्दी से किताब देखने दो मीडिया को कहीं चली न जाये
भाई लोगों हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो हमारी फोटो बिगड़ दी
मुझे इनाम जल्दी से दो बेशक काजल कुमार ही दे दो. घर जल्दी जाना है
बेटा तुमको अपनी फोटो नहीं खिंचवानी है तो हमारी फोटो तो लेने दो.

 अच्छी तरह से देखभाल लेना भाई अपना ईनाम. जरा मैं भी अपना चश्मा ठीक कर लूँ.

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का एक सशक्त जन लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का एक सशक्त जन लोकपाल विधेयक बनाने के लिए जब 5 अप्रैल 2011 को जंतर-मंतर पर एक बिगुल बजाया. तब ऐसा लगा कि-सारे मृत आदमियों में किसी ने जान डाल दी हो. देश का हर वो व्यक्ति जो भी देश में दीमक की तरह फैले भ्रष्टाचार से परेशान था. वो श्री अन्ना हजारे जी के साथ खड़ा नजर आया. जो प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई को अहमियत नहीं दे रही. वो भी श्री हजारे को पूरे देश से मिले समर्थन को देखकर उनके आगे-पीछे घूमते नजर आये. उसके बाद ही ब्लॉग जगत के हर दुसरे ब्लॉग में हजारे जी के अनशन और उनकी लड़ी जा रही लड़ाई पर पक्ष-विपक्ष के लेखों की भरमार सी गई थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ श्री हजारे की लड़ाई सोशल वेबसाईटों और ब्लोगों से शुरू होकर जब घर-घर तक पहुंची. तब सरकार को मजबूर होकर आखिर सशक्त जन लोकपाल विधेयक बनाने की शुरुयाती मांगों मानना पड़ा, क्योकि इसके अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था. मैं भी अब तक पत्रकारिता के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली लड़ाई के साथ ही अपनी बीमारी की हालत में जैसी भी हिम्मत थी. उसी हिम्मत को बटोरकर 5 अप्रैल को किसी से पूछ-ताछ कर जन्तर-मन्तर पर पहुंचा था, क्योंकि अपने क्षेत्र में पत्रकारिता करने के कारण ही दिल्ली के अधिक्तर स्थानों की आज भी जानकारी नहीं है.लेकिन अपने क्षेत्र में विश्वनीय सूत्रों के कारण अपने क्षेत्र की किसी सूचनाओं से पहले कभी वंचित नहीं रहा हूँ. आज भी अपने क्षेत्र के आम-आदमी में मेरे प्रति बहुत ज्यादा विश्वास है. इसका मुख्य कारण रहा मेरी लगभग 17 वर्षीय ईमानदारी और निष्ठापूवर्क निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का करना. अपने कुछ निजी कारणों (मेरे ब्लोगों के नियमित पाठक और दोस्त उनसे अवगत भी है) से इस पोस्ट को प्रकाशित करने देरी भी हो गई. लेकिन कार्य की प्राथमिकता को समझते हुए.समयानुसार कार्य भी किये. जिसमें अपने क्षेत्र में आन्दोलन को लगभग 2000 लोगों को मिस कॉल करने के लिए प्रेरित किया. अपनी समर्थता अनुसार प्रचार भी किया और पहले दिन जन्तर-मन्तर पर कवरेज भी की. अपने ब्लोगों पर भी आज भी प्रचार करने के साथ ही खुद भी प्रचार कर रहा हूँ और अपने क्षेत्र में दो दिन एक तख्ती पहन कर घुमा था उसकी कुछ फोटो प्रकाशित भी कर रहा हूँ और जिस दिन अनशन खत्म हुआ, उसी दिन लगभग 20 RWA की उत्तम नगर में कैंडल मार्च निकालने की तैयारी करा चूका था. मगर पहले दिन की ही रात 10 बजे अनशन खत्म होने की समाचारों में सूचना प्राप्त हुई. इंडिया अगेंस्ट करप्सन संस्था को अपना आवेदन भी लिखकर भेजा कि-श्रीमान जी, भ्रष्टाचार की लडाई में यह नाचीज़ "सिरफिरा" पत्रकार अपने समाचार पत्र "जीवन का लक्ष्य" के साथ ही सच्चाई के लिए फाँसी का फंदा तक चूमने को तैयार है. कभी मिलने का मौका मिले तो अपनी विचारधारा से अवगत करा सकता. मुझे भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ मामलों की जानकारी देनी है. जो क़ानूनी ताकत, जानकारी और धन अभाव के कारण सामने लाने में असमर्थ हूँ. भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरे पास संस्था के मेरे फ़ोन पर आज भी मैसेज रहे है. मैं अपने क्षेत्र से भ्रष्टाचार से लड़ने वाली बनने वाली किसी भी प्रकार की संस्था या सीमितियों में कार्यकर्त्ता के रूप में कार्य करने के लिए अपने नाम का प्रस्ताव भेज रहा हूँ. स्वीकार करने की कृपया करें. उसके बाद अभी कुछ दिनों पहले ही कोरियर से श्री हजारे कि टीम के एक सदस्य श्री अरविन्द केजरीवाल को श्री हजारे के नाम एक लैटर भी लिखकर भेजा, क्योंकि उनके नजदीक रहने के कारण श्री हजारे तक पत्र पहुँच सकता था. अपने अनुभवों से कैमरे में कैद कुछ अलग-सी फोटोग्राफ्स जिनका आप भी अवलोकन करें. एक पत्र भी जिसको शायद अब तक श्री अन्ना हजारे जी ने पढ़ लिया होगा.
 
  
                                                                               
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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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