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रविवार, दिसंबर 11, 2011

मेरा हर शब्द देश और समाजहित के लिए.....

दोस्तों, अच्छी चीज या बात/संस्कारों की नकल करना बहुत अच्छी बात है. मगर आप नक़ल के साथ अकल(बुद्धि) का प्रयोग जरुर करों. हर बात हर व्यक्ति द्वारा अपने अनुभवों से प्राप्त सीख़ कहूँ या सबक को ध्यान में रखकर कहता है. कहीं ऐसा न हो दोस्तों नक़ल के चक्कर में आपके साथ भी चूहे और हाथी वाली कहानी बन जाए. जिसमें चूहे ने अपने आगे बैठे हाथी की नक़ल करते हुए अपने परीक्षा के पेपर में यह लिखा था कि-दोस्त इस बार जब तुम हमारे यहाँ पर गर्मी की छुटियों में आयोंगे,तब हम अपनी सूंड में पानी भर-भर कर एक दुसरे के ऊपर डालेंगे. 
तब चूहे के टीजर ने परीक्षा का पेपर देखकर तुरंत भांप लिया था कि चूहे ने हाथी की नक़ल की है. परीक्षा में विषय था कि अपने मित्र के साथ गर्मी की छुटियों क्या करोंगे ? कृपया किसी भी संदेश को कॉपी करके कहीं पर पेस्ट करने से पहले संदेश में सुधार जरुर कर लें. एक छोटा-सा उदहारण देखें :- 

@संगीता (बदला हुआ नाम)-रमेश जी, आपके संदेश की नक़ल कर रही हूँ. आपको भी पता होगा कि फेसबुक पर लड़कियों की बातों पर लोग ज्यादा ध्यान देते हैं. मुझे क्षमा करें.

रमेश कुमार सिरफिरा- ‎@ संगीता जी, कोई बात नहीं, लेकिन नकल के साथ अक्ल का भी प्रयोग करना और क्षमा मांगने की कोई जरूरत नहीं है.हम पहले ही लिख चुके हैं कि मेरी कलम से लिखा मेरा हर शब्द देश और समाजहित के लिए है. इसको जहाँ चाहो साझा करो. मेरा कोई भी कॉपी राइट नहीं है. मैंने इस भारत माता की कोख में जन्म लिया. यहीं पर एक-एक अक्षर जोड़कर "शब्द" लिखना सिखा है. खाली हाथ आया हूँ और खाली हाथ ही लौट भी जाऊँगा. लेकिन आप लड़की होकर ऐसी बात ना करें. अपने आप को उपयोग की वस्तु ना बनाये. चाकू खरबूजे पर गिरे या खरबूजा चाकू पर नुकसान खरबूजे का ही होता है. यह तो फेस बुक पर किसी भी लड़की की प्रोफाइल देख पता चल जाता है कि उनको दोस्ती के कितने निवेदन आते हैं ? सब उसको अपना दोस्त बनाना चाहते हैं. मेरी प्रोफाइल की "वाल" पर अनेकों संदेश है. उनका भी प्रयोग कर सकती है. मगर सम्भल करें. कहीं किसी कथन को लेकर आप "विवाद" में ना फंस जाए. इसके लिए पहले थोड़ी हमसे जानकारी लेना उचित समझे तो आपका स्वागत है.

नोट:-लेख में प्रयोग नाम काल्पनिक है. समानता मात्र संयोग है. यह एक मात्र अनुभव है.

सूचना-विशेष खोजबीन में हमने पाया कि फेसबुक पर अगर एक लड़की मात्र एक लम्बा-सा hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii या hellooooooo अपनी प्रोफाइल की "वाल" कर दें.तब उस पर टिप्पणी के ढेर लग जाते हैं और अगर उसने अगर कोई गंभीर बात या कोई ग़ज़ल डाल दी. तब क्या होगा ? जरा सोचो और विचार करों. 

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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