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गुरुवार, मार्च 24, 2011

मूर्ख सम्मेलन संपन्न हुआ

नई दिल्ली : पश्चिमी दिल्ली की साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था "आस्वाद" द्वारा होली के सुअवसर पर "मूर्ख सम्मेलन"  विगत दिन 18 मार्च को आर-7, वाणी विहार, उत्तम नगर, दिल्ली के ऊपरी प्रांगण में संपन्न हुआ. जिसमें श्री विनोद बब्बर ने पिछले वर्ष की मूर्खता (मूर्ख-शिरोमणि) का चार्ज राधेश्याम तिवारी को सौंपा.इसमें मुख्य अतिथि-डॉ रामदरश मिश्र, डी.के. श्रीवास्तव, डॉ रमाकांत शुक्ल, डॉ रामसुरेश पाण्डेय थें. 
           हिंदी अकादमी, दिल्ली के सहयोग से "फनकार" ग्रुप के कलाकारों ने अपने संचालक एहतराम सद्दीकी के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रम-नृत्य-गीत प्रस्तुत किये. होली मिलन के आयोजन में श्री डी.के.शर्मा, बी.के.गुप्ता और हरजीत लाल भाटिया का सहयोग उल्लेखनीय रहा. पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन और संयोजन साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्था "आस्वाद" के प्रमुख डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव ने किया. समारोह में उपस्थित  साहित्य प्रेमियों और अतिथियों को विभिन्न हास्य उपाधियाँ दी गई. जिसमें पुरुषों को जहाँ "पेटीकोट इंचार्ज-हरजीत लाल भाटिया, लंठराज नं. वन-रमाशंकर श्रीवास्तव, बगुला भगत-बी.के.गुप्ता, डुप्लीकेट हसबैंड-डॉ. राहुल, बुध्दिशत्रु विशारद-डी. के.श्रीवास्तव, पंचर मैकेनिक-रामप्रसाद मीणा" पदवियां दी गई, वहीँ महिलायों को " मेट्रो खचाखच-सुषमा भंडारी, सुनामी भूकम्प-सुजाता प्रसाद, चंचल चितवन-सुनीता कक्कड़, रसगुल्ला-सविता सिंह, फागुन की परी-वीणा श्रीवास्तव, भौजी मनमौजी-आशा पंडित" जैसी उपाधियों से नवाजा गया. होली के गीतों, हंसी के ठहाकों और कविता पाठ के साथ ही अनेक कवियों ने काव्यात्मक अंदाज में होली की बधाई दी. एक कवि  ने कार्यक्रम समापन होने पर मिलने वाले प्रसादरूपी "मालपुरे और कटहल की सब्जी" पर भी कविता सुनकर शोरताओं का खूब मनोरंजन किया.
 
 
  
 
 

4 टिप्‍पणियां:

  1. मूर्ख सम्मेलन संपन्न हुआ, आप पहले बताते तो जरुर आते फिर देखते ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मूर्ख सम्मेलन संपन्न हुआ, आप पहले बताते तो जरुर आते फिर देखते ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. माँ का बुलावा आया है. माँ(वैष्णों देवी) के दर्शनों को जा रहा हूँ, इसलिए 25 मार्च से 31मार्च तक मेरे दोनों फ़ोन बंद रहेंगे और ईमेल का जवाब देने में असमर्थ रहूँगा.

    उत्तर देंहटाएं

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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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