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शनिवार, अगस्त 29, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( सितम्बर -2015 )

1 सितम्बर 2015 :मान-शान की इच्छा से दिये गए लाख रूपये की तुलना में प्रेम व ईमानदारी से दान किये गए मुट्ठी भर चावल का अधिक महत्व है.

2 सितम्बर 2015 : यदि आप हिम्मत का पहला कदम आगे बढायेगे तब परमात्मा की सम्पूर्ण मदद मिल जायेगी.

3 सितम्बर 2015 : मुस्कराना, संतुष्टता की निशानी है. इसलिए सदा मुस्कराते रहो.

4 सितम्बर 2015 : क्या मेरे विचारों का स्तर ऐसा है कि मैं परमात्मा का बच्चा कहलाने का अधिकारी हूँ.
5 सितम्बर 2015 : स्वयं में दैवी गुणों का आह्वान करो तो अवगुण भाग जायेंगे.

6 सितम्बर 2015 : एक अच्छा, स्वच्छ मन वाला व्यक्ति दूसरों की विशेषताओं को देखता है. दूषित मन वाला व्यक्ति दूसरों में बुराई ही तलाशता है.

7 सितम्बर 2015 : जो संकल्प करो उसे बीच-बीच में दृढ़ता का ठप्पा लगाओ तब विजयी बन जायेंगे.

8 सितम्बर 2015 : जितना आप दूसरों में अवगुण देखेंगे, उतना ही आप पर अवगुणों का असर पड़ेगा, इसलिए गुणग्राही बनो.

9 सितम्बर 2015 : सहनशील बनो, सहनशीलता कायरता नहीं, वीरता है.

10 सितम्बर 2015 : स्वयं को सिद्ध करने का प्रयास क्यों किया जाये? आपकी निर्दोषिता से दूसरे लोग स्वत: ही समझ जायेंगे.

11 सितम्बर 2015 : दूसरों को सहयोग देना ही उन्हेया अपना सहयोगी बनाना है.

12 सितम्बर 2015 : धैर्यता, विश्वास और सहनशीलता ही सफलता की कुँजी है.

13 सितम्बर 2015 : नम्र बनो तो लोग नमन करते हुए सहयोग देंगे. 

14 सितम्बर 2015 : यह सत्य है कि "सत्य का अस्तित्व" है, सत्यता की महानता आपको महान बना देंगी.

15 सितम्बर 2015 : सदा प्रसन्न रहने के लिए प्रशंसा की इच्छा का त्याग करना आवश्यक है. 

16 सितम्बर 2015 :पवित्र प्रेम शाश्वत सम्बन्धों का आधार है. शिष्ट व्यवहार शालीनता से भरा होता है, जबकि दूषित व्यवहार अकीर्तिकार होता है. 

17 सितम्बर 2015 : अपने संकल्प, बोल और कर्म द्वारा सुख देने से सुख के देवता बन जायेंगे. 
18 सितम्बर 2015 : स्वयं की खोज के लिए स्वयं के प्रति सच्चा बनना होगा. 

19 सितम्बर 2015 : हमें सरल होना चाहिए, परन्तु मूर्ख नहीं. अपना सद-विवेक आपका अच्छा मित्र है, इसकी बात प्राय: सुनिये. 

20 सितम्बर 2015 : भगवान की इच्छाओं को पूर्ण करने से हमारी इच्छाएं स्वत: ही पूरी हो जाती है. 

21 सितम्बर 2015 : भगवान का बच्चा होने का अर्थ है कि उनकी विशेषताओं को स्वयं में प्रत्यक्ष करना.  
22 सितम्बर 2015 : यदि आप गलती करके स्वयं को सही सिद्ध करने का प्रयास करते हैं तब समय आपकी मूर्खता पर हंसा करेगा. 

23 सितम्बर 2015 : यदि आप अपने मन के संशयों को दूर नहीं करते तब मानों आप कैंसर की बीमारी को बढ़ने डे रहे हैं. 
24 सितम्बर 2015 :बीती बातों को भूलकर, बीती बातों से शिक्षा लेकर आगे के लिए सावधान रहिये.  
25 सितम्बर 2015 : अपने सहज स्वाभाविक स्वरूप में रहिए, यह कुछ और होने का स्वांग करने से कहीं अधिक अच्छा है. 

26 सितम्बर 2015 : यदि आपके संकल्प शुद्ध हैं तब जो आप सोचते हैं, वह कहना तथा जो आप कहते हैं वह करना सरल हो जाता है. 

27 सितम्बर 2015 : यदि आप हमेशा ऊँची दृष्टि रखते हैं तब आपका मस्तक स्वत: ऊँचा रहेगा. 

28 सितम्बर 2015 : सरलता में महान सौन्दर्य होता है. जो सरल है, वह सत्य के समीप है.
29 सितम्बर 2015 : चाहे कोई आपकी निंदा या अपमान करता है फिर भी उस पर मुस्कान व शुभकामनाओं के पुष्पों की वर्षा करें. 

30 सितम्बर 2015 : यदि कोई आपसे नाराज है और आपको बुरा-भला कह रहा है तब उस समय उत्तेजित होने के बजाय धैर्यता से काम लें. 



नोट : तस्‍वीरों का इस्‍तेमाल सिर्फ प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है। फोटो-गूगल+फेसबुक साभार.
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गुरुवार, अगस्त 06, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( अगस्त -2015 )

1 अगस्त 2015 : जब तक आप प्रयत्न करना बंद न कर दें, अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता है. 

2 अगस्त 2015 : क्या आपको जीवन रूपी वृक्ष का ज्ञान है या आप केवल इसकी टहनियों के नीचे ही खड़े हैं?

3 अगस्त 2015 : धन कमाना बुरा नहीं है, धन का दुरूपयोग करना बुरा है.

4 अगस्त 2015 : कभी भी गलतफहमी के शिकार होकर अच्छे सम्बधों को बिगड़ने न दें. 

5 अगस्त 2015 : दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है.

6 अगस्त 2015 : लाठी व पत्थर से हड्डियाँ टूटती है परन्तु शब्दों से प्राय: सम्बन्ध टूट जाते हैं.

7 अगस्त 2015 : आलसी व्यक्ति को आसान-से-आसान काम भी कठिन लगता है. आलस्य ही मानव जीवन की प्रगति में बाधक है.

8 अगस्त 2015 : सज्जनता की परीक्षा आपके व्यवहार से होती है.

9 अगस्त 2015 : याद रखिये कि माँ-बाप के आचरण से बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं.

10 अगस्त 2015 : यदि आपने एक अवसर गँवा दिया तो आंसुओं के बादलों से अपनी दृष्टि धुंधली मत कीजिये. अपनी दृष्टि स्वच्छ रखिये.

11 अगस्त 2015 : जवाबदारियां सम्भालते हुए मन को सदा स्वतंत्र रखना-यह भी एक कला है.

12 अगस्त 2015 : विचार ही सभी कर्मों के बीज है इसलिए मुझे सिर्फ अच्छे, शुध्द बीज ही बोने चाहिए, जिनसे श्रेष्ठ फल प्राप्त होंगे.

13 अगस्त 2015 : असत्यता पर आधारित सम्बन्ध रेत की नींव पर बने भवन के समान हैं. 

14 अगस्त 2015 : अगर हम सत्य से छिपते हैं तब इसका अर्थ है कि हम अवश्य ही असत्य के संग रह रहे हैं. 

15 अगस्त 2015 : अगर आपको देखना ही है तब हर एक की विशेषताएं देखिये. अगर आपको कुछ छोड़ना ही है तब अपनी कमजोरियां छोडियें.     

16 अगस्त 2015 : अगर आँखें आत्मा की खिड़कियाँ है तब क्या आप अपनी आँखें स्वच्छ रखते हैं ? गंदी खिडकियों का अर्थ है कि आपके पास छिपाने के लिए कुछ है.

17 अगस्त 2015 : यदि में अपने सारे लेन-देन ईमानदारी से करता हूँ तब मुझे कभी भी भय का अनुभव नहीं होगा.

18 अगस्त 2015 : बुराई का चिन्तन करने या बुराई से डरने से बुराई मन में घर कर जाती है.

19 अगस्त 2015 : जहाँ प्रेम नहीं, वहां शांति नहीं हो सकती. जहाँ पवित्रता नहीं, वहां प्रेम नहीं हो सकता है.

20 अगस्त 2015 : नैतिकता तथा गुण हीरे-रत्नों से भी अधिक मूल्यवान हैं. यह मनुष्य को सन्तुष्टि प्रदान करते हैं तथा उसे प्रभु-प्रिय व लोक-प्रिय बना देते हैं. 

21 अगस्त 2015 : जिस व्यक्ति ने प्रशंसा करना तो सीखा है परन्तु ईर्ष्या करना नहीं, वह अत्यंत भाग्यशाली है.

22 अगस्त 2015 : जैसे अहं भाव से घमंड पैदा होता है वैसे ही विभ्रम (शक, संदेह) मोह का परिणाम है. 

23 अगस्त 2015 : दिव्य गुण मानव को ईश्वर के समीप ले आते हैं जबकि विकार उसे ईश्वर से दूर ले जाते हैं. 

24 अगस्त 2015 : धैर्य व नम्रता नामक दो गुणों से व्यक्ति की ईश्वर से समीपता बनी रहती है.

25 अगस्त 2015 : अहं भाव से मानव में वे सारे लक्षण आ जाते हैं, जिनसे वह अप्रिय बन जाता है.

26 अगस्त 2015 : अपशब्द प्रयोग का करने का अर्थ यह है कि मुझ में इतनी भी अक्ल नहीं है कि मैं अन्य शब्दों का चयन कर सकूं. 

27 अगस्त 2015 : ईश्वर से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने का अर्थ है कि आप सभी इच्छाओं से पार जा चुके हैं. 

28 अगस्त 2015 : यदि सत्यता व ईमानदारी मुझे सहज लगती हैं तब परमात्मा से प्रेम भी सहज प्राप्त हो सकता है. 

29 अगस्त 2015 : यदि व्यक्ति अपने नैतिक मूल्य खो देता है तब मानो अपना सब कुछ खो देता हैं. 

30 अगस्त 2015 : अच्छी व स्वच्छ प्रतियोगिता स्वस्थ बनाती है परन्तु ईर्ष्या एक घातक रोग है.

31 अगस्त 2015 : परमात्मा गुणों के सागर हैं. यदि आप किसी विकार की अग्नि में जल रहे हैं तब उस सागर में डुबकी लगाइये. 


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शुक्रवार, जनवरी 27, 2012

अनमोल वचन-आठ

1. हर इंसान में कुछ ख़ूबियां होती हैं – बस कुछ लोग अपने अंदर नहीं झांकते 2. कभी भी बहाने न बनाएं. आपके मित्रों को उनकी आवश्‍यकता नहीं है और आपके शत्रु उन पर विश्वास नहीं करेंगे.3.उत्साह खोए बिना एक विफलता से दूसरी की ओर जाने की क्षमता ही सफलता है 4. जो आपके करीब है उन्हें खुश रखें, और जो आपसे दूर हैं वो एक दिन ज़रूर आपके क़रीब आएंगे 5. अच्‍छी पुस्‍तकें, अच्‍छे मित्रों के समान हैं, ये बहुत कम और चुनी हुईं होती हैं; जितना अधिक चयन, उतनी ही अधिक मज़ेदार 6.व्यक्ति को जीवित रहने के लिए साफ छवि की आवश्यकता होती है 7. अच्छा श्रोता केवल लोकप्रिय ही नहीं होता, बल्कि वह कुछ समय बाद कुछ जानने भी लगता है 8. जब लोग बातें करते हैं तो उन्हें ध्यान से सुनें. बहुत से लोग कभी नहीं सुनते.9. आवश्‍यकता आविष्‍कार की जननी है. 10. अधिक उम्र में शिक्षा सबसे अच्छा प्रावधान है. 11.अच्छा श्रोता केवल लोकप्रिय ही नहीं होता, बल्कि वह कुछ समय बाद कुछ जानने भी लगता है 12. दूसरो की गलतियों को उसी रूप में देखें जैसे आप अपनी गलतियों को देखते हैं 13.पूर्वाग्रह विश्लेषण के बिना जन्मा एक विचार मात्र होता है 14. अपने स्रोत को किस तरह छुपाएं ये जानना ही रचनात्मकता का राज़ है. 15. समझदारी दो तरफा मार्ग है 16. केवल अकुशल व्यक्ति ही गलत तरीके अपनाते हैं. 17. प्रयास करने वाले पर ही विश्वास करें. 18. नए मित्र बनाने के लिए सही समय है 17.यदि आप दूसरों को खुश देखना चाहते हैं, तो दयालु बनें. यदि आप खुश रहना चाहते हैं, तो दयालु बनें 18. आज किसी के लिए कोई अच्छा कार्य करके देखें 19. सफलता का मतलब अंत नहीं होता है, विफलता भी घातक नहीं होती: हमेशा आगे बढ़ते रहने का साहस ही महत्व रखता है. 20. कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. 21 भलाई का कोई भी काम बेकार नहीं जाता, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो 22.महान कार्य करने के लिए आत्म-विश्वास सबसे पहली आवश्यकता है 23. हम जैसा सोचते हैं, हम वैसे हो जाते हैं (पर कृपया खुद को सुपरहीरो न समझें और उड़ने का प्रयास न करें) 24. यदि आप कभी भी डरते नहीं, या असहज नहीं होते, या चोट नहीं खाते, तो इसका अर्थ है कि आप कभी भी प्रयास ही नहीं करते 25. कल के जीवन में बहुत समय है. आज में जीएं 26. शायद मैं वहां नहीं गया, जहां मैं जाना चाहता था, लेकिन मुझे लगता है कि मैने वहां समाप्त किया है जहां मुझे करना चाहिए था. 27. प्रयास करने वाले पर ही विश्वास करें 28. पुराने कामों को पूरा करने का अच्छा समय है 29. ख़ून के बदले ख़ून की प्रवृति सारे विश्व का विनाश कर देती है 30.प्रयास करें और विफल हों, परंतु प्रयास करने में कभी विफल न हों 31. भविष्य उन लोगों का होता है जो अपने सपनों की खूबसूरती में विश्वास करते हैं 32. नृत्य आत्मा की छुपी हुई भाषा है 33.पढ़ें ऐसे जैसे आप हमेशा जीवित रहना चाहते हैं. जिएं ऐसे जैसे आप कल ही मरने वाले है. 34.जैसा अन्न, वैसा मन. 35. आज ख़ुशी बांटने का एक बेहतरीन दिन है 36. अंहकार ही पतन का कारण है 37.मित्र वही होता है जो आपको बेहतर तरीके से जानता है और आपसे उतना ही प्यार करता है 38. यदि बर्बाद नहीं करेंगे, तो आपके पास कमी भी नहीं होगी. 39. जीवन का सबसे अधिक आनंद उस कार्य को करने में है जिसे लोग कहते हैं कि आप नहीं कर सकते हैं 40. कल्पना के बेहतर दिशा में कार्य करने से ही अच्छे कार्यों का जन्म होता है 41. खुद के प्रति ईमानदार रहें 42. महसूस करने वालों के लिए ये दुनिया एक त्रासदी है, लेकिन सोचने वालों के लिए एक आनंद 43. कमज़ोर व्यक्ति कभी क्षमा नहीं करता. क्षमा करना महान व्यक्ति की विशेषता होती है 44.ज़िंदगी दुश्‍मनी निभाने या कमियां ढूंढने के लिए बहुत छोटी है. 45. पुस्तक ज्ञान का भंडार होती है 46. आप जीवन को अनदेखा कर शांति नहीं पा सकते. 46.यदि आप चाहते हैं कि दूसरे आपका राज़ छुपाए रखें, तो पहले आपको खुद उसे छुपाए रखना होगा 47. धीरे-धीरे आगे बढ़ने में न डरें, वहीं के वहीं खड़े रहने से डरें 48. महान कार्य करने के लिए हमें सपने देखने के साथ-साथ कार्य भी करना होता है 49. जो पसंद हो वह करो और जो करो उसे पसंद करो.50. यदि बाकी सब कुछ विफल हो जाता है, तो स्वाभाविक को आजमाएं. लड़ाई के लिए भी दो लोगों का होना जरूरी है. 51. यदि आप किसी को नहीं बताना चाहते हैं, तो इसे न करें 52. मैं अकेले दुनिया नहीं बदल सकती, लेकिन मैं पानी में पत्‍थर फेंककर उसमें कई लहरें बना सकती हूं. 53. आप जीवन को अनदेखा कर शांति नहीं पा सकते. 54. जो प्रश्न पूछता है, वह केवल पांच मिनटों के लिए मूर्ख साबित होता है, लेकिन जो नहीं पूछता, वह हमेशा मूर्ख ही बना रहता है 55. जीत के लिए प्रतिभा आवश्यक है, और उसे दोहराने के लिए चरित्र. 56.देश के युवा की शिक्षा प्रत्येक देश की आधारशिला होती है 56. सनकी वह है, जो अपने विचार बदल नहीं सकता और विषय को बदलेगा नहीं. 57.प्यार सभी को जीत लेता है 58. यदि आप प्यार पाना चाहते है, तो प्यार करने योग्य बनें. कल्पना के बेहतर दिशा में कार्य करने से ही अच्छे कार्यों का जन्म होता है 60. निराशावाद से कभी कोई युद्ध नहीं जीत सकता 61. एक हाथ से ताली नहीं बजती. 62. पूर्वाग्रह विश्लेषण के बिना जन्मा एक विचार मात्र होता है 63. अपने काम में ख़ुशी तलाशने का प्रयत्न करें अन्यथा आप कभी नहीं जान पाएंगे कि ख़ुशी क्या होती है. 64. कार्य स्वयं आपको बताता है कि इसे कैसे किया जाए 65. आज आप किसी ऐसे व्यक्ति को स्क्रैप क्यों नहीं करते, जिससे आपने वर्षों से बात नहीं की है? 66. उत्साह खोए बिना एक विफलता से दूसरी की ओर जाने की क्षमता ही सफलता है. 67. धैर्य आशा करने की ही एक कला है 68. आपको वही कार्य करना चाहिए जो आपको अपने लिए असंभव लगता है. 69. अशिक्षित व्यक्ति को इस दुनिया में जानवर के समान समझा जाता है 70. दृश्य धोखा देता है, जबकि शब्‍द बयान कर देते हैं.71. एक हाथ से ताली नहीं बजती. 72. देखें आप क्या कहते हैं – जो कुछ भी नहीं कहते, उनमें से कुछ ख़ामोश हैं 73. बिना गुण की सुंदरता बिना सुगंध के गुलाब की तरह है 74. मूर्ख और पागल हमेशा अपने बारे में सुनिश्चित होते हैं, जबकि समझदार संशयग्रस्‍त होते हैं 75. ज्ञान ऐसा ख़ज़ाना होता है जो अपने स्वामी के साथ हमेशा रहता है 76. कभी भी किसी ऐसे व्यक्ति को हतोत्साहित न करें जो लगातार प्रगति कर रहा हो, भले ही उसकी गति कितनी ही धीमी क्यों न हो. 77. उम्मीद हर स्थिति में आवश्यक है 78. विरोध के बदले शांति अनुभव करना चुनें 79. आपको वही कार्य करना चाहिए जो आपको अपने लिए असंभव लगता है. 80. कलम तलवार से अधिक ताकतवर होती है. 81. ज्ञान ऐसा ख़ज़ाना होता है जो अपने स्वामी के साथ हमेशा रहता है 82. स्वयं को किसी प्रतिभा या अन्य तरीके से विलक्षण बनाएं 83. हमेशा सही काम करें और किसी से न डरें 84. जब-जब भी आप किसी को देखकर मुस्‍कुराते हैं, तो वह प्रेम की क्रिया है, वह उस व्‍यक्ति के लिए उपहार है, एक सुंदर वस्‍तु है. 85. भविष्य का पूर्वानुमान करने का सबसे अच्छा तरीका उसे बनाना है 86. साधारण होना ही महान होना है 87. आज पुराने मित्र को संदेश भेजें 88. हठ वास्‍तविकता बन जाता है. 89. जो आपके करीब है उन्हें खुश रखें, और जो आपसे दूर हैं वो एक दिन ज़रूर आपके क़रीब आएंगे 90.अच्छा श्रोता केवल लोकप्रिय ही नहीं होता, बल्कि वह कुछ समय बाद कुछ जानने भी लगता है 91. जब लोहा गरम हो, तो चोट करो. 92. केवल कम स्मृति वाले व्‍यक्ति ही अपनी मौलिकता पर ज़ोर देते हैं 93. क्षमा करो और भूल जाओ. 94. काव्‍य एक प्रतिध्‍वनि है, जो साये को भी नाचने के लिए प्रेरित करता है 95. साधारण होना ही महान होना है  96. एक समझदार मौन किसी वक्तव्य से अधिक अर्थपूर्ण होता है 97. जो पक्षी पहले आता है वह कीट को पकड़ लेता है. लेकिन दूसरे चूहे को ही मक्खन मिलता है. 98.अचानक आया तुफ़ान, जल्द ही थम जाता है.99. मजाक में भी कई सच्‍ची बातें निकल आती है. 100. भलाई का कोई भी काम बेकार नहीं जाता, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो 101. सादगी ही सर्वश्रेष्ठ दुनियादारी है 102.स्वयं को किसी की ज़रूरत बनाएं 103. गुणवत्ता से समझौता न करें. 104. जो पक्षी पहले आता है वह कीट को पकड़ लेता है. लेकिन दूसरे चूहे को ही मक्खन मिलता है.105. देखें आप क्या कहते हैं – जो कुछ भी नहीं कहते, उनमें से कुछ ख़ामोश हैं 106. अपने आप को जोखिम में न डालें. वह सब कुछ, जो आपके पास है, वह आप स्वयं हैं 107.हंसी मज़ाक सभी बातों को सहनीय बना देता है 108. मौका मिले तो चूको मत. 109. जब आप मज़ा कर रहे होते हैं तो समय तेजी से गुज़रता है. 110. जब लोग बातें करते हैं तो उन्हें ध्यान से सुनें. बहुत से लोग कभी नहीं सुनते 111. कार्य करने से परिणाम मिलता है, सिर्फ बोलने से कुछ हासिल नहीं होता 112. आप अतीत को ध्यान में रखकर अपने भविष्य की योजना नहीं बना सकते 113. जैसा अन्न, वैसा मन 114.  सफलता का मतलब अंत नहीं होता है, विफलता भी घातक नहीं होती: हमेशा आगे बढ़ते रहने का साहस ही महत्व रखता है 115. यदि बाकी सब कुछ विफल हो जाता है, तो स्वाभाविक को आजमाएं. लड़ाई के लिए भी दो लोगों का होना जरूरी है. 116. कार्य उद्यम से सिद्ध होते है, मनोरथ से नहीं. 117. महान कार्य करने के लिए आत्म-विश्वास सबसे पहली आवश्यकता है 118. यदि आपका जीवन आपको खुशी नहीं देता, तो अपने नए जीवन की रचना करें. 119. हर पीढ़ी स्वयं की कल्पना अपने से पिछली पीढ़ी से अधिक बुद्धिमान और अपनी अगली पीढ़ी से अधिक समझदार के रूप में करती है 120. पढ़ें ऐसे जैसे आप हमेशा जीवित रहना चाहते हैं. जिएं ऐसे जैसे आप कल ही मरने वाले है 121. मूर्ख और पागल हमेशा अपने बारे में सुनिश्चित होते हैं, जबकि समझदार संशयग्रस्त होते हैं 122. जिंदगी एक किताब की तरह है: महत्‍व इस बात का है कि वह कितनी अच्‍छी है, इसका नहीं कि वह कितनी लंबी है 123. खुद को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद को दूसरों की सेवा में समर्पित कर दें 124.महान कार्य करने के लिए आत्म-विश्वास सबसे पहली आवश्यकता है 125.ज्ञान ही एकमात्र अच्छाई है, और अज्ञानता एकमात्र बुराई 126.धैर्य एक सदाचार है. 127. देश के युवा की शिक्षा प्रत्येक देश की आधारशिला होती है 128.निराशावाद से कभी कोई युद्ध नहीं जीत सकता129. समय पर पहल करने से ही सफलता मिलती है. 130.सबसे साहसिक कार्य अब भी स्वयं के बारे में विचार करना ही है. गंभीरतापूर्वक. 131.हमारी कमज़ोरियां ही हमारी क्षमता बढ़ाती है. 132.थोड़ी सी चूक से बड़ी हानि होती है 133.  परिवर्तन जीवन का नियम है 134. एक समझदार मौन किसी वक्तव्य से अधिक अर्थपूर्ण होता है. 134. महान आत्‍माओं को हमेशा ही मध्यम स्तर की सोच वालों से हिंसक विरोध का सामना करना पड़ा है. 135. आप भला तो जग भला 136. आज किसी के लिए कोई अच्छा कार्य करके देखें 137. आज से कोई किताब पढ़ना आरंभ करें 138. महान कार्य करने के लिए हमें सपने देखने के साथ-साथ कार्य भी करना होता है 139. उम्मीद हर स्थिति में आवश्यक है  140. कमजोर कभी माफ नहीं कर सकता. माफी तो ताकतवर का गुण है 140. आज कुछ नया सीखने का प्रयत्न करें 141. कलम तलवार से अधिक ताकतवर होती है. 142. भविष्य उन लोगों का होता है जो अपने सपनों की खूबसूरती में विश्वास करते हैं. 143. पुराने कामों को पूरा करने का अच्छा समय है 144. उत्साह खोए बिना एक विफलता से दूसरी की ओर जाने की क्षमता ही सफलता है 145. कमजोर कभी माफ नहीं कर सकता. माफी तो ताकतवर का गुण है 146. उम्मीद हर स्थिति में आवश्यक है 147. जीवन का उद्देश्य जीने में निहित है, और जिज्ञासा को जीवित रखा जाना चाहिए. व्‍यक्ति को कभी भी, किसी भी कारण से, जीवन से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए. 148. कार्य करने से परिणाम मिलता है, सिर्फ बोलने से कुछ हासिल नहीं होता 149. भविष्य उन लोगों का होता है जो अपने सपनों की खूबसूरती में विश्वास करते हैं. 150.मुफ्त में कुछ नहीं मिलता 151.  सहयोग से कार्य आसान हो जाता है. 152. आप अतीत को ध्यान में रखकर अपने भविष्य की योजना नहीं बना सकते

शनिवार, सितंबर 24, 2011

आमंत्रण पत्र-अनपढ़ और गंवारों के समूह में शामिल होने का

दोस्तों, क्या आप सोच सकते हैं कि "अनपढ़ और गँवार" लोगों का भी कोई ग्रुप इन्टरनेट की दुनिया पर भी हो सकता है? मैं आपका परिचय एक ऐसे ही ग्रुप से करवा रहा हूँ. जो हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु हिंदी प्रेमी ने बनाया है. जो अपना "नाम" करने पर विश्वास नहीं करता हैं बल्कि अच्छे "कर्म" करने के साथ ही देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर अपने आपको "अनपढ़ और गँवार" की संज्ञा से शोभित कर रहा है.अगर आपको विश्वास नहीं हो रहा, तब आप इस लिंक पर "हम है अनपढ़ और गँवार जी" जाकर देख लो. वैसे अब तक इस समूह में कई बुध्दिजिवों के साथ कई डॉक्टर और वकील शामिल होकर अपने आपको फक्र से अनपढ़ कहलवाने में गर्व महसूस कर रहे हैं. क्या आप भी उसमें शामिल होना चाहेंगे?  फ़िलहाल इसके सदस्य बहुत कम है, मगर बहुत जल्द ही इसमें लोग शामिल होंगे. कृपया शामिल होने से पहले नियम और शर्तों को अवश्य पढ़ लेना आपके लिए हितकारी होगा.एक बार जरुर देखें.
"हम है अनपढ़ और गँवार जी" समूह का उद्देश्य-

प सभी को नमस्कार जी, यहाँ पर बिना किसी धर्म, जाति और भेदभाव के ही देश प्रेम की भावना को सबसे बड़ा धर्म मानते हुए हिंदी और भारत देश की क्षेत्रीय भाषा के हित में कार्य करने हेतु समूह का निर्माण किया है.यह मेरा नहीं आपका समूह है.इसको आगे लेकर जाना भी हम सब का काम है.ना यहाँ कोई मालिक और ना कोई नौकर है. बस "इंसानियत" ही एक हमारी पहचान है. 
इस ग्रुप में लगाईं फोटो मेरे पिता स्व.श्री राम स्वरूप जैन और मेरी माताश्री फूलवती जैन जी की है. जो अनपढ़ है. मगर उन्होंने अपने तीनों बेटों को कठिन परिश्रम करने के संस्कार दिए.जिससे इनके तीनों बेटे अपने थोड़ी-सी पढाई के बाबजूद कठिन परिश्रम के बल पर समाज में एक अच्छा स्थान रखते हैं. 
    इनके अनपढ़ और भोले-भाले होने के कारण इन्होने दिल्ली में आने के चार साल बाद ही अपनी बड़ी बेटी स्व. शकुन्तला जैन को दहेज लोभी सुसराल वालों के हाथों जनवरी,सन-1985 में गँवा दिया था और तब मेरे अनपढ़ माता-पिताश्री से दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों ने कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाकर मन मर्जी का केस बना दिया. जिससे सुसराल वालों को कानूनरूपी कोई सजा नहीं मिल पाई. गरीबों के प्रति फैली अव्यवस्था और सरकारी नीतियों के कारण ही पता नहीं कब इनके सबसे छोटे बेटे रमेश कुमार जैन उर्फ सिरफिरा के सिर पर लेखन का क्या भुत सवार हुआ. फिर लेखन के द्वारा देश में फैली अव्यवस्था का विरोध करने लगा.    
       मेरे माता-पिताश्री के आर्थिक रूप से ज्यादा संपन्न ना होने के कारण मेरी पढाई ज्यादा नहीं हो पाई. इसलिए मुझे अंग्रेजी नहीं आती हैं. अत: आपसे विनम्र अनुरोध है आप इस ग्रुप में अपने पढ़े-लिखें होने का मुझे अहसास करवाते हुए "अंग्रेजी" में टिप्पणी ना करें. आज मैं थोड़ा बहुत जो भी "पत्रकार" हूँ, अपनी कठिन परिश्रम करने की लगन और बहुत सारे अच्छे दोस्तों व विद्वानों का लेखन को पढकर उनका अपने जीवन में अमल करने पर ही इस योग्य बन पाया हूँ.    
       यह ऐसे लोगों का समूह है, जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती....इस तरह के जीव आजकल "अनपढ़ और गँवार" कहे जाते हैं....कारण है न इसका, यह समय के साथ नहीं न चल पाए......अब बताओ भला, यह भी कोई बात है ? क्या कहा अंग्रेजी नहीं आती ? लानत है तुम पर, "अनपढ़ और गँवार" कहीं का ! कुछ ऐसी ही टिप्पणियाँ अक्सर इन जीवों को सुनने को मिलती है.कई बार ऐसे व्यक्ति हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं. अब इनको दुबारा स्कूल में भेजना संभव नहीं है. लेकिन देखो जी ! अब क्या करें हम, जो हैं सो हैं. अनपढ़ और गँवार ही सही.तब यह सोचा कि कहीं हम अकेले ही तो अनपढ़ और गँवार तो नहीं ? अपनी तरह के क्यों नहीं कुछ और जीवों की खोज की जाए. ऐसे जीवों को यहाँ इकठ्ठा करना ही इस समूह का उद्देश्य है.
     मेरा उन सभी से निवेदन है कि जो संसारिक जीवन की किताबें पढ़ चुके है ओर जीवन की असली किताब "इंसानियत" को पढ़ने से वंचित रह गए थें. वो सभी "अनपढ़" ग्रुप में अपने आप को शामिल करें ओर अपने दोस्तों को शामिल करके देश और मानवता को आगे लेकर जानने में हमारा सहयोग करें. आप सभी महानुभवों से अनुरोध है कि-यहाँ पर केवल हिंदी में ही टिप्पणी और संदेश लिखें. जिनको हिंदी के फॉण्ट की परेशानी हो वो थोड़ा सा ज्यादा कष्ट करें और अपना सहयोग दें. देखो भाई लोगों...जो भी भाषा बोल सको बोलो...कोई बंदिश नहीं...जिसको समझना होगा समझेगा, ना समझ पाए तब वो जाने. लेकिन यहाँ अनपढों को पूर्ण आश्रय मिलेगा.
    इसलिए आप यहाँ अनपढों का ध्यान रखते हुए. अपनी टिप्पणी या संदेश हिंदी में ही लिखें. इसका पालन ना करने वाले संदेश या टिप्पणी को यहाँ से हटा दिया जाएगा.मुझे अंग्रेजी के छोटे और सरल शब्दों को हिंदी में लिखे जाने पर कोई एतराज नहीं है. जैसे OFFICE को हिंदी में "ऑफिस" लिखने पर कोई एतराज नहीं है. वैसे हिंदी में ऑफिस का अर्थ "दफ्तर" होता है और अपने किसी भी दोस्त को इस समूह में बिना उसकी अनुमति के शामिल ना करें. बल्कि उसको इसमें शामिल होने के लिए इस ग्रुप का लिंक भेजकर शामिल होने का निवेदन करें. बाकी उसकी मर्जी पर छोड़ दीजिए और उस पर किसी प्रकार का दवाब ना बनाये. बस यही शर्त है यहाँ शामिल होने की. धन्यवाद !
     वैसे हम मानते हैं कि हिंदी की टाइपिंग थोड़ी मुश्किल तो है, मगर इतनी मुश्किल भी नहीं है कि-हिंदी की टाइपिंग सीखी/करी न जा सकें.फिर हिंदी की टाइपिंग कौन-सी असंभव चीज है, जो करी न जा सकें. कहा जाता है कि-आसान कार्य तो सभी करते हैं, मगर मुश्किल कार्य कोई-कोई करता है. इसी सन्दर्भ में एक कहावत भी है कि-गिरते हैं मैदाने जंग में शेरे सवार,वो क्या खाक गिरेंगे जो घुटनों के बल चलते हैं.बस अपने मन में ठानकर निरंतर प्रयास करना शुरू कर दीजिये. तब देखना कैसे हिंदी पर आपकी उंगुलियां अपने आप कैसे और किस गति से चलती है.
       अगर आपको हिंदी लिखने में परेशानी होती हो तब आप यहाँ (http://www.google.co.in/transliterate) पर जाकर हिंदी में संदेश लिखें .फिर उसको वहाँ से कॉपी करें और यहाँ पर पेस्ट कर दें. दोस्त, ऊपर दिए लिंक पर आप जाकर रोमन में इंग्लिश लिखो और स्पेस दो.आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा.जैसे-dhanywad = धन्यवाद
       आनलाइन हिंदी लिखने का यह नया टूल गेट2होम बड़ा ही क्रांतिकारी अविष्कार है। दुनिया की तमाम भाषाओं में इसमें न सिर्फ लिखना आसान होता है बल्कि वहीं से सीधे आप इसे ट्विटर, फेसबुक पर पोस्ट कर सकते हैं। इसे आप सीधे मेल भी कर सकते हैं। शेयर कर सकते हैं और जीप्लस पर भी पोस्ट कर सकते हैं। खुद ही आजमाकर देखिए। इसका लिंक है- http://gate2home.com/Hindi-Keyboard इसमें जाकर दाहिनी तरफ ऊपर अपनी मनचाही भाषा बदल सकते हैं।
   इन्टरनेट या अन्य सोफ्टवेयर में हिंदी की टाइपिंग कैसे करें और हिंदी में ईमेल कैसे भेजें जाने हेतु ब्लॉग देखें. 
     आखिर हम कब तक सारे हिन्दुस्तानी एक दिन का "हिंदी दिवस" मानते रहेंगे? क्या हिंदी लिखने/बोलने/समझने वाले अनपढ़ होते हैं? क्या हिंदी लिखने से हमारी इज्जत कम होती हैं? अगर ऐसा है तब तो मैं अंगूठा छाप हूँ और मेरी पिछले 35 सालों में इतनी इज्जत कम हो चुकी है, क्योंकि इतने सालों तक मैंने सिर्फ हिंदी लिखने/बोलने/समझने के सिवाय कुछ किया ही नहीं है. अंग्रेजी में लिखी/कही बात मेरे लिए काला अक्षर भैंस के बराबर है. आइये दोस्तों, हम सब संकल्प लें कि-आगे से हम बात हिंदी में लिखेंगे/बोलेंगे/समझायेंगे और सभी को बताएँगे कि हम अपनी भाषा को एक दिन की भाषा नहीं मानते हैं. अब देखते हैं यहाँ कितने व्यक्ति अपनी हिंदी में टिप्पणियाँ करते हैं? 
     दोस्तों और सदस्यों को एक निवेदन-इस समूह में हिंदी से जुडी तकनीकी जानकारी और टूल, लिंक आदि अगर आपकी जानकारी में हो उसको प्रयोग करने का तरीका सरल भाषा में लिखकर यहाँ पर टिप्पणी/संदेश के रूप में पोस्ट/प्रकाशित करें. जिससे कुछ अन्य व्यक्ति भी आपकी जानकारी से लाभानित होंगे और आपको दुआएं देंगे.
     दुश्मनों को दोस्त बनाने में ही बहादुरी है. इसलिए दुश्मनों को भी दोस्त बनाना सीखो, दोस्तों को दुश्मन बनाना तो बहुत आसान काम है. किसी दोस्त से मतभेद होना कोई बड़ी बात नहीं, किसी दोस्त के प्रति मनभेद होना बहुत बड़ी बात है.   
     आप विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं-
 उपरोक्त वार्तालाप को यहाँ डालने का उद्देश्य है. सभी यहाँ नियमों का पालन करें. यहाँ पर किसी अपमान करना मेरा उद्देश्य नहीं है. नियमों की अनदेखी पर मैं बहुत सख्त हूँ. आप यहाँ पर अपना किसी भी प्रकार की विचारों की अभिव्यक्ति कर सकते हैं.यह समूह व्यक्ति विशेष का नहीं है.बल्कि हम सभी है. जिसमें महिलाएं और पुरुष शामिल है. इसलिए यहाँ पर विचारों में शालीनता होनी चाहिए. मुझे उम्मीद है. आप सभी "अनपढ़ और गंवारों" का सहयोग प्राप्त होगा.
     अंग्रेजी को छोड़कर आप भारतीय किसी भाषा और लिपि का प्रयोग कर सकते हैं. लेकिन एक से ज्यादा भाषा में संदेश को डालते समय उसमें एक हिंदी लिपि का होना आवश्क है. अगर आपको एक से अधिक भाषों का ज्ञान है. तब आप अपनी प्रतिभा दिखाए. हर प्रतिभाशाली का उत्साह में खुद बढ़ाऊंगा.
रमेश कुमार सिरफिरा= क्या आपने समूह के नियम नहीं पढ़ें, यहाँ पर फ़िलहाल नाम और लिंक को छोड़कर एक शब्द अंग्रेजी में नहीं होना चाहिए.अपने संदेश में सुधार करें. नहीं तो हटा दिया जाएगा.यहाँ हिंदी को लेकर सख्त नियम बनाये है. कृपया ऐसे व्यवहार के लिए क्षमा करें.
Vaibhav Ajmera= एक बार और देख ले बंधू ..........कही कुछ गलत नहो जाय ,,,,,,,,क्योंकि किसी के नियमो की अवहेलना करना मेरा उद्देश्य नहीं है............वरण आध्यात्मिक विचारो का प्रसार करना .....न की स्वयं का प्रचार................आपकी आध्यात्मिक विनम्रता के लिए साधुवाद !!!!
रमेश कुमार सिरफिरा=आपको भी. बिल्कुल सही है, उच्चारण में पढ़े के स्थान पर आपने पड़े लिख दिया है. मगर उच्चारण की बात समझते हैं लोग.
हिंदी मैं नाम लिखने की भीख मांगता एक पत्रकार- 
मुझ "अनपढ़ और गँवार" नाचीज़(तुच्छ) इंसान को ग्रुप/समूह के कितने सदस्य अपनी प्रोफाइल में अपना नाम पहले देवनागरी हिंदी में लिखने के बाद ही अंग्रेजी लिखकर हिंदी रूपी भीख मेरी कटोरे में डालना चाहते है.किसी भी सदस्य को अपनी प्रोफाइल में नाम हिंदी में करने में परेशानी हो रही हो तब मैं उसकी मदद करने के लिए तैयार हूँ. लेकिन मुझे प्रोफाइल में देवनागरी "हिंदी" में नाम लिखकर "हिंदी" रूपी एक भीख जरुर दें. आप एक नाम दोंगे खुदा दस हजार नाम देगा. आपके हर सन्देश पर मेरा "पंसद" का बटन क्लिक होगा. दे दो मुझे दाता के नाम पे, मुझे हिंदी में अपना नाम दो, दे दो अह्ल्ला के नाम पे, अपने बच्चों के नाम पे, अपने माता-पिता के नाम पे. दे दो, दे दो मुझे हिंदी में अपना नाम दो.
प्रश्न:-मुझे देवनागरी में नाम लिखने से सर्च करने में परेशानी होती है....इसलिए मैंने रोमन में लिखा हुआ है.....जो भी नाम देवनागरी में लिखे हैं, वो सर्च करने पर नहीं मिलते हैं.
उत्तर:-अपनी प्रोफाइल में हिंदी में नाम कैसे लिखें:-आप सबसे पहले "खाता सेट्टिंग " में जाए. फिर आप "नेम एडिट" को क्लिक करें. वहाँ पर प्रथम,मिडिल व लास्ट नाम हिंदी में भरें और डिस्प्ले नाम के स्थान पर अपना पूरा नाम हिंदी में भरें. उसके बाद नीचे दिए विकल्प वाले स्थान में आप अपना नाम अंग्रेजी में भरने के बाद ओके कर दें. अब आपको कोई भी सर्च के माध्यम से तलाश भी कर सकता है और आपका नाम हर संदेश और टिप्पणी पर देवनागरी हिंदी में भी दिखाई देगा. अब बाकी आपकी मर्जी. हिंदी से प्यार करो या बहाना बनाओ.
          उपरोक्त समूह के माननीय/आदरणीय सदस्यगणों से विनम्र अनुरोध हैं कि अपनी कोई भी टिप्पणी/संदेश अंग्रेजी में यहाँ ना डाले. किसी भी सदस्य को समूह का नियम याद नहीं करवाया जाएगा. मेरी नज़र पड़ते ही तुरंत हटा दिया जाएगा. कृपया ख्याल रखे यह "अनपढों और गंवारों" का समूह है और भविष्य में सभी ध्यान रखेंगे. बार-बार निवेदन करने से मुझे शर्म आ रही हैं. मगर "हम नहीं सुधरेंगे" प्रवृत्ति के व्यक्ति नहीं समझ रहें हैं.

रविवार, सितंबर 12, 2010

बेबाक टिप्पणियाँ (7)

क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (7)

प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें. उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें. उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव के आधार पर अपनी बेबाक टिप्पणियाँ कर दी. लेखों पर की कुछ टिप्पणियाँ निम्नलिखित है.किस लेख पर कौन सी की गई है यह जाने के लिए आपको http://teesarakhamba.blogspot.com/,  http://adaalat.blogspot.com/  और http://rajasthanlawyer.blogspot.com/  पर जाना होगा.इन पर प्रकाशित लेख व समाचारों को पढना होगा.

(1) मात्र अपनी संतान के प्रति मोह और प्रेम के कारण पत्नी की क्रूरता सहन करनी आवश्क तो नहीं है। फिर भी आपने काफी अच्छी जानकारी दी है.
(2) ऐसे मामलों में कुछ समाचार पत्रों के भ्रष्ट पत्रकार भी मात्र कुछ विज्ञापन के लिए मोबाईल कम्पनियों का साथ देते हैं. मेरे पास ऐसे अनेकों मामलों के पुख्ता सबूत है.फिर भी मैं श्री रतन सिंह शेखावत, बी.एस.पाबला, राहुल प्रताप सिंह राठौड़, महेंद्र मिश्र, नरेश सिंह राठौड़ और ताऊ रामपुरिया के भी विचारों से सहमत हूँ.

(3) आपने मुझे बहुत अच्छी जानकारी दी थी. उसी के आधार पर एक अन्य वकील के माध्यम से तीसरी बार अपनी जमानत याचिका लगवाई थी. मगर अफ़सोस- ढ़ाक के वहीँ तीन पात! चाहे पुरुष या महिला जज हो सब पक्षपात करते हैं और जो आरोप वुमंस सेल और धारा 125 के केस में थें/है ही नहीं उनको आधार बनाकर जमानत देने से इंकार कर रहे हैं और उन आरोपों के सन्दर्भ में कोई सबूत ही नही है.जिसका(छोटी मानसिकता का परिचय वाली बात कहकर) जिक्र मैंने आपको एक ईमेल में किया था.

हमारे देश के जजों, पुलिस और महिला आयोग की मानसिकता यह बनी हुई है कि आदमी ही औरत पर अत्याचार करता है, बल्कि आज महिला (पत्नी) और उसके परिवार वाले ज्यादा अत्याचार करते है. मगर यह सब जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी पैसो के लालच में खामोश रहता है और पति पर जुल्म करता है. मात्र कुछ कागज के टुकडों के लिए अपना ईमान और ज़मीर को भी बेच देता है या हम यह कहे सारे आवाम में नंगे है.
कम से कम जजों को अपनी (समय को देखते हुए) मानसिकता बदलने की जरूरत है.जहाँ पर देश के नेताओं पर कोई उम्मीद न हो. अब आप बताये कहाँ संघर्ष करूँ और कैसे. 20 अक्तूबर का जन्मदिन मनाकर और दीपावली के बाद आत्महत्या करने के सिवाय मेरे पास चारा ही क्या बचा है? पूरी तरह से भ्रष्ट न्याय व्यवस्था में कहाँ बगैर पैसों के न्याय की गुहार लगाऊ समझ नहीं आ रहा है. मेरा लगातार वजन भी गिरता जा रहा और हलक से रोटी भी नहीं उतरती है.
पहले वाले वकील ने पहली व दूसरी बार किन कारणों से जमानत नहीं हुई की कोई रिपोट नहीं दी थीं. उसने मेरे पैसे भी खा लिये और अदालत में सारे तथ्य भी सही से नहीं रखें. यह जानकारी आग्रमी जमानत ख़ारिज करने के आदेश की कापी निकलवाने पर पता चला है.उसी से जानकारी प्राप्त हुई कि- आग्रमी जमानत ख़ारिज करने की, स्वीकार करने की (जिससे आरोपी को गिरफ्तार न करे) और आवेदन करने की सूचना जांच अधिकारी को भेजी जाती है. तब जांच अधिकारी ने मेरी पत्नी को मेरे आवेदन की सूचना की जानकारी दी है. फिर वो उस दिन जज के पास हाजिर हुई है. मैं अपनी डिप्रेशन की बीमारी के चलते ही दुसरे प्रश्न में "आग्रमी" लिखना भूल गया था और कुछ उपरोक्त प्रश्न का जबाब (आपके अपने पेशे में बिजी होने के कारण ) बहुत देरी से प्राप्त हुआ और एक वकील को मात्र दूसरी बार के एक आदेश की प्रति के लिये एक हजार रूपये (अपनी विधवा माँ की पेंशन के लेकर) देने पड़े.

(4) आपके उपरोक्त लेख से संपूर्ण रूप से सहमत हूँ. कानून के शिकंजे में हमेशा छोटी मछलियाँ ही फंसती है.बड़े लोगों के पास वकीलों के लिये पैसा और सफेदपोश(जिनके लिये पैसा ही सब कुछ है) नेताओं का सहारा होता है.
(5) संयोग से जांच और पूछताछ के दौरान बॉलीवुड अभिनेता शाइनी आहूजा ने स्वीकार किया था कि उन्होंने नौकरानी की सहमति से उसके साथ यौन संबंध बनाए थे। उन्होंने कथित तौर पर नौकरानी से दुष्कर्म की बात भी स्वीकार की थी। शाइनी और प्रताड़ित महिला की चिकित्सा जांच और डीएनए जांच से दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। शाइनी पर 14 जून, 2009 को उनके घर में उनकी घरेलू नौकरानी के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और बंबई उच्च न्यायालय से 50,000 रुपये की जमानत राशि पर जमानत मिलने से पहले उन्हें पुलिस व न्यायिक हिरासत में विभिन्न जेलों में 110 दिन बिताने पड़े थे। इस घटना पर देशभर में व्यापक हंगामा होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग और मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने इसमें हस्तक्षेप कर प्रताड़ित महिला को जल्द न्याय दिलवाने के लिए मामले को त्वरित अदालत में ले जाने का निर्देश दिया था।                                                                              
मेरी राय: नौकरानी का यह कहना कि-उसके साथ इस तरह की घटना कभी नहीं हुई। क्या पहले की गई जांचें झूठी थी? या अब मामला ले-देकर निपटा दिया है. अब राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशैली पर एक प्रश्न चिन्ह है? क्या राष्ट्रीय महिला आयोग जेल में बिताये 110 दिनों का कोई हिसाब देगा? इसका राष्ट्रीय महिला आयोग और सरकार मुआवजा देंगी? या यह कहे कि-कोई भी महिला किसी व्यक्ति को झूठे आरोप लगाकर जेल करवा दें उसका कोई माई का लाल जज कुछ नहीं बिगाड़ सकता है. अब मेरी कानून व्यवस्था को यह चुनौती हैकि-अब क्यों नहीं कोई अदालत इस घटना पर संज्ञान लेती हैं? (क्रमश:)

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

यह हमारी नवीनतम पोस्ट है: