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सोमवार, जुलाई 06, 2015

हमारे जीवन का दर्शन ( जुलाई-2015 )

1 जुलाई-2015 : अगर आप सदा स्वयं की दूसरों के साथ तुलना करते रहते हैं तो आप अवश्य ही अहंकार अथवा ईर्ष्या के शिकार हो जायेंगे. 

2 जुलाई-2015 : अच्छी पुस्तकें अच्छे साथी की तरह हैं. अश्लील साहित्य हमारे मन को दूषित करता है तथा हमें गलत रास्ते की ओर अग्रसर करता है.

3 जुलाई-2015 : समस्याएं चाहे कैसी भी हों परन्तु इनसे घबराइए मत, बल्कि इन्हें परीक्षा समझकर पास कीजिये.

4 जुलाई-2015 : जीवन को आबाद करना है तो मैं कौन हूँ ? इस पहेली को हल कीजिये. मैं और मेरे-मन के भान से मुक्त हो जाइये.

5 जुलाई-2015 : ज्ञान सबसे धन है. स्वयं से पूछें -"मैं कितना धनवान हूँ?"

6 जुलाई-2015 : यदि आपके मुख से गंदे बोल निकलते हैं तो आपका मन कैसा होगा?

7 जुलाई-2015 : हमारे वचन चाहे कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हों परन्तु दुनियां हमें हमारे कर्मों के द्वारा पहचानती है.

जुलाई-2015 : यदि आप मृत्यु से भयभीत होते हैं तो इसका अर्थ यह है कि आप जीवन का महत्त्व ही नहीं समझते हैं.

जुलाई-2015 : आप अपने अधिकारों के प्रति ही जागरूक न रहें अपितु इस बात का भी ध्यान रखें कि आप सही मार्ग पर हैं या नहीं.

10 जुलाई-2015 :अधिक सांसारिक ज्ञान अर्जित करने से आप में अहंकार आ सकता है परन्तु आध्यामिक ज्ञान जितना अधिक अर्जित करते है उतनी नम्रता आती है.

11 जुलाई-2015 : आप किसी समस्या के बारे में कितनी भी चिंता करें परन्तु क्या आपका चिंतित मन उस समस्या का समाधान कर सकता है ?

12 जुलाई-2015 : समय ही जीवन है. समय को बर्बाद करना अपने जीवन को बर्बाद करने के समान है.

13 जुलाई-2015 : किसी दूसरे व्यक्ति की आलोचना करने से पहले हमें अपने अन्दर झाँक कर देख लेना चाहिए.

14 जुलाई-2015 :लोभ को अभी जीतने का प्रयास करें, क्योंकि "मानव जब बूढ़ा भयो, तृष्णा भई जवान"

15 जुलाई-2015 :जब कोई व्यक्ति परमात्मा को आत्म-समर्पण करता है तो वह अपना मन ईश्वर की ओर लगाकर उसी की श्रीमत को सुनता है तथा उसी के अनुरूप कर्म करता है.

16 जुलाई-2015 : हम सितारों की दूरी तथा समुद्र की गहराई का माप करते हैं परन्तु हम कौन हैं तथा इस संसार में क्यों आये हैं, इस विषय में कितना जानते हैं?

17 जुलाई-2015 :कभी-कभी हम दूसरों को बदलने के लिए बाध्य कर देते हैं, क्योंकि हम चाहते हाँ कि वे वैसे ही बनें, जैसा हम चाहते हैं.

18 जुलाई-2015 : किसी चीज़ को समझने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है किन्तु उसे महसूस करने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है.

19 जुलाई-2015 : एक बार आपको कुछ न करने की आदत पड़ जाये तो आप पायेंगे कि व्यस्त होने के लिए समय ही नहीं बचता है.

20 जुलाई-2015 : दर्पण में आप अपना चेहरा देख सकते हैं, चरित्र नहीं.
21 जुलाई-2015 : हमारे विचारों का स्तर ही हमारी निजी प्रसन्नता का स्तर निर्धारित करता है. 

22 जुलाई-2015 : अगर आप अतीत (बीती) को ही याद करते रहेंगे तो वर्तमान में जीना कठिन लगेगा व भविष्य असम्भव प्रतीत होगा.

23 जुलाई-2015 : यदि घर में हिंसा शुरू हो जाएँ तो यह समाज में खून-खराबे जैसा उग्र रूप धारण कर सकती है.

24 जुलाई-2015 :  यदि आन्तरिक स्थिति अशांति की होगी तो सभी बाहरी चीजों मिएँ गडबडी मालूम पड़ती हैं.

25 जुलाई-2015 : आपके मुख से उच्चारित सभी शब्दों में से कितने शब्द परमात्मा के प्रति होते हैं?

26 जुलाई-2015 : वर्तमान समय जो कुछ आपके हाथ में है, यदि आप उसको महत्त्व नहीं देते हैं तब जो भविष्य में आपको मिलने वाला है , उसका सम्मान कैसे कर सकेंगे? 

27 जुलाई-2015 :कौन-सी चीज़ अधिक महत्त्वपूर्ण है-आपका जीवन स्तर या उचित आदर्शों वाला जीवन?

28 जुलाई-2015 : यदि कोई व्यक्ति नेत्रहीन है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह अंधकार में है.

29 जुलाई-2015 :चरित्र ऐसी वस्तु है जो स्थूल दर्पण में नहीं देखी जा सकती है.

30 जुलाई-2015 :सावधान रहिए-आपकी प्रत्येक अभिव्यक्ति क्रिया की प्रतिक्रिया होती है.

31 जुलाई-2015 : श्रेष्ठ स्मृतियों का स्विच आपके हाथ में हो तो जीवन आनन्दमय बन जायेगा.


ओवरसीज़ व हेल्थ मेडिक्लेम और गाड़ियों (1st पार्टी व 3rd पार्टी) के इंश्योरेस और भारत के सभी समाचार पत्रों / पत्रिकाओ में विज्ञापन बुकिंग हेतु : निष्पक्ष, निडर, आज़ाद विचार, अपराध विरोधी, स्वतंत्र पत्रकार, कवि और लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक (प्रधान संपादक-जीवन का लक्ष्य, शकुन्तला टाइम्स, उत्तम बाज़ार) पूर्व प्रत्याशी-उत्तमनगर विधानसभा 2008 व 2013 और दिल्ली नगर निगम 2007 व 2012 (वार्ड नं. 127 व 128) चुनाव चिन्ह-कैमरा # सम्पर्क सूत्र : 9910350461, 9868262751, 011-28563826  ईमेल: sirfiraa@gmail.com सोशल आई डी : www.facebook.com/sirfiraa, www.twitter.com/Nirbhik20 मेरे ब्लॉग :-www.rksirfiraa.blogspot.in, www.shakuntalapress.blogspot.in ऑफिस का पता : A-34-A, शीशराम पार्क, सामने-शिव मन्दिर, उत्तम नगर, नई दिल्ली-110059.

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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