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सोमवार, दिसंबर 17, 2012

सिरफिरे पत्रकारों की आवश्यकता है

 दोस्तों, मैं बहुत जल्द अपना अखबार फिर से शुरू कर रहा हूँ. जो काफी समय से बंद था. क्या आप हमारे अखबार के साथ जुडना पसंद करेंगे/ करेंगी. यदि आप थोड़ा प्रयास करके हिन्दी की टाइपिंग सीख लेते/लेती है. तब आपके सभी लेख प्रकाशित हो सकते हैं. इसके लिए आपको अपने कम्प्युटर में पेजमेकर का सोफ्टवेयर लोड करके हिन्दी के "नारद" फॉण्ट में टाइप करके अपना लेख/कविता और रचनाएँ ईमेल करनी होगी. अखबार में नेट वाली हिन्दी नहीं चल सकती है, क्योंकि यह मंगल फॉण्ट में होती है. इसलिए पेजमेकर सोफ्टवेयर में "नारद" फॉण्ट में लिखकर इमेल करनी होगी. हम पोजिटिव से अखबार नहीं छापते हैं, बटर पेपर से छपता है. हिन्दी का "नारद" फॉण्ट मोटा है और इसकी प्रिंटिंग भी अच्छी आती है. पेजमेकर में हिन्दी कैसे लिखें की जानकारी के लिए उपरोक्त लिंक http://rksirfiraa.blogspot.in/2010/08/blog-post_23.html को पढ़ें. मुझे लगता है हमारे अखबार से जुड़ने के बाद आपके द्वारा उठाये मुद्दों को काफी गम्भीरता से लिया जायेगा. आपके पास पत्रकारिता से जुड़े कानून और अधिकार भी होंगे, जो आपके लिए हितकारी होंगे. 


 यदि आपको पत्रकारिता का कोई अनुभव नहीं है या कोई डिग्री नहीं है. उसकी कोई बात नहीं है. सिर्फ सच लिखने के लिए ईमानदारी और देश व समाज के प्रति समर्पणभाव ही काफी है. डिग्री की कोई जरूरत नहीं है. लोगों के पास डिग्री होने के बाद सच नहीं लिख पाते हैं. सच लिखने के लिए एक इंसान बनकर अपने ज़मीर को जिन्दा रखना होता है. आपको पत्रकरिता के अनुभव से संबंधित काफी मदद करूँगा. पत्रकारिता से जुड़ी काफी अच्छी किताबों का मेरे पास संग्रह है. जो आपके लिए काफी लाभकारी व हितकारी होगी. आपके हर जनहित मुद्दों को प्रकाशित करने के लिए भी हम तैयार है.  सच लिखने और प्रकाशित करने के मामले में हम "पागल" संपादक है. सच के लिए मौत को भी खिलौना बनाकर खेलते हैं. हम आपके साथ है. हमें आपका इंतजार रहेगा..........................
    
 दोस्तों, बिना विज्ञापन के अखबार के चलना लोहे के चने चबाने के समान होता है. छोटे अख़बारों के पास साधन कम होते है और ईमानदार पत्रकार के साथ अन्य कई आर्थिक समस्या भी होती है और सच लिखने के लिए "पैसा" पहली जरूरत है. यदि किसी ईमानदार पत्रकार के क्षेत्रीय नेताओं ( छुटनभये नेता, पार्षद, विधायक, सांसद ) से संबंध न हो और उसके हित की बात न लिखो तो विज्ञापनदाता को भी धमकाकर विज्ञापन देने के लिए इंकार(छापे का डर दिखाकर) तक करवा देता है. यह तो मेरा कलम से सच लिखने के प्रति पागलपन है. इसलिए विज्ञापनदातों से अपने अच्छे संबंध है. मेरी विज्ञापन एजेंसी भी है. मैं सारे समाचार पत्रों-पत्रिकाओं के लिए विज्ञापन भी बुक करता हूँ. आप अपने विज्ञापन और लेख आदि भेजकर सहयोग करें.
  दोस्तों, "जीवन का लक्ष्य" समाचार पत्र का एक अंक नए साल पर आ रहा है और दूसरा अंक लोहड़ी पर आने की पूरी उम्मीद है. अब मेरा फेसबुक, गूगल और ब्लॉग आदि पर कम ही आना होगा. अपनी पत्रकारिता शुरू करके जल्द से जल्द कर्ज मुक्त होना है. अपने सारे कार्यों को दुबारा शुरू करना है. प्रकाशन परिवार की पूरी व्यवस्था को ठीक करना है. ऑफिस की फाइल आदि के साथ बहुत से अन्य कार्य भी करने है.         
   दोस्तों, उपरोक्त इस पोस्ट के साथ लगे चित्र को डाऊनलोड करके जरुर पढ़ें.

2 टिप्‍पणियां:

  1. में तैयार हूँ .मेरे पास पत्रकारिता की डिग्री नहीं हैं मेरा अनुबव आपको बता सकता हूँ
    http://www.nachna.org/
    http://www.dilipsoni.org/

    उत्तर देंहटाएं

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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