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शुक्रवार, जून 17, 2011

गुस्ताखी माफ़ करें

गुस्ताखी माफ़ करें-अब कैमरा 
ऐसी फोटो नहीं लें पायेगा
हिंदी साहित्‍य निकेतन,हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग में सिरमौर रवीन्‍द्र प्रभात और अविनाश वाचस्‍पति का सामूहिक श्रम. शनिवार दिनांक 30 अप्रैल 2011 को हिंदी भवन दिल्‍ली में हिन्‍दी साहित्‍य निकेतन परिकल्‍पना सम्‍मान समारोह को संबोधित करते हुए यह कार्यक्रम अध्‍यक्षता हास्‍य व्‍यंग्‍य के सशक्‍त और लोकप्रिय हस्‍ताक्षर अशोक चक्रधर ने की। इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि रहे वरिष्‍ठ साहित्‍यकार डॉ. रामदरश मिश्र और विशिष्‍ट अतिथि रहे प्रभाकर श्रोत्रिय। साथ ही प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता और डायमंड बुक्‍स के संचालक नरेन्‍द्र कुमार वर्मा भी मंचासीन थे।             
          इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता ने कहा कि जीवन के उद्देश्‍य ऐसे होने चाहिए कि जिसमें मानवीय सेवा निहित हो। मैं ब्‍लॉगिंग के बारे में बहुत ज्‍यादा तो नहीं जानता किंतु जहां तक मेरी जानकारी में है और मैंने महसूस किया है, उसके आधार पर यह दावे के साथ कह सकता हूं कि हिंदी ब्‍लॉगिंग में सामाजिक स्‍वर और सरोकार पूरी तरह दिखाई दे रहा है। कई ऐसे ब्‍लॉगर हैं जो सामाजिक जनचेतना को हिंदी ब्‍लॉगिंग से जोड़ने का महत्‍वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। यह दुनिया विचारों की दुनिया है, बस कोशिश यह करें कि हमारे विचार आम आदमी से जुड़कर आगे आएं. 

                 मैं वैसे पत्रकारों के सम्मेलन आदि जाता नहीं हूँ क्योंकि वहां पर वहीँ तीन-चार बातों को बोला जाता जो कोई पत्रकार अपने जीवन में अपनाकर गरीबी या भौतिक वस्तुओं के अभाव में जीना नहीं चाहता है. उपरोक्त कार्यक्रम में भी प्रमुख समाजसेवी विश्‍वबंधु गुप्‍ता ने जो कहा उसको एक कान से सुनकर दूसरे कान से बाहर निकालकर अपने-अपने रास्ते पर चल दिए और आज किसी को उनकी एकाध बात याद भी नहीं होगी. अगर होगी भी तो उसपर अमल करने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. चलिए कोई बात नहीं. कुछ खाकर व कुछ बिना खाए लौट गए.  

           इसके बाद उपरोक्त कार्यक्रम को लेकर एक से एक पोस्ट आई. किसी पोस्ट में आलोचना और किसी में तारीफ के पुल बाँध गए. कहीं-कहीं पर पोस्ट में हंसी-मजाक के साथ-साथ गंभीर बातें तक की गई. कुछ इन्हीं बातों का समावेश लिये लिंक दे रहा हूँ. जो किसी करणवश नहीं पहुँच पाए हो या किसी पोस्ट की जानकारी न होने के कारण जाने से वंचित रह गए हो.   

शाहनवाज के घर से हिन्दी भवन तक


परिकल्पना सम्मान : लोकसंघर्ष के जनसंघर्ष से साहित्य निकेतन की उत्तर आधुनिकता तक


अग्रवाल जी की भाव विह्वलता और साढू़ भाई का प्रेम


मुख्य अतिथि के असम्मान से उखड़ा मूड खुशदीप का


बुरा नहीं प्रकाशन का व्यवसाय


उद्यमी ठाला नहीं बैठता


क्या कहते हैं? उद्यमी 'सिरफिरा' जी


 परिकल्‍पना डॉट कॉम 

 नुक्‍कड़ डॉट कॉम

सतीश सक्सेना की धमकी - सम्मान समारोह में बड़ा खुलासा

कई मायनों में भव्य था परिकल्पना सम्मान समारोह!

 "हिन्दी साहित्य निकेतन परिकल्पना सम्मान समारोह" 

हिंदी ब्लागिंग से आशाएं बढ़ा गया दिल्ली में हुआ ब्लागर्स सम्मलेन 

ब्लॉगिग , ब्लॉगर्स , पुरस्कार आयोजन , राजनीतिज्ञ , मीडियाकर्मी .....और कुछ कही अनकही .

ऐसा दिन जल्दी आये यही कामना हैं जब ब्लोगर मंच पर खडा हो और लोग उसके हाथ से पुरूस्कार ले । लेकिन होगा तब जब लोग अंधी दौड़ मे नहीं भागेगे

ब्लोगिंग का अब हर कदम देश व समाजहित में उठेगा तथा शर्मनाक भ्रष्टाचार मिटेगा...  

अरे भाई आगे से हटो हमें फोटो खींचने के लिए नहीं बुलाया क्या?
वहां पर श्री अविनाश जी से विवादित फोटो को लेकर भी जिक्र किया था. जिसकी पिछले दिनों ब्लॉग पर बहुत चर्चा हुई थीं. जवाब कोई तर्क पूवर्क नहीं था. ईनामों को लेकर भी बंदर -बाँट हुई है और वहां पर मौजूद कई ब्लॉगर विरोध जता रहे थें. कई ब्लॉगर विरोध के कारण ही दावत (खाना) खाए बगैर ही चले गए थें. करते ब्लोगगिरी और नाम गुप्त रखने का हमसे वादा लेते हैं आखिर क्यों करते हैं इतना दोगलापन? यह कोई समाचार पत्र नहीं है कि विज्ञापन नहीं मिले तो पत्र नहीं छपेगा ब्लॉग लिखने में केवल इन्टरनेट का ही खर्चा आता है या विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे थें अगली बार उनको भी ईनाम देकर चुप करा दिया जाए. मुझे उपरोक्त कार्यक्रम की कोई सूचना नहीं थी .बल्कि अपनी समस्याओं के चलते कुछ लोगों से मिलना जरुरी था. किसी से कुछ न कुछ जानकारी लेनी थीं .किसी से ब्लॉग के बारे में तकनीकी और किसी से अपने केसों को लेकर क़ानूनी दांव -पेजों की छोटी -छोटी जानकारी. छोटी -छोटी गलतियों को छोड़कर कार्यक्रम अच्छा था. थियेटर के कलाकारों ने बहुत अच्छा एक उपन्यास की कहानी पर आधरित एक नाटक का बहुत सुन्दर मंचन किया था मैं अनेकों ब्लोगरों के नाम नहीं जानता और कई को चेहरों पर मुखोटे थें और कई का नाम मेरा फर्ज गवाही नहीं दे रहा है .
जल्दी से किताब देखने दो मीडिया को कहीं चली न जाये
भाई लोगों हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो हमारी फोटो बिगड़ दी
मुझे इनाम जल्दी से दो बेशक काजल कुमार ही दे दो. घर जल्दी जाना है
बेटा तुमको अपनी फोटो नहीं खिंचवानी है तो हमारी फोटो तो लेने दो.

 अच्छी तरह से देखभाल लेना भाई अपना ईनाम. जरा मैं भी अपना चश्मा ठीक कर लूँ.

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का एक सशक्त जन लोकपाल भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का एक सशक्त जन लोकपाल विधेयक बनाने के लिए जब 5 अप्रैल 2011 को जंतर-मंतर पर एक बिगुल बजाया. तब ऐसा लगा कि-सारे मृत आदमियों में किसी ने जान डाल दी हो. देश का हर वो व्यक्ति जो भी देश में दीमक की तरह फैले भ्रष्टाचार से परेशान था. वो श्री अन्ना हजारे जी के साथ खड़ा नजर आया. जो प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई को अहमियत नहीं दे रही. वो भी श्री हजारे को पूरे देश से मिले समर्थन को देखकर उनके आगे-पीछे घूमते नजर आये. उसके बाद ही ब्लॉग जगत के हर दुसरे ब्लॉग में हजारे जी के अनशन और उनकी लड़ी जा रही लड़ाई पर पक्ष-विपक्ष के लेखों की भरमार सी गई थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ श्री हजारे की लड़ाई सोशल वेबसाईटों और ब्लोगों से शुरू होकर जब घर-घर तक पहुंची. तब सरकार को मजबूर होकर आखिर सशक्त जन लोकपाल विधेयक बनाने की शुरुयाती मांगों मानना पड़ा, क्योकि इसके अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था. मैं भी अब तक पत्रकारिता के माध्यम से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाली लड़ाई के साथ ही अपनी बीमारी की हालत में जैसी भी हिम्मत थी. उसी हिम्मत को बटोरकर 5 अप्रैल को किसी से पूछ-ताछ कर जन्तर-मन्तर पर पहुंचा था, क्योंकि अपने क्षेत्र में पत्रकारिता करने के कारण ही दिल्ली के अधिक्तर स्थानों की आज भी जानकारी नहीं है.लेकिन अपने क्षेत्र में विश्वनीय सूत्रों के कारण अपने क्षेत्र की किसी सूचनाओं से पहले कभी वंचित नहीं रहा हूँ. आज भी अपने क्षेत्र के आम-आदमी में मेरे प्रति बहुत ज्यादा विश्वास है. इसका मुख्य कारण रहा मेरी लगभग 17 वर्षीय ईमानदारी और निष्ठापूवर्क निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का करना. अपने कुछ निजी कारणों (मेरे ब्लोगों के नियमित पाठक और दोस्त उनसे अवगत भी है) से इस पोस्ट को प्रकाशित करने देरी भी हो गई. लेकिन कार्य की प्राथमिकता को समझते हुए.समयानुसार कार्य भी किये. जिसमें अपने क्षेत्र में आन्दोलन को लगभग 2000 लोगों को मिस कॉल करने के लिए प्रेरित किया. अपनी समर्थता अनुसार प्रचार भी किया और पहले दिन जन्तर-मन्तर पर कवरेज भी की. अपने ब्लोगों पर भी आज भी प्रचार करने के साथ ही खुद भी प्रचार कर रहा हूँ और अपने क्षेत्र में दो दिन एक तख्ती पहन कर घुमा था उसकी कुछ फोटो प्रकाशित भी कर रहा हूँ और जिस दिन अनशन खत्म हुआ, उसी दिन लगभग 20 RWA की उत्तम नगर में कैंडल मार्च निकालने की तैयारी करा चूका था. मगर पहले दिन की ही रात 10 बजे अनशन खत्म होने की समाचारों में सूचना प्राप्त हुई. इंडिया अगेंस्ट करप्सन संस्था को अपना आवेदन भी लिखकर भेजा कि-श्रीमान जी, भ्रष्टाचार की लडाई में यह नाचीज़ "सिरफिरा" पत्रकार अपने समाचार पत्र "जीवन का लक्ष्य" के साथ ही सच्चाई के लिए फाँसी का फंदा तक चूमने को तैयार है. कभी मिलने का मौका मिले तो अपनी विचारधारा से अवगत करा सकता. मुझे भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ मामलों की जानकारी देनी है. जो क़ानूनी ताकत, जानकारी और धन अभाव के कारण सामने लाने में असमर्थ हूँ. भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरे पास संस्था के मेरे फ़ोन पर आज भी मैसेज रहे है. मैं अपने क्षेत्र से भ्रष्टाचार से लड़ने वाली बनने वाली किसी भी प्रकार की संस्था या सीमितियों में कार्यकर्त्ता के रूप में कार्य करने के लिए अपने नाम का प्रस्ताव भेज रहा हूँ. स्वीकार करने की कृपया करें. उसके बाद अभी कुछ दिनों पहले ही कोरियर से श्री हजारे कि टीम के एक सदस्य श्री अरविन्द केजरीवाल को श्री हजारे के नाम एक लैटर भी लिखकर भेजा, क्योंकि उनके नजदीक रहने के कारण श्री हजारे तक पत्र पहुँच सकता था. अपने अनुभवों से कैमरे में कैद कुछ अलग-सी फोटोग्राफ्स जिनका आप भी अवलोकन करें. एक पत्र भी जिसको शायद अब तक श्री अन्ना हजारे जी ने पढ़ लिया होगा.
 
  
                                                                               

सोमवार, अप्रैल 18, 2011

देशवासियों/पाठकों/ ब्लागरों के नाम संदेश:-

शकुन्तला प्रेस के मोनोग्राम को धयान से देखें और उसमें लिखें शब्दों का अर्थ समझने की कोशिश करें.

इन्टरनेट की दुनियां का यह नाचीज़ अनपढ़, ग्वार इंसान किसी प्रकार की अधिक जानकारी होने के कारण कभी भी किसी भी ब्लॉग पर पहुँच जाता हैं. कई बार उपरोक्त ब्लॉग पर अच्छी जानकारी वाली पोस्ट मिलती है और कई बार एक धर्म के समर्थक दूसरेधर्म के समर्थकों को अपशब्दों का प्रयोग करते हुए देखा.पता नहीं "कलम" जो तलवार से ज्यादा से भी ज्यादा खतनाक कार्य करती है को पता नहीं थोड़ा नाम कमाने के लिए उसकी पवित्रता को नष्ट करने पर क्यों तुले हुए है. मैंने कई ब्लोगों पर अपशब्दों का प्रयोग देखा है. इससे मेरा मन बहुत आहत हुआ है. इसलिए आज की पोस्ट कुछ लोगों की विचारधारा में परिवर्तन करने के उद्देश्य लिखी है. शायद कोई एक व्यक्ति अपनी विचारधारा में बदलाव ला सकें. क्या पाठकों लेखकों को किसी भी मुद्दे पर एक स्वस्थ बहस नहीं करनी चाहिए? पाठक अपना अनुभव तर्क रखे और लेखक अपना अनुभव तर्क रखे. मगर इसमें अपशब्दों का स्थान नहीं होना चाहिए. आप अपने विचारों से मेरे मस्तिक में ज्ञानरुपी ज्योत का प्रकाश करें. मेरी उपरोक्त पोस्ट को लिखने का उद्देश्य किसी का अपमान करने या किसी प्रकार अहित करने का नहीं है. अगर आपको फिर भी लगता हैं, उपरोक्त पोस्ट से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ.
देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ ब्लागरों के नाम संदेश:-
मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता? मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.                                  -आपका अपना नाचीज़ दोस्त

सोमवार, अप्रैल 11, 2011

दोस्तों ने खूब धूम मचाई

अभिनेता दर्पण श्रीवास्तव के साथ फोटो खिचवाते पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ़ सिरफिरा 
बी-1/1,संजय एन्कलेव, बिंदापुर-मटियाला रोड, उत्तम नगर पर कौशिक प्रोपर्टीज वाले श्री देवेश कौशिक ने याद किया था. दोस्तों का साथ था और भारत बनाम श्रीलंका का मैच था.हमने भी दोस्तों की टोली में शामिल होकर भारत के खिलाड़ियों द्वारा लगाये चौके-छक्के और श्रीलंका की गिरी हर विकेट पर ताली बजाई.श्रीलंका के खिलाड़ियों द्वारा रोके हर चौके-छक्के  व हर लिये कैच पर अफ़सोस किया और भारत के खिलाड़ियों द्वारा रोके हर चौके-छक्के व हर लिये कैच पर ख़ुशी मनाई.आखिर में भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप जीता. उत्तम नगर के क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़ी स्क्रीन व एल.सी.डी लगाये जाने के समाचार प्राप्त हुए. इस अवसर पर मैच का लुप्त लेने थाना-बिंदापुर के थानाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार यादव भी पहुंचे.खासतौर पर मैच देखने के लिए आये अभिनेता दर्पण श्रीवास्तव (कलर चैनल पर प्रसारित "लागी तुझसे लगन" सीरियल के महादेव और "भाग्य-विधाता" में अभिनीत 'नागेश्वर चाचा' का पात्र) के छोटे-बड़े बच्चों ने आटोग्राफ लेने के साथ ही फोटो खिचवायें. कुछ व्यक्तियों ने सार्वजनिक क्षेत्र में ध्रूमपान किया और कुछ व्यक्ति शराब का सेवन करने के बाद इंसान और जानवर में फर्क करना भूल गए थें.
         किसी घटिया मानसिकता वाले व्यक्ति ने "शकुन्तला प्रेस" का फ्लेक्स का बैनर चोरी कर लिया.इससे कह सकते हैं कि-गरीबी में आटा गिला होना.भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप की जीत पर लोगों ने नाच-गाकर और पटाखे छुटाकर जश्न मनाया और इस मौके पर अभिनेता दर्पण श्रीवास्तव ने जल्द ही उत्तम नगर में एक्टिंग स्कूल खोलने की इच्छा व्यक्त की और अपने फ़िल्मी दुनियां से जुड़े अनुभवों को बंटा. अपने भविष्य में प्रसारित होने वाले और पहले के सीरियलों के डायलाग और एक ग़ज़ल सुनाकर अपने पुराने-नए दोस्तों का मनोरंजन किया.हमने कुछ रोमांचकारी क्षणों को कैमरे में कैद भी किया था.जो फोटो के माध्यम से आपके लिए भी प्रस्तुत है.
बच्चों ने दर्पण श्रीवास्तव के साथ फोटो खिचवायें

चेहरों पर तिरंगा बनवाया 




























































बच्चों का उत्साह देखने योग्य था
कुछ लोगों ने सार्वजनिक ध्रूमपान किया 
 
बिंदापुर थानाध्यक्ष भी मैच देखने पहुंचे
पुराने दोस्तों के साथ दर्पण श्रीवास्तव 
मैच का लुप्त लेते अलग अंदाज में कुछ व्यक्ति

यही बैनर चोरी हो गया और गरीबी में आटा गिला हुआ. दर्पण श्रीवास्तव के साथ एक प्रंशसक फोटो खिचवाते हुए.

शीशराम पार्क की कालोनी  के बच्चों  का उत्साह
शीशराम पार्क की कालोनी  के बच्चों और बड़ों का उत्साह

शुक्रवार, अप्रैल 01, 2011

आमन्त्रण-किक्रेट का फाइनल मैच साथ देखने का


 कुछ पुराने दोस्तों ने याद किया है.आने का आग्रह है.दोस्तों की प्यार-मोहब्बत में ताकत ज्यादा है.इसलिए जरुर जाना है.समाचार पत्र में नहीं तो कोई बात नहीं.मगर उपरोक्त समाचार को अपने ब्लॉग में ही स्थान देने का विनम्र अनुरोध है.दोस्तों का साथ होगा और भारत बनाम श्रीलंका का मैच होगा. हम भी दोस्तों की टोली में शामिल होकर भारत के खिलाड़ियों द्वारा लगाये चौके-छक्के और श्रीलंका की गिरी हर विकेट पर ताली बजायेंगे.श्रीलंका के खिलाड़ियों द्वारा रोके हर चौके-छक्के  व हर लिये कैच पर अफ़सोस करेंगे और भारत के खिलाड़ियों द्वारा रोके हर चौके-छक्के व हर लिये कैच पर ख़ुशी मनायेंगे. उत्तम नगर के क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़ी स्क्रीन व एल.सी.डी लगाये जाने के समाचार प्राप्त हुए है. मगर बी-१/१, संजय एन्कलेव, बिंदापुर-मटियाला रोड, उत्तम नगर पर कौशिक प्रोपर्टीज वाले श्री देवेश कौशिक ने खासतौर पर अभिनेता दर्पण श्रीवास्तव(कलर चैनल पर प्रसारित "लागी तुझसे लगन" सीरियल के महादेव और "भाग्य-विधाता" में अभिनीत 'नागेश्वर चाचा' का पात्र) के साथ ही अनेक हास्य-सीरियल कलाकारों को आमंत्रित किया है.आप सभी का मज़ा दुगना करने के लिए चाय के साथ समोसों का विशेष प्रबंध है.
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यह है मेरे सच्चे हितेषी (इनको मेरी आलोचना करने के लिए धन्यवाद देता हूँ और लगातार आलोचना करते रहेंगे, ऐसी उम्मीद करता हूँ)
पाठकों और दोस्तों मुझसे एक छोटी-सी गलती हुई है.जिसकी सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगता हूँ. अधिक जानकारी के लिए "भारतीय ब्लॉग समाचार" पर जाएँ और थोड़ा-सा ध्यान इसी गलती को लेकर मेरा नजरिया दो दिन तक "सिरफिरा-आजाद पंछी" पर देखें.

आदरणीय शिखा कौशिक जी, मुझे जानकारी नहीं थीं कि सुश्री शालिनी कौशिक जी, अविवाहित है. यह सब जानकारी के अभाव में और भूलवश ही हुआ.क्योकि लगभग सभी ने आधी-अधूरी जानकारी अपने ब्लोगों पर डाल रखी है. फिर गलती तो गलती होती है.भूलवश "श्रीमती" के लिखने किसी प्रकार से उनके दिल को कोई ठेस लगी हो और किसी भी प्रकार से आहत हुई हो. इसके लिए मुझे खेद है.मुआवजा नहीं देने के लिए है.अगर कहो तो एक जैन धर्म का व्रत 3 अगस्त का उनके नाम से कर दूँ. इस अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

मेरे बड़े भाई श्री हरीश सिंह जी, आप अगर चाहते थें कि-मैं प्रचारक पद के लिए उपयुक्त हूँ और मैं यह दायित्व आप ग्रहण कर लूँ तब आपको मेरी पोस्ट नहीं निकालनी चाहिए थी और उसके नीचे ही टिप्पणी के रूप में या ईमेल और फोन करके बताते.यह व्यक्तिगत रूप से का क्या चक्कर है. आपको मेरा दायित्व सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए था.जो कहा था उस पर आज भी कायम और अटल हूँ.मैंने "थूककर चाटना नहीं सीखा है.मेरा नाम जल्दी से जल्दी "सहयोगी" की सूची में से हटा दिया जाए.जो कह दिया उसको पत्थर की लकीर बना दिया.अगर आप चाहे तो मेरी यह टिप्पणी क्या सारी हटा सकते है.ब्लॉग या अखबार के मलिक के उपर होता है.वो न्याय की बात प्रिंट करता है या अन्याय की. एक बार फिर भूलवश "श्रीमती" लिखने के लिए क्षमा चाहता हूँ.सिर्फ इसका उद्देश्य उनको सम्मान देना था.
कृपया ज्यादा जानकारी के लिए निम्न लिंक देखे. पूरी बात को समझने के लिए http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html,
गलती की सूचना मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया: http://blogkeshari.blogspot.com/2011/07/blog-post_4919.html

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