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शुक्रवार, जून 17, 2011

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का एक सशक्त जन लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का एक सशक्त जन लोकपाल विधेयक बनाने के लिए जब 5 अप्रैल 2011 को जंतर-मंतर पर एक बिगुल बजाया. तब ऐसा लगा कि-सारे मृत आदमियों में किसी ने जान डाल दी हो. देश का हर वो व्यक्ति जो भी देश में दीमक की तरह फैले भ्रष्टाचार से परेशान था. वो श्री अन्ना हजारे जी के साथ खड़ा नजर आया. जो प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई को अहमियत नहीं दे रही. वो भी श्री हजारे को पूरे देश से मिले समर्थन को देखकर उनके आगे-पीछे घूमते नजर आये. उसके बाद ही ब्लॉग जगत के हर दुसरे ब्लॉग में हजारे जी के अनशन और उनकी लड़ी जा रही लड़ाई पर पक्ष-विपक्ष के लेखों की भरमार सी गई थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ श्री हजारे की लड़ाई सोशल वेबसाईटों और ब्लोगों से शुरू होकर जब घर-घर तक पहुंची. तब सरकार को मजबूर होकर आखिर सशक्त जन लोकपाल विधेयक बनाने की शुरुयाती मांगों मानना पड़ा, क्योकि इसके अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था. मैं भी अब तक पत्रकारिता के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली लड़ाई के साथ ही अपनी बीमारी की हालत में जैसी भी हिम्मत थी. उसी हिम्मत को बटोरकर 5 अप्रैल को किसी से पूछ-ताछ कर जन्तर-मन्तर पर पहुंचा था, क्योंकि अपने क्षेत्र में पत्रकारिता करने के कारण ही दिल्ली के अधिक्तर स्थानों की आज भी जानकारी नहीं है.लेकिन अपने क्षेत्र में विश्वनीय सूत्रों के कारण अपने क्षेत्र की किसी सूचनाओं से पहले कभी वंचित नहीं रहा हूँ. आज भी अपने क्षेत्र के आम-आदमी में मेरे प्रति बहुत ज्यादा विश्वास है. इसका मुख्य कारण रहा मेरी लगभग 17 वर्षीय ईमानदारी और निष्ठापूवर्क निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का करना. अपने कुछ निजी कारणों (मेरे ब्लोगों के नियमित पाठक और दोस्त उनसे अवगत भी है) से इस पोस्ट को प्रकाशित करने देरी भी हो गई. लेकिन कार्य की प्राथमिकता को समझते हुए.समयानुसार कार्य भी किये. जिसमें अपने क्षेत्र में आन्दोलन को लगभग 2000 लोगों को मिस कॉल करने के लिए प्रेरित किया. अपनी समर्थता अनुसार प्रचार भी किया और पहले दिन जन्तर-मन्तर पर कवरेज भी की. अपने ब्लोगों पर भी आज भी प्रचार करने के साथ ही खुद भी प्रचार कर रहा हूँ और अपने क्षेत्र में दो दिन एक तख्ती पहन कर घुमा था उसकी कुछ फोटो प्रकाशित भी कर रहा हूँ और जिस दिन अनशन खत्म हुआ, उसी दिन लगभग 20 RWA की उत्तम नगर में कैंडल मार्च निकालने की तैयारी करा चूका था. मगर पहले दिन की ही रात 10 बजे अनशन खत्म होने की समाचारों में सूचना प्राप्त हुई. इंडिया अगेंस्ट करप्सन संस्था को अपना आवेदन भी लिखकर भेजा कि-श्रीमान जी, भ्रष्टाचार की लडाई में यह नाचीज़ "सिरफिरा" पत्रकार अपने समाचार पत्र "जीवन का लक्ष्य" के साथ ही सच्चाई के लिए फाँसी का फंदा तक चूमने को तैयार है. कभी मिलने का मौका मिले तो अपनी विचारधारा से अवगत करा सकता. मुझे भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ मामलों की जानकारी देनी है. जो क़ानूनी ताकत, जानकारी और धन अभाव के कारण सामने लाने में असमर्थ हूँ. भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरे पास संस्था के मेरे फ़ोन पर आज भी मैसेज रहे है. मैं अपने क्षेत्र से भ्रष्टाचार से लड़ने वाली बनने वाली किसी भी प्रकार की संस्था या सीमितियों में कार्यकर्त्ता के रूप में कार्य करने के लिए अपने नाम का प्रस्ताव भेज रहा हूँ. स्वीकार करने की कृपया करें. उसके बाद अभी कुछ दिनों पहले ही कोरियर से श्री हजारे कि टीम के एक सदस्य श्री अरविन्द केजरीवाल को श्री हजारे के नाम एक लैटर भी लिखकर भेजा, क्योंकि उनके नजदीक रहने के कारण श्री हजारे तक पत्र पहुँच सकता था. अपने अनुभवों से कैमरे में कैद कुछ अलग-सी फोटोग्राफ्स जिनका आप भी अवलोकन करें. एक पत्र भी जिसको शायद अब तक श्री अन्ना हजारे जी ने पढ़ लिया होगा.
 
  
                                                                               

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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