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गुरुवार, अगस्त 06, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( अगस्त -2015 )

1 अगस्त 2015 : जब तक आप प्रयत्न करना बंद न कर दें, अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता है. 

2 अगस्त 2015 : क्या आपको जीवन रूपी वृक्ष का ज्ञान है या आप केवल इसकी टहनियों के नीचे ही खड़े हैं?

3 अगस्त 2015 : धन कमाना बुरा नहीं है, धन का दुरूपयोग करना बुरा है.

4 अगस्त 2015 : कभी भी गलतफहमी के शिकार होकर अच्छे सम्बधों को बिगड़ने न दें. 

5 अगस्त 2015 : दूसरों को बदलने के पहले स्वयं को बदलना आवश्यक है.

6 अगस्त 2015 : लाठी व पत्थर से हड्डियाँ टूटती है परन्तु शब्दों से प्राय: सम्बन्ध टूट जाते हैं.

7 अगस्त 2015 : आलसी व्यक्ति को आसान-से-आसान काम भी कठिन लगता है. आलस्य ही मानव जीवन की प्रगति में बाधक है.

8 अगस्त 2015 : सज्जनता की परीक्षा आपके व्यवहार से होती है.

9 अगस्त 2015 : याद रखिये कि माँ-बाप के आचरण से बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं.

10 अगस्त 2015 : यदि आपने एक अवसर गँवा दिया तो आंसुओं के बादलों से अपनी दृष्टि धुंधली मत कीजिये. अपनी दृष्टि स्वच्छ रखिये.

11 अगस्त 2015 : जवाबदारियां सम्भालते हुए मन को सदा स्वतंत्र रखना-यह भी एक कला है.

12 अगस्त 2015 : विचार ही सभी कर्मों के बीज है इसलिए मुझे सिर्फ अच्छे, शुध्द बीज ही बोने चाहिए, जिनसे श्रेष्ठ फल प्राप्त होंगे.

13 अगस्त 2015 : असत्यता पर आधारित सम्बन्ध रेत की नींव पर बने भवन के समान हैं. 

14 अगस्त 2015 : अगर हम सत्य से छिपते हैं तब इसका अर्थ है कि हम अवश्य ही असत्य के संग रह रहे हैं. 

15 अगस्त 2015 : अगर आपको देखना ही है तब हर एक की विशेषताएं देखिये. अगर आपको कुछ छोड़ना ही है तब अपनी कमजोरियां छोडियें.     

16 अगस्त 2015 : अगर आँखें आत्मा की खिड़कियाँ है तब क्या आप अपनी आँखें स्वच्छ रखते हैं ? गंदी खिडकियों का अर्थ है कि आपके पास छिपाने के लिए कुछ है.

17 अगस्त 2015 : यदि में अपने सारे लेन-देन ईमानदारी से करता हूँ तब मुझे कभी भी भय का अनुभव नहीं होगा.

18 अगस्त 2015 : बुराई का चिन्तन करने या बुराई से डरने से बुराई मन में घर कर जाती है.

19 अगस्त 2015 : जहाँ प्रेम नहीं, वहां शांति नहीं हो सकती. जहाँ पवित्रता नहीं, वहां प्रेम नहीं हो सकता है.

20 अगस्त 2015 : नैतिकता तथा गुण हीरे-रत्नों से भी अधिक मूल्यवान हैं. यह मनुष्य को सन्तुष्टि प्रदान करते हैं तथा उसे प्रभु-प्रिय व लोक-प्रिय बना देते हैं. 

21 अगस्त 2015 : जिस व्यक्ति ने प्रशंसा करना तो सीखा है परन्तु ईर्ष्या करना नहीं, वह अत्यंत भाग्यशाली है.

22 अगस्त 2015 : जैसे अहं भाव से घमंड पैदा होता है वैसे ही विभ्रम (शक, संदेह) मोह का परिणाम है. 

23 अगस्त 2015 : दिव्य गुण मानव को ईश्वर के समीप ले आते हैं जबकि विकार उसे ईश्वर से दूर ले जाते हैं. 

24 अगस्त 2015 : धैर्य व नम्रता नामक दो गुणों से व्यक्ति की ईश्वर से समीपता बनी रहती है.

25 अगस्त 2015 : अहं भाव से मानव में वे सारे लक्षण आ जाते हैं, जिनसे वह अप्रिय बन जाता है.

26 अगस्त 2015 : अपशब्द प्रयोग का करने का अर्थ यह है कि मुझ में इतनी भी अक्ल नहीं है कि मैं अन्य शब्दों का चयन कर सकूं. 

27 अगस्त 2015 : ईश्वर से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने का अर्थ है कि आप सभी इच्छाओं से पार जा चुके हैं. 

28 अगस्त 2015 : यदि सत्यता व ईमानदारी मुझे सहज लगती हैं तब परमात्मा से प्रेम भी सहज प्राप्त हो सकता है. 

29 अगस्त 2015 : यदि व्यक्ति अपने नैतिक मूल्य खो देता है तब मानो अपना सब कुछ खो देता हैं. 

30 अगस्त 2015 : अच्छी व स्वच्छ प्रतियोगिता स्वस्थ बनाती है परन्तु ईर्ष्या एक घातक रोग है.

31 अगस्त 2015 : परमात्मा गुणों के सागर हैं. यदि आप किसी विकार की अग्नि में जल रहे हैं तब उस सागर में डुबकी लगाइये. 


ओवरसीज़ व हेल्थ मेडिक्लेम और गाड़ियों (1st पार्टी व 3rd पार्टी) के इंश्योरेस और भारत के सभी समाचार पत्रों / पत्रिकाओ में विज्ञापन बुकिंग हेतु : निष्पक्ष, निडर, आज़ाद विचार, अपराध विरोधी, स्वतंत्र पत्रकार, कवि और लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक (प्रधान संपादक-जीवन का लक्ष्य, शकुन्तला टाइम्स, उत्तम बाज़ार) पूर्व प्रत्याशी-उत्तमनगर विधानसभा 2008 व 2013 और दिल्ली नगर निगम 2007 व 2012 (वार्ड नं. 127 व 128) चुनाव चिन्ह-कैमरा # सम्पर्क सूत्र : 9910350461, 9868262751, 011-28563826  ईमेल: sirfiraa@gmail.com सोशल आई डी : www.facebook.com/sirfiraa, www.twitter.com/Nirbhik20 मेरे ब्लॉग :-www.rksirfiraa.blogspot.in, www.shakuntalapress.blogspot.in ऑफिस का पता : A-34-A, शीशराम पार्क, सामने-शिव मन्दिर, उत्तम नगर, नई दिल्ली-110059.

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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